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अव्यवस्था के बीच खुले बैंक व डाकघर, जूझे लोग

Thu, 10 Nov 2016 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद Updated Thu, 10 Nov 2016 11:43 PM IST
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Dislocation between the open bank and post office, hostile people
पुराने नोट बदलवाने को बैंक के बाहर लगी कतार। - फोटो : अमर उजाला
प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद एक हजार व पांच के नोट बदलने के लिए गुरुवार को यहां बैंक शाखाओं व डाकघर पर सुबह से भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों में नई करेंसी पाने का उत्साह था, मगर यहां पांच सौ की नई नोट नहीं आने से निराशा मिली।
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दो हजार के नए नोट भी तब बांटे गए, जब चेस्ट से निकले 100 व 50 के नोट खत्म हो गए। डाकघर व बैंक की शाखाओं पर लोगों को तमाम अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। प्रधान डाकघर में जहां सुबह से खड़े लोगों को दोपहर में पुराने नोट के बदले करेंसी नसीब हुई, वहीं शहर के एक बैंक ने नोट बदलने से इंकार कर दिया।
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मामले में एलडीएम ने शिकायत दर्ज करने की बात कही है। कुछ जगह फोटो स्टेट की दुकानों पर नोट बदलने के फार्म दो रुपये में बिकते दिखे। प्रधानमंत्री ने देश के नाम संबोधन में मंगलवार की रात एक हजार व पांच सौ की नोट बंद करने का ऐलान किया था।
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तभी से लोगों में मौजूद इन नोटों को बदलने की छटपटाहट थी। सरकार ने इसके लिए बुधवार को बैंक बंद कर गुरुवार से पुराने नोट बदलने की सभी तैयारी के निर्देश दिए थे, मगर सुबह सात बजे से प्रधान डाकघर व उसकी बड़ी शाखाओं समेत सभी बैंकों पर लोगों की भीड़ आनी शुरू हो गई।

इस दौरान बैंक व डाकघरों के सामने पुलिस तैनात रही और अतिरिक्त काउंटर खोले गए थे। सर्वाधिक लोग अपनी आईडी के साथ बैंक से मिले फार्म भरकर पुराने नोट के बदले चार हजार की नई नोट लेने आए थे।

मगर यहां पांच सौ की नई नोट नहीं आने से किसी को नसीब नहीं हुई, जबकि दो हजार की नोट भी काफी कम होने से सबसे पहले चेस्ट से मिली 100 व 50 की नोट ही दी जाती रही। प्रधान डाकघर पर सबसे अधिक अव्यवस्था रही।

यहां 12 बजे के बाद वितरण शुरू हुआ। फार्म भी लोगों ने नहीं दिया गया, पास के फोटो स्टेट दुकान से दो रुपये लोगों को फार्म खरीदना पड़ा। इसे लेकर नोक-झोंक भी होती रही। शहर में महिला अस्पताल के पास स्थित ग्रामीण बैंक प्रबंधन ने खाताधारकों व अन्य को नोट बदलने से इंकार कर दिया गया।

नियावां स्थित आईडीबीआई बैंक में थर्ड पार्टी का डिपॉजिट नहीं हुआ। दोनों शिकायतों पर एलडीएम ने कार्रवाई की बात कही है। देहात इलाकों में भी अफरातफरी रही। प्रवर डाक अधीक्षक रणवीर सिंह तोमर ने बताया कि एसबीआई की चेस्ट से करेंसी देर में मिली, इसलिए ग्राहकों का काम विलंब से शुरू हुआ।

स्टेट बैंक ने 10 बजे करेंसी देने का वायदा किया था लेकिन हमें करीब पौने ग्यारह बजे करेंसी मिली। करेंसी मिलने के बाद शीघ्र ही भुगतान और एक्सचेंज की सुविधा ग्राहकों को दी गई। कोई असुविधा न हो इसके लिए महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग काउंटर लगाए गए थे।


उधर, लीड बैंक मैनेजर ओपी शुक्ला ने बताया कि जिले की सभी 210 बैंक शाखाओं में सुचारु रूप से ग्राहकों को तत्परता के साथ सुविधाएं दी गई। दो-एक जगहों पर रुपए नहीं दिए जाने का मामला जानकारी में आया है, पता कर रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।

चूंकि डिमांड ज्यादा थी, इसलिए हो सकता है कि कैश कम पड़ गया हो। अभी पांच सौ की नई नोट नहीं आई है। दो हजार रुपए की नोट आ गई है जिसे दिया गया।
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