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जिले में दामिनी ब्रांड का धान बीज प्रतिबंधित

Sun, 05 Jun 2016 10:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो / फैजाबाद
अमर उजाला ब्यूरो / फैजाबाद Updated Sun, 05 Jun 2016 10:38 PM IST
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Damini brand seed paddy banned in the district
बीज - फोटो : अमर उजाला
पड़ोसी जिला अंबेडकरनगर में बीज, खाद और पेस्टीसाइड की नकली फैक्ट्री पकड़ी गई तो जिले के अधिकारियों के कान खड़े हो गए। गांव से लेकर शहर तक की दुकानों पर निगरानी रखी जा रही है। इसी बीच दामिनी नामक हाइब्रिड धान के बीज को प्रतिबंधित कर दिया गया है। जिले में दामिनी ब्रांड के धान के बीज को प्रतिबंधित कर दिया गया है।
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हालांकि इस प्रजाति के धान बीज का कोई अधिकृत डीलर नहीं है। जिला कृषि अधिकारी ने सभी बीज विक्रेताओं को पत्र भेज कर इस प्रजाति के बीज को कहीं  से न मंगाने की हिदायत दी है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार यादव ने बताया कि यदि कोई दुकानदार इस प्रजाति का धान बीज बेंच रहा है तो उसे खरीदे नहीं और इसकी सूचना कृषि विभाग के अफसरों को दें। 
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वैसे पिछले पांच वर्ष में जिले में एक भी नकली खाद बीज की फैक्ट्री नहीं पकड़ी गई है, फिर भी अधिकारी गांव से लेकर शहर तक की दुकानों पर निगहबानी कर रहे हैं। मिलावटी खाद की अधिकतर बिक्री की संभावनाएं मिल्कीपुर, रुदौली और मवई ब्लॉक में होती है। वजह जिला मुख्यालय से दूर होने की वजह से यहां पर व्यापारी बेलगाम हो जाते हैं।
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नवंबर 2010 में उप जिला कृषि अधिकारी बीएन कुशवाहा ने शहर के नौ किलोमीटर दूर प्रभात नगर में एक गोदाम से नकली डीएपी पकड़ी थी। विभागीय अधिकारियों ने एक ट्रक डीएपी को जप्त किया था। नकली खाद के कारोबारी के खिलाफ विभाग ने एफआईआर दर्ज कराई थी। उसके बाद से अब तक एक भी नकली खाद की फैकट्री नहीं पकड़ी गई। 

40 हजार एमटी के सापेक्ष 15 हजार एमटी यूरिया स्टाक
जिले में खरीफ फसल के लिए 40 हजार मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत होती है, जिसके सापेक्ष 15 हजार मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। इस बारे मेें जिला कृषि अधिकारी का कहना है कि धान की फसल में किस्तों में रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है।

जुलाई से सितंबर तक सेड्यूल में उर्वरकों के आपूर्ति का डाटा तैयार है। समय-समय पर उर्वरकों की आपूर्ति होती रहेगी। अधिकारी भी स्वीकारते हैं कि मिलावाट की संभावना अधिकतर डीएपी खाद में होती है, लेकिन यह आसानी से पकड़ में आ जाती है। 

ऐसे करें खाद की पहचान 
-यूरिया सफेद चमकदार और समान आकार के कड़े दाने होते हैं। यह पानी में पूरी तरह से विलेय है। और घोल को छूने पर शीतलता महसूस होती है। गर्म करने पर दाने पिघल जाते हैं और तेज गर्म करने पर तावे पर कोई अवशेष नहीं बचता है। 

-डीएपी को तावे पर गर्म करने पर वह फूल जाता है। यह नाखून से आसानी से टूटते नहीं। डीएपी को सुर्ती की तरह हाथ में रगड़ने पर अमोनिया जैसी गंध आती है। सूंघना मुश्किल हो जाता हे। 
-पोटाश के कुछ दाने को नम करें। यदि यह आपस में चिपकता नहीं है तो समझ लें कि यह असली है । पोटाश को पानी में घोलने पर इसका लाल भाग ऊपर तैरने लगता है। 

ऐसे करें धान के बीज की जांच 
बेरन डालने से पूर्व धान के सौ दाने को भिगों कर जूट के बोरे से ढंक दें। दो दिन के अंदर यदि 80 से अधिक दाने में अंकुर आ जाता है तो उस धान के बीज का किसान बेरन डालें अन्यथा नहीं। 

नियमित की जाती छापेमारी
पेस्टी साइड की दुकानों पर नियमित छापेमारी कर नमूने संकलित किए जाते हैं और इनकी गुणवत्ता की जांच की जाती है। पिछले दो वर्षों में 25 कंपनियों की दवाएं अधोमानक पाई गई थीं, जिनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा रहा है। दुकानदारों के खिलाफ अब न्यायालय से सजा तय की जाएगी। -आरडी वर्मा, उप जिला कृषि रक्षा अधिकारी 


चलेगा अभियान
जिले में नकली खाद की बिक्री रोकने और कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाता है। पिछले पांच वर्षों में नकली खाद नहीं पकड़ी गई है। फिर भी जिले में नियमित अभियान चालाया जाएगा। -डॉ. राजेश कुमार यादव जिला कृषि अधिकारी
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