{"_id":"5d680d048ebc3e93bc198164","slug":"book-faizabad-news-lko4787589127","type":"story","status":"publish","title_hn":"विदेशी लेखकों ने भी अयोध्या में रामंमदिर का किया है जिक्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विदेशी लेखकों ने भी अयोध्या में रामंमदिर का किया है जिक्र
विज्ञापन
रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल।
- फोटो : FAIZABAD
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या। गुजरात कैडर और 1972 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल द्वारा लिखी गई एक किताब में दावा किया गया है कि अयोध्या के मंदिरों को बाबर ने नहीं बल्कि औरंगजेब ने तोड़वाये थे।
कुणाल का दावा है कि बाबर कभी अयोध्या नहीं आया था। अयोध्या में राम मंदिर बाबर के शासनकाल के दौरान नहीं, बल्कि औरंगजेब के शासनकाल में तोड़ा गया था। उन्होंने बताया कि संस्कृत, अंग्रेजी और फ्रेंच विद्वानों ने भी अपनी पुस्तक में लिखा है कि अयोध्या में विवादित स्थल पर मंदिर मौजूद था।
कुणाल द्वारा लिखित पुस्तक अयोध्या रीविजिटेड में राम मंदिर को लेकर कई नई बातों का उल्लेख किया गया है। साथ ही बाबरी मस्जिद को भी सिरे से नकारा गया है। इसके लिए लेखक ने कई पुख्ता प्रमाण भी दिए हैं।
विज्ञापन
किताब की प्रस्तावना पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुप्रीमकोर्ट जीबी पटनायक द्वारा लिखी गई हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि च्यह पुस्तक हिंदू हित की धरोहर होगी।
पूर्व आईपीएस कुणाल बताते हैं कि ब्रिटिश काल की पुरानी फाइलों, कुछ प्राचीन संस्कृत सामग्री, खुदाई की समीक्षाओं एवं विदेशी पर्यटकों की मानें तो अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर मौजूद था, जिसे तोड़कर बाद में मस्जिद बनाई गई।
बताया है कि 1767 में भारत आए आस्ट्रिया के फादर जोसेफ टीफेंथेलर ने भी उल्लेख किया है कि उन्हें बताया गया कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी। 1801 में भारत आए अंग्रेज पर्यटक सी मेंटल ने भी औरंगजेब द्वारा मस्जिद तोड़े जाने की बात लिखी है।
1841 में बने एक गजेटियर में भी औरंगजेब द्वारा मंदिर तोड़ने जाने का जिक्र है। 1631 में हिंदुस्तान आए इटली के पर्यटक डीलेट ने जिक्र किया है कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर देखा है। इसी प्रकार 1634 में भारत में आए इंग्लैंड यात्री हर्बट ने जिक्र किया है कि अयोध्या में बहुत प्राचीन इमारतें हैं लेकिन उन सब में सबसे महत्वपूर्ण वह है जिसे रामजी ने बनवाया था।
1660 में हुई मंदिर तोड़े जाने की घटना
कुणाल का कहना है कि आम धारणा यह है कि बाबर ने रामजन्मभूमि तोड़ा था यह गलत है। बाबर के नाम से जो मस्जिद कही जाती है, वह कभी बनी ही नहीं। मंदिर को तोड़े जाने की घटना 1528 ईस्वी बाबर के शासनकाल में नहीं हुई थी, बल्कि यह घटना 1660 ई. में हुई जब फिदाई खान अयोध्या में औरंगजेब का गवर्नर था।
बाबर कभी अयोध्या आया ही नहीं, इसलिए यह दावा अवास्तविक है कि अवध के गवर्नर मीर बांकी ने 1528 में बाबरी मस्जिद बनवाई थी। पुस्तक भी यह भी कहा गया है कि बाबर से लेकर शाहजहां तक सभी मुगल शासक उदार थे उनमें कट्टरता नहीं थी।
दारा शिकोह को सपने में हुआ था राम का दर्शन
वे बताते हैं कि मुस्लिम शासक दाराशिकोह को सपने में दो दिव्य पुरूष दिखे, जिसमें एक थे वशिष्ठ और दूसरे थे राम। राम ने दाराशिकोह के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। यह बात जब दारा ने औरंगजेब को बताई तो वह नाराज हो गया चूंकि वह कट्टर था इसलिए हिंदू धर्म पर हमला करना शुरू कर दिया और हिंदू मंदिरों को तोड़वाया।
विज्ञापन
कुणाल का दावा है कि बाबर कभी अयोध्या नहीं आया था। अयोध्या में राम मंदिर बाबर के शासनकाल के दौरान नहीं, बल्कि औरंगजेब के शासनकाल में तोड़ा गया था। उन्होंने बताया कि संस्कृत, अंग्रेजी और फ्रेंच विद्वानों ने भी अपनी पुस्तक में लिखा है कि अयोध्या में विवादित स्थल पर मंदिर मौजूद था।
विज्ञापन
कुणाल द्वारा लिखित पुस्तक अयोध्या रीविजिटेड में राम मंदिर को लेकर कई नई बातों का उल्लेख किया गया है। साथ ही बाबरी मस्जिद को भी सिरे से नकारा गया है। इसके लिए लेखक ने कई पुख्ता प्रमाण भी दिए हैं।
विज्ञापन
किताब की प्रस्तावना पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुप्रीमकोर्ट जीबी पटनायक द्वारा लिखी गई हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि च्यह पुस्तक हिंदू हित की धरोहर होगी।
पूर्व आईपीएस कुणाल बताते हैं कि ब्रिटिश काल की पुरानी फाइलों, कुछ प्राचीन संस्कृत सामग्री, खुदाई की समीक्षाओं एवं विदेशी पर्यटकों की मानें तो अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर मौजूद था, जिसे तोड़कर बाद में मस्जिद बनाई गई।
बताया है कि 1767 में भारत आए आस्ट्रिया के फादर जोसेफ टीफेंथेलर ने भी उल्लेख किया है कि उन्हें बताया गया कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी। 1801 में भारत आए अंग्रेज पर्यटक सी मेंटल ने भी औरंगजेब द्वारा मस्जिद तोड़े जाने की बात लिखी है।
1841 में बने एक गजेटियर में भी औरंगजेब द्वारा मंदिर तोड़ने जाने का जिक्र है। 1631 में हिंदुस्तान आए इटली के पर्यटक डीलेट ने जिक्र किया है कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर देखा है। इसी प्रकार 1634 में भारत में आए इंग्लैंड यात्री हर्बट ने जिक्र किया है कि अयोध्या में बहुत प्राचीन इमारतें हैं लेकिन उन सब में सबसे महत्वपूर्ण वह है जिसे रामजी ने बनवाया था।
1660 में हुई मंदिर तोड़े जाने की घटना
कुणाल का कहना है कि आम धारणा यह है कि बाबर ने रामजन्मभूमि तोड़ा था यह गलत है। बाबर के नाम से जो मस्जिद कही जाती है, वह कभी बनी ही नहीं। मंदिर को तोड़े जाने की घटना 1528 ईस्वी बाबर के शासनकाल में नहीं हुई थी, बल्कि यह घटना 1660 ई. में हुई जब फिदाई खान अयोध्या में औरंगजेब का गवर्नर था।
बाबर कभी अयोध्या आया ही नहीं, इसलिए यह दावा अवास्तविक है कि अवध के गवर्नर मीर बांकी ने 1528 में बाबरी मस्जिद बनवाई थी। पुस्तक भी यह भी कहा गया है कि बाबर से लेकर शाहजहां तक सभी मुगल शासक उदार थे उनमें कट्टरता नहीं थी।
दारा शिकोह को सपने में हुआ था राम का दर्शन
वे बताते हैं कि मुस्लिम शासक दाराशिकोह को सपने में दो दिव्य पुरूष दिखे, जिसमें एक थे वशिष्ठ और दूसरे थे राम। राम ने दाराशिकोह के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। यह बात जब दारा ने औरंगजेब को बताई तो वह नाराज हो गया चूंकि वह कट्टर था इसलिए हिंदू धर्म पर हमला करना शुरू कर दिया और हिंदू मंदिरों को तोड़वाया।