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तराशे गए 15 हजार घनफीट पत्थर मिले अनुपयोगी
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अयोध्या-श्रीरामजन्म भूमि न्यास कार्यशाला में रखे पत्थर
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। राममंदिर के लिए अब तक तराशे गए 75 हजार घनफीट पत्थरों में से करीब 15 हजार घनफीट पत्थर अनुपयोगी मिले हैं। राममंदिर निर्माण के लिए अभी मात्र 60 हजार घनफीट पत्थर नक्काशी के साथ तैयार हैं जबकि अभी मंदिर निर्माण के लिए 3.75 लाख घन फीट पत्थर की और जरूरत है। इसके लिए राजस्थान से पत्थरों की आपूर्ति शुरू कराने को लेकर ट्रस्ट गंभीर है। ट्रस्ट के पदाधिकारी लगातार राजस्थान सरकार से संपर्क हैं, ताकि पत्थरों की आपूर्ति प्रारंभ हो सके।
राममंदिर निर्माण के लिए वर्ष 1990 ने विहिप ने कार्यशाला खोलकर पत्थर तराशी का कार्य शुरू किया था। शुरूआत में बड़ी संख्या में मजदूूूरों से काम शुरू हुआ बाद में मजदूरों की संख्या काफी कम हो गई। जिसका परिणाम रहा कि पिछले तीन दशक में राममंदिर के लिए केवल 75 हजार घनफीट पत्थरों की ही तराशी हो पाई। उसमें भी तीन दशक से रखरखाव के अभाव में बड़ी संख्या में पत्थर राममंदिर निर्माण में लगने लायक नहीं बचे हैं।
कार्यशाला में तराश कर रखे गए पत्थरों की कोडिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है, फिर भी राममंदिर के नए मॉडल में हुए परिवर्तन के अनुसार तराशे गए अलग-अलग हिस्सों के लगभग 15 हजार घनफीट पत्थर अनुपयोगी हो गए हैं। इन अनुपयोगी पत्थरों की छटनी की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ राजस्थान के वंशीपहाड़पुर से राममंदिर के लिए पत्थर लाए जाने हैं।
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इसके लिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट व निर्माण समिति के पदाधिकारी लगातार राजस्थान सरकार से संपर्क साधे हुए हैं। मंदिर में राजस्थान के पत्थर लगेंगे जबकि मंदिर की नींव में मिजार्पुर के हार्ड पत्थर लगाए जाएंगे। रामजन्मभूमि कार्यशाला में कोडिंग कार्य में जुटे इंजीनियर मनोज सोमपुरा ने बताया कि नए मॉडल के कारण करीब 15 हजार घनफीट पत्थर अनुपयोगी हो गए हैं, इनकी छटनी की जा रही है।
ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र बताते हैं कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 3.75 लाख घन फीट पत्थर और चाहिए। पत्थरों की आपूर्ति शुरू करने को राजस्थान सरकार संबंधित क्षेत्र की पत्थर खदान को वन विभाग के दायरे से बाहर लाने को लेकर गंभीरता से जुटी हुई है। राजस्थान के भरतपुर स्थित जिस क्षेत्र की खदान से ये पत्थर आते हैं, वह अभी बंद है, वन विभाग के दायरे में है। उम्मीद है राजस्थान सरकार जल्द ही इसे वन विभाग के दायरे से बाहर लाएगी। हमें करीब एक हजार ट्रक पत्थर चाहिए इसलिए हम कानूनी तरीके से पत्थरों की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।
राममंदिर निर्माण के लिए पूरे देश में मकर संक्रांति से ही निधि समर्पण अभियान चल रहा है। अभियान के दूसरे चरण में विहिप व संघ के कार्यकर्ता घर-घर जाकर कूपन के जरिए निधि समर्पण ले रहे हैं। अभियान को लेकर पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। ट्रस्ट के सूत्रों के मुताबिक इस कार्य में पूरे देश में 29 सीए लगाए गए हैं। निधि समर्पण अभियान की देश भर में 1,050 ऑडिट रिपोर्ट तैयार होगी। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर ही मार्च के बाद एकत्र धनराशि का ब्योरा सार्वजनिक किया जाएगा। अब तक करीब 1600 करोड़ धनराशि एकत्र हो चुकी है।
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राममंदिर निर्माण के लिए वर्ष 1990 ने विहिप ने कार्यशाला खोलकर पत्थर तराशी का कार्य शुरू किया था। शुरूआत में बड़ी संख्या में मजदूूूरों से काम शुरू हुआ बाद में मजदूरों की संख्या काफी कम हो गई। जिसका परिणाम रहा कि पिछले तीन दशक में राममंदिर के लिए केवल 75 हजार घनफीट पत्थरों की ही तराशी हो पाई। उसमें भी तीन दशक से रखरखाव के अभाव में बड़ी संख्या में पत्थर राममंदिर निर्माण में लगने लायक नहीं बचे हैं।
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कार्यशाला में तराश कर रखे गए पत्थरों की कोडिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है, फिर भी राममंदिर के नए मॉडल में हुए परिवर्तन के अनुसार तराशे गए अलग-अलग हिस्सों के लगभग 15 हजार घनफीट पत्थर अनुपयोगी हो गए हैं। इन अनुपयोगी पत्थरों की छटनी की जा रही है। वहीं दूसरी तरफ राजस्थान के वंशीपहाड़पुर से राममंदिर के लिए पत्थर लाए जाने हैं।
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इसके लिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट व निर्माण समिति के पदाधिकारी लगातार राजस्थान सरकार से संपर्क साधे हुए हैं। मंदिर में राजस्थान के पत्थर लगेंगे जबकि मंदिर की नींव में मिजार्पुर के हार्ड पत्थर लगाए जाएंगे। रामजन्मभूमि कार्यशाला में कोडिंग कार्य में जुटे इंजीनियर मनोज सोमपुरा ने बताया कि नए मॉडल के कारण करीब 15 हजार घनफीट पत्थर अनुपयोगी हो गए हैं, इनकी छटनी की जा रही है।
ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र बताते हैं कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 3.75 लाख घन फीट पत्थर और चाहिए। पत्थरों की आपूर्ति शुरू करने को राजस्थान सरकार संबंधित क्षेत्र की पत्थर खदान को वन विभाग के दायरे से बाहर लाने को लेकर गंभीरता से जुटी हुई है। राजस्थान के भरतपुर स्थित जिस क्षेत्र की खदान से ये पत्थर आते हैं, वह अभी बंद है, वन विभाग के दायरे में है। उम्मीद है राजस्थान सरकार जल्द ही इसे वन विभाग के दायरे से बाहर लाएगी। हमें करीब एक हजार ट्रक पत्थर चाहिए इसलिए हम कानूनी तरीके से पत्थरों की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।
राममंदिर निर्माण के लिए पूरे देश में मकर संक्रांति से ही निधि समर्पण अभियान चल रहा है। अभियान के दूसरे चरण में विहिप व संघ के कार्यकर्ता घर-घर जाकर कूपन के जरिए निधि समर्पण ले रहे हैं। अभियान को लेकर पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। ट्रस्ट के सूत्रों के मुताबिक इस कार्य में पूरे देश में 29 सीए लगाए गए हैं। निधि समर्पण अभियान की देश भर में 1,050 ऑडिट रिपोर्ट तैयार होगी। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर ही मार्च के बाद एकत्र धनराशि का ब्योरा सार्वजनिक किया जाएगा। अब तक करीब 1600 करोड़ धनराशि एकत्र हो चुकी है।