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खामियों के बावजूद 406 कॉलेजों के पाठ्यक्रमों को दी मान्यता
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अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विवि प्रशासन की ओर से खामियों के बावजूद 406 महाविद्यालयों के पाठ्यक्रमों को स्थायी मान्यता दे दी है।
एक ही दिन में 300 महाविद्यालयों के पाठ्यक्रमों की मान्यता पर भी प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहे हैं। साथ ही महाविद्यालयों की जांच के लिए गठित एकल पैनल की टीमों पर भी अगुलिंया उठनी शुरू हो गई हैं।
बिना स्थाई प्राचार्य नियुक्त हुए किसी भी महाविद्यालय को स्थाई मान्यता नहीं देने का नियम होते हुए भी 198 प्राचार्यविहीन कॉलेजों को स्थाई मान्यता दे दी गई। कई कोर्सों के शिक्षक तक नहीं है। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से लेकर राज्यपाल तक की गई है।
अवध विवि का कार्यक्षेत्र बाराबंकी, अयोध्या, गोंडा, बहराइच, सुल्तानपुर, अमेठी व अंबेडकरनगर जनपद है। मौजूदा समय में इन जनपदों के 730 से अधिक महाविद्यालय संबद्ध है।
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विवि प्रशासन पिछले सत्र तक अस्थाई, स्थाई व विस्तारण की मान्यताएं प्रदान करता था लेकिन मौजूदा सत्र से सिर्फ स्थाई मान्यता ही दिए जाने का नियम बना लिया गया।
इसी नियम से अब तक 406 महाविद्यालयों के पाठ्यक्रमों को स्थाई मान्यता दे दी गई है। इसमें गोलमाल किए जाने की बात सामने आने लगी हैं। विवि प्रशासन के इस कृत्य पर कोर्ट सदस्य ओम प्रकाश ने सवाल खड़ा करते हुए शिकायत की है।
कोर्ट सदस्य ने कुलपति से लेकर मुख्यमंत्री तक से जांच के लिए पत्र लिखा है। उनके पत्र में बताया गया है कि 198 प्राचार्य विहीन महाविद्यालयों को स्थाई मान्यता दे दी है जोकि नियमों की अनदेखी है।
कोर्ट सदस्य के अनुसार किसी भी दशा में प्राचार्य विहीन महाविद्यालयों को स्थाई मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। उनका आरोप है कि स्थाई मान्यता के एकल समिति गठित किया जाना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। आरोप यह भी है कि स्थाई मान्यता में छात्र संख्या के अनुरूप अध्यापकों की नियुक्ति, विषयवार अध्यापकों की नियुक्ति, मानक के अनुरूप बिल्डिंग न होने के बावजूद भी स्थाई मान्यता दे दी गई है। इस सब के पीछे बड़ा खेल है, जो भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है।
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एक ही दिन में 300 महाविद्यालयों के पाठ्यक्रमों की मान्यता पर भी प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहे हैं। साथ ही महाविद्यालयों की जांच के लिए गठित एकल पैनल की टीमों पर भी अगुलिंया उठनी शुरू हो गई हैं।
बिना स्थाई प्राचार्य नियुक्त हुए किसी भी महाविद्यालय को स्थाई मान्यता नहीं देने का नियम होते हुए भी 198 प्राचार्यविहीन कॉलेजों को स्थाई मान्यता दे दी गई। कई कोर्सों के शिक्षक तक नहीं है। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से लेकर राज्यपाल तक की गई है।
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अवध विवि का कार्यक्षेत्र बाराबंकी, अयोध्या, गोंडा, बहराइच, सुल्तानपुर, अमेठी व अंबेडकरनगर जनपद है। मौजूदा समय में इन जनपदों के 730 से अधिक महाविद्यालय संबद्ध है।
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विवि प्रशासन पिछले सत्र तक अस्थाई, स्थाई व विस्तारण की मान्यताएं प्रदान करता था लेकिन मौजूदा सत्र से सिर्फ स्थाई मान्यता ही दिए जाने का नियम बना लिया गया।
इसी नियम से अब तक 406 महाविद्यालयों के पाठ्यक्रमों को स्थाई मान्यता दे दी गई है। इसमें गोलमाल किए जाने की बात सामने आने लगी हैं। विवि प्रशासन के इस कृत्य पर कोर्ट सदस्य ओम प्रकाश ने सवाल खड़ा करते हुए शिकायत की है।
कोर्ट सदस्य ने कुलपति से लेकर मुख्यमंत्री तक से जांच के लिए पत्र लिखा है। उनके पत्र में बताया गया है कि 198 प्राचार्य विहीन महाविद्यालयों को स्थाई मान्यता दे दी है जोकि नियमों की अनदेखी है।
कोर्ट सदस्य के अनुसार किसी भी दशा में प्राचार्य विहीन महाविद्यालयों को स्थाई मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। उनका आरोप है कि स्थाई मान्यता के एकल समिति गठित किया जाना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। आरोप यह भी है कि स्थाई मान्यता में छात्र संख्या के अनुरूप अध्यापकों की नियुक्ति, विषयवार अध्यापकों की नियुक्ति, मानक के अनुरूप बिल्डिंग न होने के बावजूद भी स्थाई मान्यता दे दी गई है। इस सब के पीछे बड़ा खेल है, जो भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है।