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निष्प्रयोज्य सामग्री से कैंडल बनाने का दिया प्रशिक्षण
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निष्प्रयोज्य सामग्री से कैंडल बनाने का दिया प्रशिक्षण
अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के प्रौढ, सतत एवं प्रसार शिक्षा विभाग द्वारा 15 दिवसीय सामुदायिक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम अशरफपुर, टोनिया बिहारीपुर, डाभासेमर में विशेषज्ञों द्वारा निष्प्रयोज्य सामग्री से कैंडल बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम में गांव की महिलाओं और बच्चों द्वारा घर में उपयोग में लाये गये दीयों को अनेक रंगों में कलात्मक रूप से सुव्यवस्थित करके कैंडल तैयार किया। विशेषज्ञों द्वारा तैयार कराये गये कैंडल को लेकर महिलाओं व बच्चों में काफी उत्साह दिखा।
कार्यक्रम में ग्रामवासियों को प्रशिक्षित करने के लिए विश्वविद्यालय के एमए प्रसार शिक्षा एवं ग्रामीण विकास विभाग के छात्र-छात्राओं ने घर-घर जाकर स्किल मैपिंग का कार्य किया।
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गांव के बढ़ई, लोहार तथा माली आदि ने अपने पारंपरिक कौशल को नये रूप में सीखने की इच्छा व्यक्त की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभाग के निदेशक प्रो. अनूप कुमार ने बताया कि कार्यक्रम में अब तक विशेषज्ञों द्वारा ग्रामवासियों को मधुमक्खी पालन, रेशम कीट पालन, जैविक खाद तैयार करने की विधि, महिलाओं के लिए सिलाई-कढ़ाई, कैंडल निर्माण एवं कीटनाशक व रासायनिक खादों से युक्त अनाज व सब्जियों के उत्पादन के बारे में प्रशिक्षित किया गया है।
आगामी दिनों में ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए नाड़ी परीक्षण एवं महिलाओं के लिए योग प्रशिक्षण का कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। विभाग के सहायक निदेशक डॉ. सुंदर लाल त्रिपाठी एवं डॉ. सुरेंद्र मिश्र ने सामुदायिक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामवासियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर ग्रामप्रधान प्रतिनिधि गवास वर्मा, डॉ. सुधीर सिंह, निखिल वर्मा, विभाग की छात्र-छात्राएं एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।
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अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के प्रौढ, सतत एवं प्रसार शिक्षा विभाग द्वारा 15 दिवसीय सामुदायिक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम अशरफपुर, टोनिया बिहारीपुर, डाभासेमर में विशेषज्ञों द्वारा निष्प्रयोज्य सामग्री से कैंडल बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम में गांव की महिलाओं और बच्चों द्वारा घर में उपयोग में लाये गये दीयों को अनेक रंगों में कलात्मक रूप से सुव्यवस्थित करके कैंडल तैयार किया। विशेषज्ञों द्वारा तैयार कराये गये कैंडल को लेकर महिलाओं व बच्चों में काफी उत्साह दिखा।
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कार्यक्रम में ग्रामवासियों को प्रशिक्षित करने के लिए विश्वविद्यालय के एमए प्रसार शिक्षा एवं ग्रामीण विकास विभाग के छात्र-छात्राओं ने घर-घर जाकर स्किल मैपिंग का कार्य किया।
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गांव के बढ़ई, लोहार तथा माली आदि ने अपने पारंपरिक कौशल को नये रूप में सीखने की इच्छा व्यक्त की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभाग के निदेशक प्रो. अनूप कुमार ने बताया कि कार्यक्रम में अब तक विशेषज्ञों द्वारा ग्रामवासियों को मधुमक्खी पालन, रेशम कीट पालन, जैविक खाद तैयार करने की विधि, महिलाओं के लिए सिलाई-कढ़ाई, कैंडल निर्माण एवं कीटनाशक व रासायनिक खादों से युक्त अनाज व सब्जियों के उत्पादन के बारे में प्रशिक्षित किया गया है।
आगामी दिनों में ग्रामीणों के स्वास्थ्य के लिए नाड़ी परीक्षण एवं महिलाओं के लिए योग प्रशिक्षण का कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। विभाग के सहायक निदेशक डॉ. सुंदर लाल त्रिपाठी एवं डॉ. सुरेंद्र मिश्र ने सामुदायिक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रामवासियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर ग्रामप्रधान प्रतिनिधि गवास वर्मा, डॉ. सुधीर सिंह, निखिल वर्मा, विभाग की छात्र-छात्राएं एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।