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राम के अनुयायी विदेशी मुसलमानों का गवाह बनेगी अयोध्या

Thu, 14 Sep 2017 12:19 AM IST
Updated Thu, 14 Sep 2017 12:19 AM IST
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राम के अनुयायी विदेशी मुसलमानों का गवाह बनेगी अयोध्या
आज रामनगरी पहुंचेगा इंडोनेशिया का रामलीला दल
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अयोध्या। राम के अनुयायी विदेशी मुसलमानों का अयोध्या पहली बार गवाह बनने जा रही है। गुरुवार शाम तक राम के अनुयायी इंडोनेशियाई रामलीला दल अयोध्या पहुंचेगा। इसके बाद अवध विवि के प्रेक्षागृह में शुक्रवार को रामलीला का मंचन भी करेगा।

इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, इंडोनेशियाई दल को देखने-समझने को लेकर लोगों में उत्सुकता है। विदेशी मुसलमानों के इस उदाहरण को संत-धर्माचार्य विश्व के लिए प्रेरक मानते हैं। इंडोनेशिया इस्लामिक देश है, मगर वहां के लोगों का राम से अगाध प्रेम है।
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पहली बार रामनगरी आ रहा वहां का रामलीला दल अयोध्या की आभा से रूबरू होगा। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. वाईपी सिंह कहते हैं कि, इंडोनेशिया का धर्म इस्लाम है और संस्कृति रामायण है। श्रीराम की चरणपादुका की धूल के नाम से वहां के राष्ट्रपति शपथ ग्रहण कर सत्तासीन होते हैं।
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राम को इंडोनेशियाई अपना पूर्वज मानते हैं। वहां के कलाकार तीन प्रकार की रामलीलाएं अद्भुत रूप में मंचित करते हैं। भारत में ऋषि वाल्मीकि की रामायण तो इंडोनेशिया में कवि योगेश्वर की लिखी रामायण का मंचन होता है।

वहां दशरथ को विश्वरंजन, सीता को सिंता, हनुमान को अनोमान कहा जाता है। इंडोनेशिया में तीन तरह की रामलीला होती हैं, जिसमें पपेट, शैडो पपेट और बैले रामलीला हैं। इंडोनेशिया के कलाकार अयोध्या में 13 दुर्लभ वाद्य यंत्रों के साथ प्रस्तुति देंगे।

इनमें छह पुरुष और छह महिला कलाकार मुस्लिम हैं। इंडोनेशिया के कलाकार रामलीला की शुरूआत सीता हरण से करते हैं और रावण के वध पर समाप्त कर देते हैं। इंडोनेशियाई दल गुरुवार शाम तक लखनऊ से फैजाबाद आएगा और अयोध्या में राम की पावन भूमि पर अपनी अगाध आस्था को रामलीला मंचन के रूप प्रस्तुत करेगा।

मध्य शताब्दी में लिखा गया रामायण का इंडोनिशयाई संस्करण
अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक ने कहा कि, इतिहास बताता है कि रामायण का इंडोनेशियाई संस्करण सातवीं सदी के दौरान मध्य जावा में लिखा गया था। तब वहां मेदांग राजवंश का शासन था मगर रामायण के इंडोनेशिया पहुंचने से बहुत पहले ही रामायण में इंडोनेशिया का जिक्र था।

ईसा से कई सदी पहले लिखी गई वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड में वर्णन है कि कपिराज सुग्रीव ने माता सीता की खोज में पूरब की तरफ रवाना हुए दूतों को यवद्वीप और सुवर्ण द्वीप जाने का भी आदेश दिया था। इतिहासकारों के मुताबिक यही द्वीप आज के जावा और सुमात्रा हैं।

विश्व के 65 देशों में होती है रामलीला
अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित बताते हैं कि, वेस्टइंडीज, मलेशिया, सूरीनाम, श्रीलंका, फिजी, न्यूजीलैंड, रूस, लाओस, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम समेत दुनिया भर के 65 देशों में रामलीला का मंचन होता है।

हिंदी के प्रसिद्ध विद्वान फादर कामिल बुल्के ने 1982 में अपने एक लेख में कहा था कि वियतनाम से इंडोनेशिया तक ये कथा फैली है। कुलपति ने कहा कि, भारत में सौ तरह की रामलीलाएं होती हैं और हम इन रामलीलाओं का मंचन अयोध्या में कराने का प्रयास कर रहे हैं।

विदेशी कलाकार कल करेंगे रामलीला मंचन
अयोध्या शोध संस्थान, अवध विश्वविद्यालय व श्री सरयू अवध बालक सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में 15 सितंबर को अवध विवि के स्वामी विवेकानंद सभागार में अपराह्न 12:30 बजे रामलीला का मंचन होगा।


मुख्य अतिथि विधायक वेदप्रकाश गुप्ता होंगे। कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित कहते हैं कि रामलीला का इंडोनेशिया से सुदृढ़ सांस्कृतिक संबंध है। हम चाहते हैं कि अयोध्या में अधिक से अधिक देशों की रामलीला का मंचन हो जिससे रामनगरी की समृद्ध संस्कृति का ग्लोब्लाइजेशन हो सके।
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