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सरकारी अस्पतालों में दवाओं का अकाल
Updated Fri, 14 Sep 2018 12:50 AM IST
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सरकारी अस्पतालों में दवाओं का अकाल
फैजाबाद। जिले के सरकारी अस्पतालों में दवाओं के अकाल जैसी स्थिति है। खासतौर से ओपीडी में प्रयोग होने वाली दवाओं के न होने से रोगी परेशान हो रहे हैं। सस्ते दामों पर दवाओं के लिए स्थापित जन औषधि केंद्र भी सफेद हाथी बन गए हैं।
जिले में प्रमुख रूप से बड़े स्वास्थ्य इकाइयों में जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, राजकीय श्रीराम चिकित्सालय अयोध्या, दर्शननगर स्थित मंडलीय चिकित्सालय संचालित हैं।
मौसम में प्रतिदिन हो रहे उतार-चढ़ाव की वजह से इन दिनों सभी प्रमुख अस्पतालों में मरीजों की खासी भीड़ है। यहां संसाधनों, चिकित्सकों का अभाव तो पहले ही पांव पसारे है, इन दिनों सभी अस्पतालों में कई जरूरी दवाओं की कमी है।
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समय से दवा आपूर्ति न होने से मरीजों की जेबें ढीली हो रही हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन की ओपीडी दो हजार के निकट है। यहां प्रतिदिन करीब दो सौ रोगी वायरल बुखार से ग्रसित पहुंच रहे हैं। लेकिन पैरासीटामॉल, सिप्रो आदि की भी किल्लत है।
इसी तरह दमा, सांस फूलने, त्वचा रोग आदि की दवाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल प्रशासन करीब 100 दवाओं की उपलब्धता का दावा कर रहा है। लेकिन हर समय अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोरों पर यहां के मरीजों की भीड़ इस दावे को नकारती नजर आ रही है।
जिला महिला अस्पताल में भी आवश्यक दवाओं की कमी है। यहां इन दिनों एक भी एंटीबायोटिक दवा मौजूद नहीं है। वहीं कुछ अन्य दवाएं खत्म होने पर जुगाड़ से काम चलाया जा रहा है। ऐसी ही दशा राजकीय श्रीराम चिकित्सालय की है।
यहां तो प्रत्येक समय दवाओं का अकाल देखा जाता है। मरीजों को सिर्फ परामर्श के अलावा मामूली दवाएं ही उपलब्ध होती हैं। अस्पताल में सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जिले में तीन जन औषधि केंद्र क्रमश: जिला अस्पताल, राजकीय श्रीराम चिकित्सालय व संयुक्त मंडलीय चिकित्सालय दर्शननगर में खोले गए हैं। लेकिन ये केंद्र सिर्फ सफेद हाथी साबित हो रहे हैं।
यहां प्रचुर मात्रा में समस्त दवाएं उपलब्ध न होने से मरीज मजबूरी में बाहर के मेडिकल स्टोर की शरण में जाने को विवश है। श्रीराम अस्पताल में बेटे का इलाज कराने गए अयोध्या के वैभव तिवारी ने बताया कि डॉक्टर ने बेटे को देखकर जो दवाएं लिखीं, वे बाहर ही काफी महंगी मिलीं।
यहां पर स्थापित जन औषधि केंद्र पर भी उक्त दवाएं मौजूद नहीं थीं। जेबीपुरम के विनोद उपाध्याय ने बताया कि टायफाइड व अन्य समस्या के लिए डॉक्टर को दिखाया था। उन्होंने दवा लिखी तो जन औषधि केंद्र पर गया, लेकिन दवा नहीं थी।
इसलिए अधिक दाम पर बाहर से खरीदना पड़ा। हौसलानगर के शिवाकांत शुक्ला ने बताया कि मां को मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया था। मल्टी विटामिन इंजेक्शन की सलाह डॉक्टर ने दी जो वहां के जन औषधि केंद्र में नहीं मिला तो बाहर से 60 रुपये में खरीदना पड़ा।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके राय ने बताया कि दवाओं का पर्याप्त बजट है। कुछ दवाओं की कमी होने पर एलपी करा लिया जाता है। बाकी अधिकांश दवाएं मौजूद हैं, जो नहीं हैं उनका इंडेंट भेजा गया है।
श्रीराम चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. अनिल कुमार व जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने बताया कि कुछ दवाएं समय से नहीं आ पा रही हैं, इंडेंट भेजा गया है। स्थानीय स्तर से इंतजाम करके काम चलाया जा रहा है।
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फैजाबाद। जिले के सरकारी अस्पतालों में दवाओं के अकाल जैसी स्थिति है। खासतौर से ओपीडी में प्रयोग होने वाली दवाओं के न होने से रोगी परेशान हो रहे हैं। सस्ते दामों पर दवाओं के लिए स्थापित जन औषधि केंद्र भी सफेद हाथी बन गए हैं।
जिले में प्रमुख रूप से बड़े स्वास्थ्य इकाइयों में जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, राजकीय श्रीराम चिकित्सालय अयोध्या, दर्शननगर स्थित मंडलीय चिकित्सालय संचालित हैं।
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मौसम में प्रतिदिन हो रहे उतार-चढ़ाव की वजह से इन दिनों सभी प्रमुख अस्पतालों में मरीजों की खासी भीड़ है। यहां संसाधनों, चिकित्सकों का अभाव तो पहले ही पांव पसारे है, इन दिनों सभी अस्पतालों में कई जरूरी दवाओं की कमी है।
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समय से दवा आपूर्ति न होने से मरीजों की जेबें ढीली हो रही हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन की ओपीडी दो हजार के निकट है। यहां प्रतिदिन करीब दो सौ रोगी वायरल बुखार से ग्रसित पहुंच रहे हैं। लेकिन पैरासीटामॉल, सिप्रो आदि की भी किल्लत है।
इसी तरह दमा, सांस फूलने, त्वचा रोग आदि की दवाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल प्रशासन करीब 100 दवाओं की उपलब्धता का दावा कर रहा है। लेकिन हर समय अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोरों पर यहां के मरीजों की भीड़ इस दावे को नकारती नजर आ रही है।
जिला महिला अस्पताल में भी आवश्यक दवाओं की कमी है। यहां इन दिनों एक भी एंटीबायोटिक दवा मौजूद नहीं है। वहीं कुछ अन्य दवाएं खत्म होने पर जुगाड़ से काम चलाया जा रहा है। ऐसी ही दशा राजकीय श्रीराम चिकित्सालय की है।
यहां तो प्रत्येक समय दवाओं का अकाल देखा जाता है। मरीजों को सिर्फ परामर्श के अलावा मामूली दवाएं ही उपलब्ध होती हैं। अस्पताल में सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जिले में तीन जन औषधि केंद्र क्रमश: जिला अस्पताल, राजकीय श्रीराम चिकित्सालय व संयुक्त मंडलीय चिकित्सालय दर्शननगर में खोले गए हैं। लेकिन ये केंद्र सिर्फ सफेद हाथी साबित हो रहे हैं।
यहां प्रचुर मात्रा में समस्त दवाएं उपलब्ध न होने से मरीज मजबूरी में बाहर के मेडिकल स्टोर की शरण में जाने को विवश है। श्रीराम अस्पताल में बेटे का इलाज कराने गए अयोध्या के वैभव तिवारी ने बताया कि डॉक्टर ने बेटे को देखकर जो दवाएं लिखीं, वे बाहर ही काफी महंगी मिलीं।
यहां पर स्थापित जन औषधि केंद्र पर भी उक्त दवाएं मौजूद नहीं थीं। जेबीपुरम के विनोद उपाध्याय ने बताया कि टायफाइड व अन्य समस्या के लिए डॉक्टर को दिखाया था। उन्होंने दवा लिखी तो जन औषधि केंद्र पर गया, लेकिन दवा नहीं थी।
इसलिए अधिक दाम पर बाहर से खरीदना पड़ा। हौसलानगर के शिवाकांत शुक्ला ने बताया कि मां को मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया था। मल्टी विटामिन इंजेक्शन की सलाह डॉक्टर ने दी जो वहां के जन औषधि केंद्र में नहीं मिला तो बाहर से 60 रुपये में खरीदना पड़ा।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके राय ने बताया कि दवाओं का पर्याप्त बजट है। कुछ दवाओं की कमी होने पर एलपी करा लिया जाता है। बाकी अधिकांश दवाएं मौजूद हैं, जो नहीं हैं उनका इंडेंट भेजा गया है।
श्रीराम चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. अनिल कुमार व जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने बताया कि कुछ दवाएं समय से नहीं आ पा रही हैं, इंडेंट भेजा गया है। स्थानीय स्तर से इंतजाम करके काम चलाया जा रहा है।