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24.66 करोड़ से साकेत तीर्थ यात्री केंद्र बनेगा कोरिया पार्क का हिस्सा
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अयोध्या। सरयू तट पर स्थित कोरियाई महारानी हौ के स्मारक के विस्तारीकरण व सुंदरीकरण की तस्वीर साफ हो गई है। कुल 24.66 करोड़ से कोरियाई पार्क का विस्तारीकरण होना है, अब नया घाट स्थित साकेत तीर्थ यात्री केंद्र (बस अड्डा) व पुलिस कंट्रोल रूम का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। अब यह पार्क का हिस्सा हो जाएगा। जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। सुंदरीकरण के लिए कोरिया से आई टीम ने पहले ही डिजाइन फाइनल कर लिया था, जिसका दीपोत्सव में कोरिया की प्रथम महिला व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शिलान्यास भी किया जा चुका है।
सरयू तट पर स्थित कोरियाई महारानी हौ के स्मारक के विस्तारीकरण एवं सुंदरीकरण के लिए दो-दो बार निर्णय बदलने के बाद तीसरी बार फिर नए स्थान का चयन किया गया है। तीसरी बार चिन्हित स्थल कोरियाई शिष्टमंडल को भी बेहद पसंद आ गया है। इस बार पर्यटन विभाग के साकेत तीर्थ यात्री केंद्र का चयन किया गया है।
इससे पहले कोरिया पार्क के विस्तारीकरण के लिए उससे सटे नदी के भूभाग को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया था। बरसात के मौसम में इस स्थान पर पानी भर जाने की समस्या को ध्यान में रखते हुए कोरियाई प्रशासन इस भूमि के लिए राजी नहीं था। फिलहाल पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने उन्हें यह कहते हुए मना लिया कि बाढ़ से बचाव के लिए अतिरिक्त बंधे का निर्माण करा दिया जाएगा।
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उधर, यह प्रक्रिया आगे बढ़ती, इससे पहले ही बंधा निर्माण पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण एनजीटी ने रोक लगा दी। इस रोक के बाद पर्यटन के अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के ठीक पीछे स्थित जमीन पर निर्माण का प्रस्ताव किया, लेकिन यह जमीन पहले से ही विवादित थी।
इस भूमि पर छह नवंबर को शिलान्यास प्रस्तावित था, लेकिन प्रश्नगत जमीन के स्वामित्व का दावा करने वाले पक्षकार राकेश कुमार श्रीवास्तव ने अधिकारियों को शिकायती पत्र के साथ हाईकोर्ट के स्थगनादेश की सूचना दी। जिसके बाद साकेत तीर्थ केंद्र की भूमि का हस्तांतरण किया गया। जिस पर कोरियाई पार्क के विस्तारीकरण का काम होना है।
दैवी संदेश से कोरिया पहुंची थी अयोध्या की राजकुमारी
कोरियाई पुराकथा के अनुसार रानी हौ अयोध्या की राजकुमारी सूरी रत्ना थीं और दो हजार वर्ष पूर्व दैवी संदेश पाकर वे सुदीर्घ जल यात्रा से दक्षिण कोरिया पहुंचीं। यहां उनका विवाह राजा सूरो से हुआ और उनका वंश हजारों वर्षों से कोरिया के सर्वाधिक प्रभावशाली समूह के तौर पर स्थापित है। कोरिया की करीब आठ प्रतिशत आबादी आज भी राजकुमारी सुरी रत्ना और किम सूरो को अपना पूर्वज मानती है।
पार्क में दिखेगी भारत-कोरिया के संबंधों की गौरव गाथा
योजना के अनुसार पार्क में भारत-कोरिया के ऐतिहासिक संबंधों की गौरव गाथा दिखेगी। पार्क में दोनों देशों की वास्तुकला का दृश्यांकन भी नजर आएगा। इसमें विभिन्न माध्यमों से अयोध्या एवं गिम हे सिटी की झलक पूरी भव्यता से संयोजित होगी। पार्क में अयोध्या की राजकुमारी की नदी व समुद्र से कोरिया की यात्रा की गाथा को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया जाएगा।
वर्जन
8500 स्कवायर मीटर जमीन विस्तारीकरण के लिए चाहिए। कोरिया पार्क के सामने की जमीन पर काम होना है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। डिजाइन व ले आउट पहले ही तैयार हो चुका है। टेंडर होते ही काम शुरू हो जाएगा।
प्रमोद यादव, परियोजना प्रबंधक, यूपी राजकीय निर्माण निगम
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सरयू तट पर स्थित कोरियाई महारानी हौ के स्मारक के विस्तारीकरण एवं सुंदरीकरण के लिए दो-दो बार निर्णय बदलने के बाद तीसरी बार फिर नए स्थान का चयन किया गया है। तीसरी बार चिन्हित स्थल कोरियाई शिष्टमंडल को भी बेहद पसंद आ गया है। इस बार पर्यटन विभाग के साकेत तीर्थ यात्री केंद्र का चयन किया गया है।
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इससे पहले कोरिया पार्क के विस्तारीकरण के लिए उससे सटे नदी के भूभाग को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया था। बरसात के मौसम में इस स्थान पर पानी भर जाने की समस्या को ध्यान में रखते हुए कोरियाई प्रशासन इस भूमि के लिए राजी नहीं था। फिलहाल पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने उन्हें यह कहते हुए मना लिया कि बाढ़ से बचाव के लिए अतिरिक्त बंधे का निर्माण करा दिया जाएगा।
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उधर, यह प्रक्रिया आगे बढ़ती, इससे पहले ही बंधा निर्माण पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण एनजीटी ने रोक लगा दी। इस रोक के बाद पर्यटन के अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के ठीक पीछे स्थित जमीन पर निर्माण का प्रस्ताव किया, लेकिन यह जमीन पहले से ही विवादित थी।
इस भूमि पर छह नवंबर को शिलान्यास प्रस्तावित था, लेकिन प्रश्नगत जमीन के स्वामित्व का दावा करने वाले पक्षकार राकेश कुमार श्रीवास्तव ने अधिकारियों को शिकायती पत्र के साथ हाईकोर्ट के स्थगनादेश की सूचना दी। जिसके बाद साकेत तीर्थ केंद्र की भूमि का हस्तांतरण किया गया। जिस पर कोरियाई पार्क के विस्तारीकरण का काम होना है।
दैवी संदेश से कोरिया पहुंची थी अयोध्या की राजकुमारी
कोरियाई पुराकथा के अनुसार रानी हौ अयोध्या की राजकुमारी सूरी रत्ना थीं और दो हजार वर्ष पूर्व दैवी संदेश पाकर वे सुदीर्घ जल यात्रा से दक्षिण कोरिया पहुंचीं। यहां उनका विवाह राजा सूरो से हुआ और उनका वंश हजारों वर्षों से कोरिया के सर्वाधिक प्रभावशाली समूह के तौर पर स्थापित है। कोरिया की करीब आठ प्रतिशत आबादी आज भी राजकुमारी सुरी रत्ना और किम सूरो को अपना पूर्वज मानती है।
पार्क में दिखेगी भारत-कोरिया के संबंधों की गौरव गाथा
योजना के अनुसार पार्क में भारत-कोरिया के ऐतिहासिक संबंधों की गौरव गाथा दिखेगी। पार्क में दोनों देशों की वास्तुकला का दृश्यांकन भी नजर आएगा। इसमें विभिन्न माध्यमों से अयोध्या एवं गिम हे सिटी की झलक पूरी भव्यता से संयोजित होगी। पार्क में अयोध्या की राजकुमारी की नदी व समुद्र से कोरिया की यात्रा की गाथा को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया जाएगा।
वर्जन
8500 स्कवायर मीटर जमीन विस्तारीकरण के लिए चाहिए। कोरिया पार्क के सामने की जमीन पर काम होना है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। डिजाइन व ले आउट पहले ही तैयार हो चुका है। टेंडर होते ही काम शुरू हो जाएगा।
प्रमोद यादव, परियोजना प्रबंधक, यूपी राजकीय निर्माण निगम