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तीन महाविद्यालयों ने कहा, रद्द कर दीजिए संबद्धता
Updated Tue, 30 Jan 2018 10:48 PM IST
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तीन महाविद्यालयों ने कहा, रद्द कर दीजिए संबद्धता
फैजाबाद। शिक्षकों का सत्यापन न करने वाले ब्लैक लिस्टेड घोषित 171 महाविद्यालयों में से तीन कॉलेजों ने अवध विश्वविद्यालय से अपनी संबद्धता ही रद्द किए जाने की मांग कर दी है। हालांकि कुलपति इसे दबाव की राजनीति मान रहे हैं। अब विश्वविद्यालय की बुधवार को प्रस्तावित कार्य परिषद की बैठक में ब्लैक लिस्टेड कॉलेजों व फर्जी शिक्षकाें पर कार्रवाई समेत फीस वृद्धि आदि पर चर्चा के साथ इस पर भी निर्णय लिया जाएगा। जानकारों के अनुसार कार्य परिषद में दागी कॉलेजों पर कार्रवाई का मामला शासन को संदर्भित करने और मुकदमा चलाने जैसा कड़ा फैसला भी हो सकता है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध तीन महाविद्यालयों ने अपनी संबद्धता से हाथ खड़े कर दिए हैं। तीनों महाविद्यालयों को पहले ही शिक्षकों का सत्पापन न करने के आरोप में काली सूची में डाला जा चुका है। अब बुधवार को होने वाली कार्य परिषद की बैठक में तीनों महाविद्यालयों की संबद्धता अगर समाप्त हो जाती है तो, अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों की संख्या 631 बचेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रस्तावित एजेंडे के अनुसार कार्य परिषद की बैठक में पिछली कार्यवाही की पुष्टि और सभी कार्यवाही की मौजूदा स्थिति पर चर्चा होगी। साथ ही अभी हाल ही में वेबसाइट पर सत्यापन के दौरान शिक्षकों का सत्यापन न करने वाले ब्लैक लिस्टेड घोषित 171 महाविद्यालयों पर कड़े प्रतिबंध के साथ रास्ते पर आने की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाना है। यहीं नहीं जांच में फर्जी आधार व पैन नंबर देने वाले 362 शिक्षकों पर कार्रवाई के संबंध में भी निर्णय लिया जाना है। इसके अलावा विश्वविद्यालय व उससे संबद्ध महाविद्यालयों में प्रवेश व परीक्षा शुल्क बढ़ाए जाने पर भी चर्चा होगी। फेलोशिप करने वाले छात्रों को मानदेय देने, खेल को बढ़ावा देने के लिए बजट की व्यवस्था व डिपार्टमेंट के नामकरण पर चर्चा किया जाना प्रस्तावित है। इस सबके बीच प्रस्तावित एजेंडे में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि तीन महाविद्यालयों की संबद्धता समाप्त की जानी है। यह महाविद्यालय ऐसे है जिन्होंने स्वत: विश्वविद्यालय को लिख कर दिया है कि उनकी संबद्धता समाप्त कर दी जाए। इनमें दो महाविद्यालय अंबेडकरनगर व एक महाविद्यालय बाराबंकी का है। तीनों महाविद्यालयों की संबद्धता के खत्म करने के संबंध में दो संभावनाएं बताई जा रही है। एक यह कि तीनों महाविद्यालयों का मैनेजमेंट विद्यालय चलाने की स्थिति में नहीं है व दूसरा यह कि विश्वविद्यालय का नकलरोधी अभियान सफल रहा है।
कार्य परिषद की बैठक बेहद अहम है। हाल में शिक्षकों का सत्यापन न करने वाले ब्लैक घोषित 171 महाविद्यालयों को रास्ते पर लाने की रणनीति बनाई जानी बेहद जरूरी है। अब संबद्धता समाप्त करने का पत्र लिखकर कुछ कॉलेजों की ओर से दबाव बनाने की राजनीति भी शुरू हो गई है। लेकिन दबाव में विश्वविद्यालय प्रशासन कार्यों में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्ति के अभियान को रोक नहीं सकती है।-प्रो. मनोज दीक्षित, कुलपति, अवध विश्वविद्यालय
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फैजाबाद। शिक्षकों का सत्यापन न करने वाले ब्लैक लिस्टेड घोषित 171 महाविद्यालयों में से तीन कॉलेजों ने अवध विश्वविद्यालय से अपनी संबद्धता ही रद्द किए जाने की मांग कर दी है। हालांकि कुलपति इसे दबाव की राजनीति मान रहे हैं। अब विश्वविद्यालय की बुधवार को प्रस्तावित कार्य परिषद की बैठक में ब्लैक लिस्टेड कॉलेजों व फर्जी शिक्षकाें पर कार्रवाई समेत फीस वृद्धि आदि पर चर्चा के साथ इस पर भी निर्णय लिया जाएगा। जानकारों के अनुसार कार्य परिषद में दागी कॉलेजों पर कार्रवाई का मामला शासन को संदर्भित करने और मुकदमा चलाने जैसा कड़ा फैसला भी हो सकता है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध तीन महाविद्यालयों ने अपनी संबद्धता से हाथ खड़े कर दिए हैं। तीनों महाविद्यालयों को पहले ही शिक्षकों का सत्पापन न करने के आरोप में काली सूची में डाला जा चुका है। अब बुधवार को होने वाली कार्य परिषद की बैठक में तीनों महाविद्यालयों की संबद्धता अगर समाप्त हो जाती है तो, अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों की संख्या 631 बचेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रस्तावित एजेंडे के अनुसार कार्य परिषद की बैठक में पिछली कार्यवाही की पुष्टि और सभी कार्यवाही की मौजूदा स्थिति पर चर्चा होगी। साथ ही अभी हाल ही में वेबसाइट पर सत्यापन के दौरान शिक्षकों का सत्यापन न करने वाले ब्लैक लिस्टेड घोषित 171 महाविद्यालयों पर कड़े प्रतिबंध के साथ रास्ते पर आने की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाना है। यहीं नहीं जांच में फर्जी आधार व पैन नंबर देने वाले 362 शिक्षकों पर कार्रवाई के संबंध में भी निर्णय लिया जाना है। इसके अलावा विश्वविद्यालय व उससे संबद्ध महाविद्यालयों में प्रवेश व परीक्षा शुल्क बढ़ाए जाने पर भी चर्चा होगी। फेलोशिप करने वाले छात्रों को मानदेय देने, खेल को बढ़ावा देने के लिए बजट की व्यवस्था व डिपार्टमेंट के नामकरण पर चर्चा किया जाना प्रस्तावित है। इस सबके बीच प्रस्तावित एजेंडे में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह भी है कि तीन महाविद्यालयों की संबद्धता समाप्त की जानी है। यह महाविद्यालय ऐसे है जिन्होंने स्वत: विश्वविद्यालय को लिख कर दिया है कि उनकी संबद्धता समाप्त कर दी जाए। इनमें दो महाविद्यालय अंबेडकरनगर व एक महाविद्यालय बाराबंकी का है। तीनों महाविद्यालयों की संबद्धता के खत्म करने के संबंध में दो संभावनाएं बताई जा रही है। एक यह कि तीनों महाविद्यालयों का मैनेजमेंट विद्यालय चलाने की स्थिति में नहीं है व दूसरा यह कि विश्वविद्यालय का नकलरोधी अभियान सफल रहा है।
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कार्य परिषद की बैठक बेहद अहम है। हाल में शिक्षकों का सत्यापन न करने वाले ब्लैक घोषित 171 महाविद्यालयों को रास्ते पर लाने की रणनीति बनाई जानी बेहद जरूरी है। अब संबद्धता समाप्त करने का पत्र लिखकर कुछ कॉलेजों की ओर से दबाव बनाने की राजनीति भी शुरू हो गई है। लेकिन दबाव में विश्वविद्यालय प्रशासन कार्यों में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्ति के अभियान को रोक नहीं सकती है।-प्रो. मनोज दीक्षित, कुलपति, अवध विश्वविद्यालय
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