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डेढ़ माह से नहीं हो रही खून की 25 प्रकार की जांचें

Thu, 03 Nov 2022 11:30 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Nov 2022 11:30 PM IST
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25 types of blood tests are not being done for one and a half months
अयोध्या। जिला अस्पताल में मरीजों के खून संबंधी जांच करने की दो महत्वपूर्ण मशीनें करीब डेढ़ माह से खराब हैं। इन मशीनों की न तो मरम्मत हो सकी है और न ही नई मशीन का इंतजाम हो सका है।
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इसकी वजह से शुगर, एलएफटी, केएफटी, यूरिक एसिड, लिपिड प्रोफाइल समेत करीब 25 प्रकार की महत्वपूर्ण जांचें नहीं हो रही हैं। इससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें निजी केंद्रों पर मोटी रकम चुकता कर जांच करानी पड़ रही है।
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जिला अस्पताल के ओपीडी व वार्डों में भर्ती मरीजों के खून संबंधी जांचें महिला अस्पताल के बगल स्थित क्षेत्रीय निदान केंद्र से कराई जाती हैं। मुख्यालय होने के कारण यहां मरीजों की हमेशा भीड़ रहती है।
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इन दिनों संक्रामक रोगों के प्रकोप के चलते मरीजों की अपेक्षाकृत अधिक भीड़ है। यहां करीब डेढ़ माह से बायोकेमिस्ट्री व इलेक्ट्रोलाइट जैसी जांच करने की मशीन खराब है।
बायोकेमिस्ट्री वाली मशीन से 22 और इलेक्ट्रोलाइट वाली मशीन से तीन प्रकार की जांचें होती हैं, जो काफी अहम हैं। मशीन की मरम्मत के लिए कई बार पत्राचार किया जा चुका है।
लेकिन अभी तक न तो मशीन की मरम्मत हुई न ही इसके स्थान पर नई मशीन की व्यवस्था कराई गई है। जिला अस्पताल में गुरुवार को सुबह 10 बजे आरडीसी के हालात चिंताजनक नजर आए।
इन मशीनों के खराब होने के कारण यहां शुगर, लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी), किडनी फंक्शन टेस्ट (केएफटी), दिल से संबंधित जांच (लिपिड प्रोफाइल), आरए फैक्टर, यूरिक एसिड, कैल्शियम, सीआरपी, एएसओ टाइटल, एमाइलेस, सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम क्लोराइड समेत अन्य महत्वपूर्ण जांचें नहीं हो पा रही हैं।
इनमें एलएफटी-केफटी, लिपिड प्रोफाइल, यूरिक एसिड, शुगर जैसी जांचें तो काफी आम हैं, जिनकी जांच के लिए तमाम मरीज लाइन में खड़े नजर आए। काउंटर पर पता चला कि पर्चे की आधी जांच नहीं हो पाएगी तो मरीजों ने नाराजगी भी जताई और कर्मचारियों से उनकी बहस भी हुई।
फुली ऑटोमेटिक बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर मशीन व इलेक्ट्रोलाइट वाली मशीन पीओसीटी कंपनी ने उपलब्ध कराई थीं। बाद में शासन से मशीनों की देखरेख की जिम्मेदारी साइरिक्स कंपनी प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दी।
यह मशीनें ज्यादातर समय खराब ही रहीं, लेकिन इसके मरम्मत का कार्य संतोषजनक ढंग से नहीं किया गया। इधर, करीब डेढ़ माह से यह मशीन खराब है, जिसकी मरम्मत के लिए बार-बार कंपनी व शासन तक को अनुस्मारक भेजा जा रहा है।
शहर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाली छात्रा साधना ने बताया कि वह बुखार से पीड़ित हैं। ओपीडी में डॉक्टर ने एलएफटी जांच कराने की सलाह दी। काफी देर तक लाइन में लगने के बाद में पता चला कि जांच नहीं हो पाएगी।
मकबरा से बच्चे की जांच कराने आए सिद्धांत चौरसिया ने बताया कि सुबह से लाइन में लगे खड़े हैं। कई तरह की जांचें होनी हैं। जब नंबर आया तो काउंटर पर बताया गया कि कुछ जांच नहीं हो पाएगी।
कुमारगंज निवासी समर बहादुर ने बताया कि बुखार से पीड़ित हैं। एलएफटी, इलेक्ट्रोलाइट समेत अन्य जांच करानी हैं। लाइन में खड़े हैं, बताया जा रहा कि मशीन खराब है।
राठहवेली निवासी मुन्नी ने बताया कि एलएफटी समेत कई जांच करानी हैं, लेकिन मशीन खराब बताकर लौटा दिया गया। महिला अस्पताल में भी जांच नहीं हो पाई। अब बाहर से ही जांच करानी पड़ेगी। लाइन में लगे मरीजों ने व्यवस्था के प्रति रोष जताते हुए समस्या के निस्तारण की मांग की है।

पीओसीटी द्वारा लगवाई गईं बायोकेमिस्ट्री व इलेक्ट्रोलाइट जांच मशीनें डेढ़ माह से खराब हैं। इससे रक्त संबंधी करीब 25 प्रकार की जांचे नहीं हो पा रही हैं। दोनों मशीनों की मरम्मत के लिए कई बार पत्राचार किया गया। अनुस्मारक भी भेजा गया, लेकिन समस्या का निस्तारण नहीं हो सका है। शासन को भी पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया गया है। -डॉ. सीबीएन त्रिपाठी, सीएमएस, जिला अस्पताल, अयोध्या
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