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282 स्कूलों का अस्तित्व समाप्त, शिक्षकों में आक्रोश

Sun, 21 Apr 2019 01:46 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 21 Apr 2019 01:46 AM IST
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282 स्कूलों का अस्तित्व समाप्त, शिक्षकों में आक्रोश
282 स्कूलों का अस्तित्व समाप्त
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अयोध्या। नए सत्र की शुरुआत के साथ ही जिले के 282 प्राथमिक स्कूलों का अस्तित्व समाप्त हो गया। एक ही परिसर में संचालित इन स्कूलों का उच्च प्राथमिक स्कूलों में विलय कर दिया गया है। बीएसए ने सभी विकासखंड वार सूची जारी करते हुए आदेश जारी किया है। वहीं, शिक्षक संघ ने जारी सूची का विरोध करते हुए मजिस्ट्रेटी जांच की मांग की है। शिक्षकों ने विलय की कार्रवाई में शासनादेश का अनुपालन न करने का आरोप लगाया है।

जिले में कुल 1529 प्राथमिक और 566 उच्च प्राथमिक स्कूल संचालित हो रहे हैं। जिनमें बीते वर्ष एक लाख 90 हजार 533 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें कई प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल एक ही परिसर में संचालित होते हैं। यहां अलग-अलग अध्यापक, रसोइया, प्रधानाध्यापक की तैनाती है। शासन ने ऐसे स्कूलों को एक साथ जोड़ने का निर्णय लिया।
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शासनादेश जारी करते हुए ऐसे प्राथमिक स्कूलों का उच्च प्राथमिक स्कूलों में विलय करने का मन बनाया गया। जारी शासनादेश के अनुसार स्कूलों का विलय होने पर उच्च प्राथमिक विद्यालय का प्रधानाध्यापक ही स्कूल का प्रधानाध्यापक होगा। विद्यालय का वित्तीय एवं प्रशासनिक नियंत्रण इसी प्रधानाध्यापक में निहित होगा। विद्यालय में आरटीई मानक के अनुसार शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।
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विद्यालय के समस्त अभिलेखों की अभिरक्षा का दायित्व प्रधानाध्यापक का होगा और संविलियन के उपरांत स्कूल में एक ही प्रधानाध्यापक कार्यालय संचालित होगा। शासन के आदेश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों को सूचीबद्ध करना शुरू किया तो इन स्कूलों की संख्या पहले 293 पहुंची। बाद में आपत्तियां आदि प्राप्त होने के बाद अंतिम सूची बनी तो ये संख्या 282 आई।

जिन पर मंथन करने के उपरांत 18 अप्रैल के आदेश की सूची शनिवार को सार्वजनिक की गई। यह सूची सार्वजनिक होते ही शिक्षकों में उबाल आ गया। स्कूलों के विलय को जहां बेसिक शिक्षा विभाग एक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक सकारात्मक पहल बता रहा है, वहीं जिले के शिक्षक इस व्यवस्था से काफी असंतुष्ट हैं और इस निर्णय को शिक्षक हित के विपरीत बता रहे हैं।

उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ ने जिले में संविलियन किए गए विद्यालयों में शासनादेश को दरकिनार करने का आरोप लगाया गया है। संघ के जिलाध्यक्ष नीलमणि त्रिपाठी ने बताया कि शासनादेश में एक ही परिसर में संचालित स्कूलों का विलय करने की बात कही गई है, लेकिन अलग-अलग परिसर में संचालित कई ऐसे स्कूलों का नाम भी सूची में शामिल है।


सूची भी छिपाए रखी गई। आपत्तियों का संज्ञान नहीं लिया गया। सूची का गहन परीक्षण किया जा रहा है। शीघ्र ही साक्ष्य सहित उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। मामले की मजिस्ट्रेटी जांच हो तो दूध का दूध व पानी का पानी हो जाएगा। बीएसए अयोध्या अमिता सिंह ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारियों के प्रस्ताव पर 282 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल एक ही परिसर में संचालित प्राप्त हुए थे। जिनका निरीक्षण करके नियम व शासनादेश के अनुसार इन स्कूलों का विलय कर दिया गया है।
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