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150 रुपये किलो पहुंची अरहर की दाल
फैजाबाद
Updated Wed, 20 Apr 2016 11:42 PM IST
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बाजार में बिकती दाल
- फोटो : अमर उजाला
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जिले की थोक मंडी से दालों का संकट बताकर एक बार फिर दाम बढ़ाने का सिलसिला शुरू है। एक माह पहले तक 120 रुपये किलो बिक रही दाल बुधवार को 150 रुपये प्रति किलो पहुंच गयी है।
दाम बढ़ाते जाने की इस प्रवृत्ति पर सरकारी अंकुश नहीं लग पाया है। हालांकि थोक व फुटकर दाल व्यापारियों के यहां स्टॉक की कमी नहीं है। संकट महज बहाना है, दुकानों से जितनी चाहे दाल कभी भी ली जा सकती है।
दालों के भाव बढ़ने से गरीब और मध्यम वर्ग की थाली से दाल गायब हो चुकी है। जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर प्रशासन ने कोई रणनीति तक नहीं बनाई है। डीएसओ दाल महंगी होने के पीछे मांग बढ़ने, आपूर्ति घटने की बात कहकर व्यापारियों से कदमताल मिलाते दिखे।
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सूत्रों के अनुसार फैजाबाद में तीन दाल मिलें हैं, लेकिन यहां मटर की दाल दली जाती है। अरहर दाल के थोक व्यापारी एमपी से इलाहाबाद आने वाली दाल खरीदते हैं। एमपी से ही लखनऊ व कानपुर की मंडी में दालें आती हैं, लेकिन वहां संकट कहा जा रहा है।
व्यापारी ज्यादा दाल इसलिए नहीं मंगा रहे हैं कि कहीं दाम घटे तो नुकसान होगा। दाल की सबसे बड़ी मंडी फतेहगंज बाजार है। हाल यह है कि बड़े दुकानदारों के यहां दालों का कोई अभाव नहीं है।
उनके गोदाम भरे हैं, लेकिन इनके मालिक फुटकर दुकानदारों को दालों की कमी बताकर महंगे में माल बेच रहे हैं। उधर छोटी व बड़ी सभी दुकानों पर दाल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। हर कोई यह दाल आसानी से, किंतु ऊंचे दामों पर सभी दुकानों से पा सकता है।
ऐसे में 120 से 130 रुपये किलो में मिल रही अरहर की दाल अब 140 से 150 रुपये किलो पहुंच गयी है। मटर की दाल के साथ ही दूसरी सभी दालों के दाम दुकानदारों ने बढ़ा दिये हैं।
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दाम बढ़ाते जाने की इस प्रवृत्ति पर सरकारी अंकुश नहीं लग पाया है। हालांकि थोक व फुटकर दाल व्यापारियों के यहां स्टॉक की कमी नहीं है। संकट महज बहाना है, दुकानों से जितनी चाहे दाल कभी भी ली जा सकती है।
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दालों के भाव बढ़ने से गरीब और मध्यम वर्ग की थाली से दाल गायब हो चुकी है। जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर प्रशासन ने कोई रणनीति तक नहीं बनाई है। डीएसओ दाल महंगी होने के पीछे मांग बढ़ने, आपूर्ति घटने की बात कहकर व्यापारियों से कदमताल मिलाते दिखे।
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सूत्रों के अनुसार फैजाबाद में तीन दाल मिलें हैं, लेकिन यहां मटर की दाल दली जाती है। अरहर दाल के थोक व्यापारी एमपी से इलाहाबाद आने वाली दाल खरीदते हैं। एमपी से ही लखनऊ व कानपुर की मंडी में दालें आती हैं, लेकिन वहां संकट कहा जा रहा है।
व्यापारी ज्यादा दाल इसलिए नहीं मंगा रहे हैं कि कहीं दाम घटे तो नुकसान होगा। दाल की सबसे बड़ी मंडी फतेहगंज बाजार है। हाल यह है कि बड़े दुकानदारों के यहां दालों का कोई अभाव नहीं है।
उनके गोदाम भरे हैं, लेकिन इनके मालिक फुटकर दुकानदारों को दालों की कमी बताकर महंगे में माल बेच रहे हैं। उधर छोटी व बड़ी सभी दुकानों पर दाल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। हर कोई यह दाल आसानी से, किंतु ऊंचे दामों पर सभी दुकानों से पा सकता है।
ऐसे में 120 से 130 रुपये किलो में मिल रही अरहर की दाल अब 140 से 150 रुपये किलो पहुंच गयी है। मटर की दाल के साथ ही दूसरी सभी दालों के दाम दुकानदारों ने बढ़ा दिये हैं।