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14 कोसी परिक्रमा पूरी, पंचकोसी आज से
अमर उजाला ब्यूरो/अयोध्या
Updated Wed, 09 Nov 2016 11:53 PM IST
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14 कोसी परिक्रमा से लौटते श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला
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चौदहकोसी परिक्रमा के साथ कार्तिक पूर्णिमा व परिक्रमा मेला का पहला पड़ाव बुधवार को पूरा हो गया। भोर से परिक्रमा पूरी होने के साथ श्रद्धालुओं का सैलाब सरयू तट पर स्नान के बाद प्रमुख मठ-मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए उमड़ने लगा, देर शाम तक दर्शनार्थियों की भीड़ से समूचा मेला क्षेत्र गुलजार रहा।
अब पंचकोसी परिक्रमा गुरुवार भोर से होगी, इसे लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व रूट डायवर्जन के सख्त इंतजाम किए हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष अक्षय नवमी तिथि से शुरू होने वाला कार्तिक पूर्णिमा व परिक्रमा मेला मंगलवार को चौदहकोसी परिक्रमा के साथ शुरू हुआ।
हालांकि परिक्रमा आरंभ करने का मुहूर्त सुबह सात बजकर 32 मिनट से था लेकिन भोर तीन बजते-बजते श्रद्धालुओं का कारवां परिक्रमा पथ पर उमड़ने लगा। बुधवार की भोर होते-होते परिक्रमा पूरी होते ही परिक्रमार्थियों की भीड़ सरयू में डुबकी लगा स्नान-दान कर प्रमुख मंदिरों मे दर्शन पूजन के लिए जुट गई।
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प्रसिद्ध नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनक भवन के साथ श्रीराम जन्मभूमि पर भोर से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। श्रद्धालु मेले में लगे दुकानों पर खरीदारी करते रहे।
समूची नगरी श्रद्धालुओं के जयकारों से गूंजती रही। दूसरी बेला होते-होते मेला क्षेत्र से परिक्रमा व दर्शन-पूजन कर श्रद्धालुओं की वापसी शुरू होने लगी। रेलवे स्टेशन व बस स्टेशन परिसर श्रद्धालुओं से पटे रहे।
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अब पंचकोसी परिक्रमा गुरुवार भोर से होगी, इसे लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व रूट डायवर्जन के सख्त इंतजाम किए हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष अक्षय नवमी तिथि से शुरू होने वाला कार्तिक पूर्णिमा व परिक्रमा मेला मंगलवार को चौदहकोसी परिक्रमा के साथ शुरू हुआ।
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हालांकि परिक्रमा आरंभ करने का मुहूर्त सुबह सात बजकर 32 मिनट से था लेकिन भोर तीन बजते-बजते श्रद्धालुओं का कारवां परिक्रमा पथ पर उमड़ने लगा। बुधवार की भोर होते-होते परिक्रमा पूरी होते ही परिक्रमार्थियों की भीड़ सरयू में डुबकी लगा स्नान-दान कर प्रमुख मंदिरों मे दर्शन पूजन के लिए जुट गई।
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प्रसिद्ध नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनक भवन के साथ श्रीराम जन्मभूमि पर भोर से शुरू हुआ दर्शन-पूजन का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। श्रद्धालु मेले में लगे दुकानों पर खरीदारी करते रहे।
समूची नगरी श्रद्धालुओं के जयकारों से गूंजती रही। दूसरी बेला होते-होते मेला क्षेत्र से परिक्रमा व दर्शन-पूजन कर श्रद्धालुओं की वापसी शुरू होने लगी। रेलवे स्टेशन व बस स्टेशन परिसर श्रद्धालुओं से पटे रहे।