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केशवपुर तिहरा हत्याकांड के दो सजायाफ्ता दोषमुक्त
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Mar 2016 01:06 AM IST
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हर्रैया। पंचायत चुनाव की रंजिश को लेकर पैकोलिया थाना क्षेत्र के केशवपुर गांव के चर्चित तिहरे हत्याकांड में शुक्रवार को उच्च न्यायालय ने फांसी की सजा पाए दो आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए रिहा कर दिया।
मामले में एक आरोपी को पुलिस अभी तक नहीं गिरफ्तार नहीं कर पाई है जबकि चार आरोपी जिला जेल में बंद हैं। वर्ष 2010 के पंचायत चुनाव में केशवपुर गांव निवासी पंकज पांडेय की भाभी रीता पांडेय प्रधान निर्वाचित हुई थीं। चुनाव में गांव के ही रहने वाले कुलदीप पांडेय उर्फ सूर्या पांडेय की मां भी मैदान में थीं।
इस बात को लेकर दोनों पक्षों में तनातनी चल रही थी। मां की हार से खार खाए सूर्या उर्फ कुलदीप ने चार अन्य लोगों के साथ मिलकर 26 सितंबर 2011 को पंकज पांडेय पर उस समय हमला कर दिया, जब वह गांव के बाहर सड़क पर एक पीसीओ में रत्नाकर पांडेय और शिव प्रकाश उर्फ मंटू पांडेय के साथ बैठे थे।
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दिन दहाड़े हुई अंधाधुंध फायरिंग में तीनों युवकों की गोली लगने से मौत हो गई थी। पंकज पांडेय के परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने गांव निवासी सत्य प्रकाश पांडेय के पुत्रों सूर्या उर्फ कुलदीप, धर्मेंद्र, राजीव पांडेय उर्फ नन्हे और मनीष और गोंडा जनपद के छपिया थाना क्षेत्र के तेनुआ गांव निवासी धर्मेंद्र पांडेय व नौसाद अंसारी व भूषण यादव निवासी दुर्गागंज माझा थाना नवाबगंज गोंडा को आरोपी बनाते हुए सात लोगों के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में दाखिल किया था।
इनमें से साक्ष्य के अभाव में नौसाद बरी हो गए थे। जेल में बंद सूर्या और धर्मेंद्र पांडेय को अपर जिला जज न्यायालय से 26 मई 2015 को फांसी की सजा हुई थी। इस मामले में अन्य आरोपियों के फरार रहने के कारण उस समय केवल इन्हीं दोनोें के मामले की सुनवाई हुई थी।
सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर याचिका में शुक्रवार को दो जजों की पीठ ने कुलदीप उर्फ सूर्या और धर्मेंद्र को दोषमुक्त करते हुए एक-एक लाख के बांड पर रिहाई का आदेश दिया है। क्षेत्र मे इस सनसनीखेज हत्याकांड में उच्च न्यायालय के फैसले की चर्चा जोरों पर है।
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मामले में एक आरोपी को पुलिस अभी तक नहीं गिरफ्तार नहीं कर पाई है जबकि चार आरोपी जिला जेल में बंद हैं। वर्ष 2010 के पंचायत चुनाव में केशवपुर गांव निवासी पंकज पांडेय की भाभी रीता पांडेय प्रधान निर्वाचित हुई थीं। चुनाव में गांव के ही रहने वाले कुलदीप पांडेय उर्फ सूर्या पांडेय की मां भी मैदान में थीं।
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इस बात को लेकर दोनों पक्षों में तनातनी चल रही थी। मां की हार से खार खाए सूर्या उर्फ कुलदीप ने चार अन्य लोगों के साथ मिलकर 26 सितंबर 2011 को पंकज पांडेय पर उस समय हमला कर दिया, जब वह गांव के बाहर सड़क पर एक पीसीओ में रत्नाकर पांडेय और शिव प्रकाश उर्फ मंटू पांडेय के साथ बैठे थे।
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दिन दहाड़े हुई अंधाधुंध फायरिंग में तीनों युवकों की गोली लगने से मौत हो गई थी। पंकज पांडेय के परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने गांव निवासी सत्य प्रकाश पांडेय के पुत्रों सूर्या उर्फ कुलदीप, धर्मेंद्र, राजीव पांडेय उर्फ नन्हे और मनीष और गोंडा जनपद के छपिया थाना क्षेत्र के तेनुआ गांव निवासी धर्मेंद्र पांडेय व नौसाद अंसारी व भूषण यादव निवासी दुर्गागंज माझा थाना नवाबगंज गोंडा को आरोपी बनाते हुए सात लोगों के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में दाखिल किया था।
इनमें से साक्ष्य के अभाव में नौसाद बरी हो गए थे। जेल में बंद सूर्या और धर्मेंद्र पांडेय को अपर जिला जज न्यायालय से 26 मई 2015 को फांसी की सजा हुई थी। इस मामले में अन्य आरोपियों के फरार रहने के कारण उस समय केवल इन्हीं दोनोें के मामले की सुनवाई हुई थी।
सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर याचिका में शुक्रवार को दो जजों की पीठ ने कुलदीप उर्फ सूर्या और धर्मेंद्र को दोषमुक्त करते हुए एक-एक लाख के बांड पर रिहाई का आदेश दिया है। क्षेत्र मे इस सनसनीखेज हत्याकांड में उच्च न्यायालय के फैसले की चर्चा जोरों पर है।