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अब छत्रपाल गंगवार के सहारे पिछड़ा वर्ग साधेगी भाजपा
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अब छत्रपाल गंगवार के सहारे पिछड़ा वर्ग साधेगी भाजपा
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क्रासर
पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार को मंत्री पद से हटाए जाने के बाद से सरगर्मी थी तेज
करीब दो साल से प्रदेश सरकार में जिले की कोई हिस्सेदारी भी नहीं
विपक्षी दल बरेली से हिस्सेदारी न होने को मुद्दा बनाकर भुनाने में लगे थे
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। बहेड़ी विधायक छत्रपाल गंगवार को मंत्री बनाकर भाजपा बरेली में पिछड़ा वर्ग को साधेगी। पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार को मंत्री पद से हटाए जाने के बाद से खुद भाजपा व विपक्षी दलों में इसे लेकर चर्चाएं भी तेज थी। सपा ने पिछले छह महीने में पिछड़ा वर्ग से जुड़े नेताओं की गतिविधियां भी जिले में तेज कर दी थी। इसी महीने मंडल के हर जिले में पिछड़ा वर्ग सम्मेलन भी आयोजित कराया गया था। तभी से कयास लगाए जा रहे थे कि भाजपा इसके जवाब में जल्द कोई पैंतरा जरूर खेलेगी।
रुहेलखंड की राजनीति में पिछड़ा वर्ग का सीधा प्रभाव माना जाता है। जिले की सभी विधानसभा की बात करें तो यहां बहेड़ी, नवाबगंज, भोजीपुरा और आंवला क्षेत्रों में पिछड़ा वर्ग का खासा सीधा प्रभाव माना जाता है। बहेड़ी का एक हिस्सा पीलीभीत संसदीय क्षेत्र में भी आता है। ऐसे में छत्रपाल के मंत्री बनाए जाने के कई मायने हैं। भाजपा एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश में हैं। छत्रपाल भाजपा से सिर्फ विधायक ही नहीं पुराने कार्यकर्ता है। संघ में भी उनकी पैठ मानी जाती है। वह सीतापुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कहने पर विस्तारक और प्रचारक की भूमिका निभा चुके हैं। कहा यह भी जाता ये की 2002 में जब इनकी इंट्री सियासत में हुई तो वह संघ के हस्तक्षेप के कारण ही हुई। भाजपा नेतृत्व में उस समय इनका खासा दखल नहीं था जो इन्हें राजनीति में दाखिल कराया सकता। आज भी वह भाजपा और संघ के संपर्क में बराबर का समय देते हैं।
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लंबे समय से नहीं थी प्रदेश सरकार में हिस्सेदारी
बरेली की सभी नौ विधानसभा में भाजपा के विधायक है। सरकार बनने पर जिले से कैंट विधायक को वित्त मंत्री और आंवला विधायक धर्मपाल सिंह को सिंचाई मंत्री बनाकर प्रदेश में बरेली की स्थिति को मजबूत जरूर किया गया था लेकिन दो ही साल में दोनों से मंत्रिमंडल से इस्तीफा ले लिया गया था। उसके बाद जिले कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला बल्कि पंचायत चुनाव के बाद परिणाम घोषित से कुछ दिन पहले ही सांसद संतोष गंगवार की भी मंत्रिमंडल से छुट्टी कर दी गई थी। उसके बाद से तरह-तरह के कयास लगने शुरू हुए थे।
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आयोग में जगह न मिलने से शुरू हुआ था विरोध
जून में योगी सरकार की ओर से अनुसूचित जाति एवं जनजाति और पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया था। जिले में अनुसूचित जाति व पिछड़ा वर्ग की कुल आबादी करीब 82 फीसदी है। लिहाजा माना जा रहा था बरेली की हिस्सेदारी जरूर होगी लेकिन बरेली की हिस्सेदारी न होने से उस समय सिर्फ नेता ही कार्यकर्ता भी चौंके थे और सोशल मीडिया पर करीब एक सप्ताह कड़ा विरोध हुआ था। उसके बाद विपक्षी दलों ने इसे भुनाना शुरु किया तो पार्टी नेताओं ने बैठक में इस बात को रखकर पार्टी को चेताया था। माना जा रहा इसे भी ध्यान में रखते हुए पार्टी ने पिछड़ा वर्ग को साधने की कोशिश की हैं, जिससे आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को इसका नुकसान न उठाना पड़े और विपक्षी दल इसे चुनावी मुद्दा न बना सकें।
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कार्यकर्ताओं, खांटी नेताओं में भरोषा कायम करेगी पार्टी
छत्रपाल गंगवार पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं। उन्हें मंत्री पद देने के साथ ही पार्टी मौजूदा कार्यकर्ताओं में यह संदेश देना चाहेगी कि सिर्फ भाजपा ही पुराने से पुराने कार्यकर्ता को न सिर्फ आगे बढ़ाते हुए नेता बनाती है बल्कि समय आने पर बड़े पदों पर भी आगे करती है। जिससे वर्तमान समय में जो कार्यकर्ता पूरे मनोयोगसे पार्टी को आगे बढाने में लगे हैं उनका मनोबल उसी तरह बना रहे। वह विपक्षी दलों के चलाये जाने वाले किसी तरह के प्रोपोगंडा में फंसकर विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए जुटे रहें।
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