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ऐतिहासिक मड़फा दुर्ग की ड्योढ़ी की ध्वस्त
ब्यूरो/अमर उजाला,बांदा
Updated Fri, 11 Mar 2016 12:21 AM IST
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बदमाशों द्वारा ध्वस्त की गईं प्राचीन और एतिहासिक मड़फा दुर्ग के द्वार की सीढ़िया।
- फोटो : अमर उजाला
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बदौसा। अज्ञात बदमाशों ने प्राचीन और ऐतिहासिक मड़फा दुर्ग के गेट की ड्योढ़ी ध्वस्त कर दी। पत्थर तोड़ डाले। शक की सुई नवोदित शिवा गैंग पर जा रही है। तोड़फोड़ के पीछे दफीना (जमीन में गड़ा धन) निकालने की लालच का भी कयास लगाया जा रहा है। पुरातत्व विभाग इस ऐतिहासिक दुर्ग के रखरखाव मेें नाकाम है।
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मड़फा किला कई दशकों से दस्यु दलों का अड्डा रहा है। इसमें तोड़फोड़ भी होती रही है। काफी बीहड़ क्षेत्र में होने से डकैतों के लिए सुरक्षित स्थान है। यह दुर्ग पुरातत्व विभाग की संपत्ति है। लेकिन पुरातत्व विभाग यहां प्रमुख फाटक, पंचमुखी शिव मंदिर और मांडव ऋषि आश्रम में सिर्फ अपने बोर्ड लगाकर फर्ज अदायगी कर रहा है।
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दो दिन पूर्व महाशिव रात्रि के अवसर पर दुर्ग के प्रमुख द्वार की ड्योढ़ी पर लगे भारी भरकम पत्थर तोड़ दिए गए। गेट जर्जर और गिराऊ अवस्था में पहुंच गया है। पुलिस भी चुप्पी साधे रहै। यहां के बुजुर्ग पंडित जग किशोर पयासी बताते हैं कि दफीनाबाज अक्सर किले में चोरी छिपे खुदाई करते हैं। पत्थर की कीमतीं मूर्तियां भी चोरी हो रही हैं। पुरातत्व विभाग कोई रखरखाव या मरम्मत नहीं कराता। न ही श्रद्धालुओं को यह कराने की अनुमति देता है।
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मड़फा दुर्ग के बारे में क्विदंती है कि 1209 ईस्वी मेें गुजरात से भागकर आए सिद्धराय जय सिंह के पुत्र व्याघ्रदेव ने यहां शरण ली थी। उसने ही दुर्ग का निर्माण कराया। व्याघ्रदेव ने चंदेलों की पुत्री से शादी कर ली और यहां की सल्तनत उन्हें सौंप दी।
मड़फा पर्वत मांडव्य ऋषि और आयुर्वेद के जनक चरक की तपोस्थली के रूप में जाना जाता है। सुरक्षा व्यवस्था न होने से अब यहां पर्यटक भी नहीं आते। विंध्य पर्वत श्रृंखला का यह अनोखा स्थल है। डकैतों का अड्डा बन जाने से यह वीरान पड़ा है।
रसिन गांव की प्रधान नीरा पटेल, भगवतपुर गांव के प्रधान भारत सिंह सहित मनीष शुक्ला, कालीचरन वाजपेई आदि ने शासन से मड़फा किले का जीर्णोद्धार और सुरक्षा व्यवस्था कराने की मांग की है।