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Ayodhya News: अयोध्या से शुरू हुआ पांडुलिपियों के संरक्षण का दूसरा चरण
Wed, 21 Oct 2026 11:52 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 21 Oct 2026 11:52 PM IST
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मणिराम दास छावनी में रखी पाण्डुलिपि स्कैनिंग मशीन।
अयोध्या। ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के दूसरे चरण में अयोध्या में मिली 10 लाख से अधिक पांडुलिपियों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जाएगा। संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में संचालित अभियान के लिए विशेष स्कैनिंग मशीन अयोध्या पहुंच चुकी है। मणिरामदास छावनी स्थित वाल्मीकि भवन में मशीन स्थापित होने के बाद स्कैनिंग शुरू होगी।
अयोध्या में काम पूरा होने के बाद वाराणसी और फिर प्रदेश के अन्य जिलों में अभियान चलाया जाएगा। जिन स्थानों पर पांडुलिपियां मिली हैं, उन्हें वहीं संरक्षित किया जाएगा। प्रदेश के सभी 75 जिलों में दुर्लभ पांडुलिपियों की तलाश के लिए मई में सर्वेक्षण शुरू हुआ था। शुरुआती दो महीनों में अयोध्या में बड़े पैमाने पर पांडुलिपियां मिलीं। इनकी निर्धारित मानकों के अनुसार जांच और छंटनी के बाद अब डिजिटल संरक्षण की तैयारी है।
स्कैनिंग से सुरक्षित रहेगी प्राचीन विरासत
डिजिटल प्रतियां तैयार होने से मूल पांडुलिपियों को बार-बार निकालने और संभालने की जरूरत कम होगी। इससे प्राचीन साहित्य, धार्मिक ग्रंथों और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी दुर्लभ सामग्री को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
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पांडुलिपियों के संरक्षण का उद्देश्य प्राचीन साहित्य, धार्मिक ग्रंथों और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी दुर्लभ सामग्री को नष्ट होने से बचाना है। कागज और अन्य पारंपरिक माध्यमों पर लिखी पांडुलिपियां समय के साथ खराब होने लगती हैं। डिजिटल प्रतियां तैयार होने से इनके संरक्षण के साथ शोधकर्ताओं और युवा पीढ़ी को भारतीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी सामग्री तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
आशुतोष द्विवेदी, सलाहकार, अंतरराष्ट्रीय रामायण वैदिक शोध संस्थान
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अयोध्या में काम पूरा होने के बाद वाराणसी और फिर प्रदेश के अन्य जिलों में अभियान चलाया जाएगा। जिन स्थानों पर पांडुलिपियां मिली हैं, उन्हें वहीं संरक्षित किया जाएगा। प्रदेश के सभी 75 जिलों में दुर्लभ पांडुलिपियों की तलाश के लिए मई में सर्वेक्षण शुरू हुआ था। शुरुआती दो महीनों में अयोध्या में बड़े पैमाने पर पांडुलिपियां मिलीं। इनकी निर्धारित मानकों के अनुसार जांच और छंटनी के बाद अब डिजिटल संरक्षण की तैयारी है।
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स्कैनिंग से सुरक्षित रहेगी प्राचीन विरासत
डिजिटल प्रतियां तैयार होने से मूल पांडुलिपियों को बार-बार निकालने और संभालने की जरूरत कम होगी। इससे प्राचीन साहित्य, धार्मिक ग्रंथों और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी दुर्लभ सामग्री को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
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पांडुलिपियों के संरक्षण का उद्देश्य प्राचीन साहित्य, धार्मिक ग्रंथों और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी दुर्लभ सामग्री को नष्ट होने से बचाना है। कागज और अन्य पारंपरिक माध्यमों पर लिखी पांडुलिपियां समय के साथ खराब होने लगती हैं। डिजिटल प्रतियां तैयार होने से इनके संरक्षण के साथ शोधकर्ताओं और युवा पीढ़ी को भारतीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी सामग्री तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी।
आशुतोष द्विवेदी, सलाहकार, अंतरराष्ट्रीय रामायण वैदिक शोध संस्थान