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Ram Navmi 2026: ऐतिहासिक रहा पूर्ण राम मंदिर में पहला जन्मोत्सव, पहली बार सजा राम परिवार, ऐसा रहा माहौल

Fri, 27 Mar 2026 08:32 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya नितिन मिश्र, अमर उजाला, अयोध्या
नितिन मिश्र, अमर उजाला, अयोध्या Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Fri, 27 Mar 2026 08:32 PM IST
सार

राम मंदिर की पूर्णता के बाद यह पहला राम जन्मोत्सव था, पूरे वैभव के साथ पहली बार जन्मोत्सव पर राम परिवार भी सजा। यह दृश्य श्रद्धा से भरे हर हृदय को भावविभोर कर गया। कुल पांच वर्ष, सात महीने और 21 दिन में यह भव्य मंदिर पूर्णता को प्राप्त हुआ।

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The first birth anniversary of the completed Ram temple was historic.
- फोटो : amar ujala

विस्तार

अद्भुत भव्यता के संगम की साक्षी बनी रामनगरी ने इस बार एक नया इतिहास रच दिया। 1700 करोड़ रुपये की लागत से बने भव्य राम मंदिर में मनाया गया राम जन्मोत्सव केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सदियों के स्वप्न के साकार होने का उत्सव बन गया। मंदिर की पूर्णता के बाद यह पहला राम जन्मोत्सव था, पूरे वैभव के साथ पहली बार जन्मोत्सव पर राम परिवार भी सजा। यह दृश्य श्रद्धा से भरे हर हृदय को भावविभोर कर गया।

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रामनगरी की हवाओं में भक्ति का स्पंदन स्पष्ट महसूस किया जा सकता था। मंदिर परिसर में उमड़ा जनसैलाब, “जय श्रीराम” के गगनभेदी उद्घोष मानो त्रेतायुग की झलक प्रस्तुत कर रहे थे। इस बार का जन्मोत्सव तकनीक और आस्था के अद्भुत समन्वय का भी प्रतीक बना। लाइव प्रसारण की व्यवस्था के माध्यम से देश-विदेश में बैठे लाखों श्रद्धालु न केवल रामलला के जन्मोत्सव और सूर्य तिलक के दिव्य क्षणों के साक्षी बने, बल्कि लगभग 70 एकड़ में फैले भव्य मंदिर परिसर के प्रत्येक कोने का अनुभव भी प्राप्त किया। विशेष रूप से, पहली बार श्रद्धालुओं को परिसर में स्थित सभी 17 उप मंदिरों के दर्शन एक साथ प्राप्त हुए। इनमें परकोटा के छह मंदिर (भगवान शिव, सूर्यदेव, गणेश, हनुमान , माता भगवती और माता अन्नपूर्णा ) के साथ शेषावतार मंदिर और सप्त मंडपम के अंतर्गत महर्षि वाल्मीकि, विश्वामित्र, वशिष्ठ, अगस्त्य, निषादराज, अहिल्या और शबरी के मंदिरों के दिव्य विग्रहों का दर्शन कराया गया।
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इसके अतिरिक्त कुबेर टीला और गोस्वामी तुलसीदास से संबंधित मंदिर की झलक भी श्रद्धालुओं तक पहुंचाई गई। यद्यपि ये उप मंदिर अभी श्रद्धालुओं के लिए प्रत्यक्ष रूप से खुले नहीं हैं, फिर भी घर बैठे इनके दर्शन करना श्रद्धालुओं के लिए एक अलौकिक और अविस्मरणीय अनुभव बन गया। न केवल दर्शन, बल्कि इन मंदिरों की भव्यता, स्थापत्य और आध्यात्मिक महत्ता की जानकारी भी प्रसारण के माध्यम से साझा की गई, जिससे यह आयोजन और भी विशेष बन गया।

पांच साल सात महीने में साकार हुआ दिव्य स्वप्न

The first birth anniversary of the completed Ram temple was historic.
रामनवमी पर दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु। - फोटो : amar ujala
राम मंदिर का निर्माण केवल एक वास्तु नहीं, बल्कि आस्था की अनवरत साधना का परिणाम है। पांच अगस्त 2020 को भूमिपूजन के साथ इस महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। 19 मार्च 2026 को श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना के साथ मंदिर आध्यात्मिक रूप से पूर्ण हुआ। इस दिन राम मंदिर ट्रस्ट ने पहली बार किसी समारोह में मंदिर निर्माण की पूर्णता की घोषणा की। कुल पांच वर्ष, सात महीने और 21 दिन में यह भव्य मंदिर पूर्णता को प्राप्त हुआ। यद्यपि 25 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण कर इसकी पूर्णता का संकेत दे दिया था, किंतु धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से मंदिर की वास्तविक पूर्णता श्रीराम यंत्र की स्थापना के साथ ही मानी गई।
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