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Ayodhya News: फतेहपुर सांसद के आवास पर हंगामे का मामला जिले में गरमाया
Mon, 27 Apr 2026 09:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 27 Apr 2026 09:47 PM IST
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हमले के विरोध में कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपते सपा नेता व अन्य।
अयोध्या। फतेहपुर के सांसद नरेश उत्तम पटेल के कानपुर स्थित निजी आवास पर 17 अप्रैल को हुए हंगामे के मामले को लेकर सपा नेताओं ने आक्रोश जताया है। सोमवार को गोसाईगंज विधानसभा के प्रभारी चौधरी लौटनराम निषाद के नेतृत्व में सपा नेताओं ने कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में नेताओं ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सांसद को वाई श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। नेताओं ने बताया कि सांसद के आवास पर दर्जनों लोगों ने गाली-गलौज की, घर पर लगे पोस्टर और बैनर फाड़ दिए। घटना के समय सांसद घर पर मौजूद नहीं थे, जबकि उनके परिवार के सदस्य आवास पर थे। सपा नेताओं ने इसे जनप्रतिनिधि का अपमान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात बताया है।
गाजीपुर के कटरिया गांव में एक नाबालिग की हत्या के बाद संवेदना व्यक्त करने पहुंचे सपा प्रतिनिधिमंडल पर भी पथराव किया गया। इसके बाद अराजकतत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय 48 नामजद और 200 अज्ञात सपा पदाधिकारियों पर गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई। नेताओं ने इन दोनों घटनाओं को सुनियोजित और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे तानाशाही का प्रमाण कहा है। प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और त्वरित जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में कृष्णकुमार पटेल, मयाराम वर्मा, विजय बहादुर वर्मा आदि मौजूद रहे।
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ज्ञापन में नेताओं ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सांसद को वाई श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। नेताओं ने बताया कि सांसद के आवास पर दर्जनों लोगों ने गाली-गलौज की, घर पर लगे पोस्टर और बैनर फाड़ दिए। घटना के समय सांसद घर पर मौजूद नहीं थे, जबकि उनके परिवार के सदस्य आवास पर थे। सपा नेताओं ने इसे जनप्रतिनिधि का अपमान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आघात बताया है।
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गाजीपुर के कटरिया गांव में एक नाबालिग की हत्या के बाद संवेदना व्यक्त करने पहुंचे सपा प्रतिनिधिमंडल पर भी पथराव किया गया। इसके बाद अराजकतत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय 48 नामजद और 200 अज्ञात सपा पदाधिकारियों पर गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई। नेताओं ने इन दोनों घटनाओं को सुनियोजित और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे तानाशाही का प्रमाण कहा है। प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और त्वरित जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में कृष्णकुमार पटेल, मयाराम वर्मा, विजय बहादुर वर्मा आदि मौजूद रहे।
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