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Ayodhya News: रामकथा संग्रहालय की 20 गैलरियों की पटकथा और तकनीक फाइनल
Sat, 17 Oct 2026 11:49 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sat, 17 Oct 2026 11:49 PM IST
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राम मंदिर।
अयोध्या। अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और राम जन्मभूमि के ऐतिहासिक साक्ष्यों को विश्वस्तरीय तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित करने की तैयारी तेज हो गई है। संग्रहालय की 20 गैलरियों की पटकथा और उनमें इस्तेमाल होने वाली तकनीक को अंतिम रूप दे दिया गया है। इनके निर्माण पर करीब 90 करोड़ रुपये खर्च होंगे। अगले सप्ताह टेंडर जारी करने की तैयारी है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद छह माह में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
शनिवार को राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने संग्रहालय में निर्माण और विकास कार्यों की समीक्षा की। बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि भी शामिल हुए। उन्हें संग्रहालय में चल रहे कार्यों का अवलोकन कराने के साथ प्रस्तावित योजनाओं की जानकारी दी गई।
संग्रहालय की गैलरियों में भगवान श्रीराम की यात्राओं, नदियों के किनारे स्थित विभिन्न स्थानों पर महापुरुषों से उनकी भेंट, वंशावली और रामायण से जुड़े विविध प्रसंगों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा, आधुनिक तकनीक के जरिये श्रद्धालुओं को राम मंदिर परिसर का अनूठा अनुभव कराने के लिए विशेष गैलरी तैयार की जाएगी। इसमें करीब 15 मिनट के इमर्सिव अनुभव के माध्यम से कुबेर टीला से परकोटे की परिक्रमा और रामलला के दर्शन का दृश्यात्मक अनुभव कराया जाएगा। इसके लिए थ्री-डी और सेवन-डी सहित आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होगा।
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उत्खनन के अवशेषों से सामने आएंगे ऐतिहासिक साक्ष्य
संग्रहालय में राम जन्मभूमि से जुड़े उत्खनन में प्राप्त दुर्लभ अवशेषों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। ये अवशेष फिलहाल अलग-अलग स्थानों पर रखे हैं। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के मुताबिक, इनमें न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत सामग्री, पुलिस और कमिश्नर के पास मौजूद अवशेष तथा ट्रस्ट के संरक्षण में रखी गई वस्तुएं शामिल हैं।
संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव कुमार सिंह ने इनका निरीक्षण कर प्रदर्शन योग्य वस्तुओं का चयन कर लिया है। चयनित सामग्री को संबंधित स्थानों से संग्रहालय लाने की अनुमति भी मिल चुकी है।
संकट मोचन गैलरी जल्द खोलने पर चर्चा
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से संग्रहालय में संकट मोचन नाम की सेवन-डी हनुमान गैलरी भी तैयार की गई है। इसमें आधुनिक तकनीक के माध्यम से हनुमान के पराक्रम की गाथा दिखाई जाएगी। पहले से निर्मित चार गैलरियों को श्रद्धालुओं के लिए जल्द खोलने पर भी चर्चा हुई। इन्हें खोलने का निर्णय स्वामी गोविंद देव गिरि की राय के आधार पर लिया जाएगा।
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शनिवार को राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने संग्रहालय में निर्माण और विकास कार्यों की समीक्षा की। बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि भी शामिल हुए। उन्हें संग्रहालय में चल रहे कार्यों का अवलोकन कराने के साथ प्रस्तावित योजनाओं की जानकारी दी गई।
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संग्रहालय की गैलरियों में भगवान श्रीराम की यात्राओं, नदियों के किनारे स्थित विभिन्न स्थानों पर महापुरुषों से उनकी भेंट, वंशावली और रामायण से जुड़े विविध प्रसंगों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा, आधुनिक तकनीक के जरिये श्रद्धालुओं को राम मंदिर परिसर का अनूठा अनुभव कराने के लिए विशेष गैलरी तैयार की जाएगी। इसमें करीब 15 मिनट के इमर्सिव अनुभव के माध्यम से कुबेर टीला से परकोटे की परिक्रमा और रामलला के दर्शन का दृश्यात्मक अनुभव कराया जाएगा। इसके लिए थ्री-डी और सेवन-डी सहित आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होगा।
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उत्खनन के अवशेषों से सामने आएंगे ऐतिहासिक साक्ष्य
संग्रहालय में राम जन्मभूमि से जुड़े उत्खनन में प्राप्त दुर्लभ अवशेषों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। ये अवशेष फिलहाल अलग-अलग स्थानों पर रखे हैं। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के मुताबिक, इनमें न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत सामग्री, पुलिस और कमिश्नर के पास मौजूद अवशेष तथा ट्रस्ट के संरक्षण में रखी गई वस्तुएं शामिल हैं।
संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव कुमार सिंह ने इनका निरीक्षण कर प्रदर्शन योग्य वस्तुओं का चयन कर लिया है। चयनित सामग्री को संबंधित स्थानों से संग्रहालय लाने की अनुमति भी मिल चुकी है।
संकट मोचन गैलरी जल्द खोलने पर चर्चा
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से संग्रहालय में संकट मोचन नाम की सेवन-डी हनुमान गैलरी भी तैयार की गई है। इसमें आधुनिक तकनीक के माध्यम से हनुमान के पराक्रम की गाथा दिखाई जाएगी। पहले से निर्मित चार गैलरियों को श्रद्धालुओं के लिए जल्द खोलने पर भी चर्चा हुई। इन्हें खोलने का निर्णय स्वामी गोविंद देव गिरि की राय के आधार पर लिया जाएगा।