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Ayodhya News: जन-जन के धन से बना रामलला का आशियाना

Mon, 17 Nov 2025 12:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 17 Nov 2025 12:00 AM IST
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Ramlala's home was built with public money.
राम मंदिर परिसर का विहंगम दृश्य। - फोटो : राम मंदिर परिसर का विहंगम दृश्य।
अयोध्या। राम मंदिर का वर्तमान स्वरूप किसी एक संस्था या क्षेत्र का नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत की आस्था, एकता और राष्ट्रीय चेतना का सामूहिक परिणाम है। समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी ने इस मंदिर को “भारत का मंदिर” बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई। कश्मीर से कन्याकुमारी और अंडमान-निकोबार से लेकर पश्चिमी सीमाओं तक, भारत के प्रत्येक कोने ने भव्य राम मंदिर निर्माण में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आह्वान पर 15 जनवरी 2022 से 27 फरवरी 2022 तक चले 45 दिवसीय निधि समर्पण अभियान ने स्वतंत्र भारत में जनसहयोग का नया अध्याय रचा। देशभर की बस्तियों, गांवों, नगरों और महानगरों में स्वयंसेवकों की टोली घर-घर पहुंची। हर वर्ग, हर आयु और हर भाषा के लोगों ने ‘मेरे राम के लिए मेरा योगदान’ की भावना से हाथ बढ़ाया। इस ऐतिहासिक अभियान में कुल 3,500 करोड़ रुपये की अभूतपूर्व धनराशि एकत्र की गई, जो किसी भी धार्मिक-सामाजिक परियोजना के लिए सर्वाधिक मानी जा रही है।
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यह अभियान इतना विशाल था कि कई राज्यों में लोग स्वयं आगे आकर निधि समर्पण केंद्रों तक पहुंचे। छोटे बच्चों ने अपनी गुल्लकें अर्पित कीं, श्रमिकों ने दिनभर की मजदूरी का हिस्सा दान किया और उद्योग जगत ने खुले मन से योगदान दिया। यह जनसहयोग भारत की सांस्कृतिक चेतना का असाधारण उदाहरण बन गया। विशेषज्ञ इसे स्वैच्छिक जनसहयोग के सबसे सफल मॉडल के रूप में देखते हैं, जो आने वाले समय में सामाजिक अभियानों के लिए प्रेरक सिद्ध हो सकता है।
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अखंड भारत की भावना का सजीव प्रतीक
राम मंदिर का निर्माण भारतीय समाज की सामूहिक शक्ति और श्रद्धा से संभव हुआ है। राम मंदिर आज अखंड भारत, समरस समाज और जनसहयोग की शक्ति का भव्य प्रतीक बनकर खड़ा है। जहां हर श्रद्धालु यह कह सकता है कि इस मंदिर में मेरा भी योगदान है। निधि समर्पण अभियान ने यह साबित किया था कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक परियोजना नहीं, बल्कि पूरे भारत का साझा संकल्प है। - चंपत राय, महासचिव, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट


5.37 लाख गांव के 12.73 करोड़ परिवारों से किया था संपर्क
निधि समर्पण अभियान में 10, 100 व 1000 रुपये के कूपन के जरिये लोगों से दान लिया गया। डिजिटल माध्यम से भी एक हजार करोड़ से अधिक का दान मिला था। देश के 49 प्रांतों के 1167 जिलों में अभियान चलाया गया। 5.37 लाख गांव के 12.73 करोड़ परिवारों से संपर्क किया गया। अभियान में 18.34 लाख पुरुष व 1.87 लाख महिला कार्यकर्ता सहभागी बने। अभियान के अंतर्गत 38,185 कार्यकर्ताओं के माध्यम से बैंकों में धन जमा कराया गया। पूरे देश में एक लाख 25 हजार टोलियों के माध्यम से धन संग्रहीत हुआ।

निधि समर्पण अभियान में मिला दान
- दस रुपये के कूपन से 30.99 करोड़
- सौ रुपये के कूपन से 372.48 करोड़
- एक हजार के कूपन से 225.46 करोड़
- रसीदों के जरिये 1625.04 करोड़
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