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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चुप्पी क्यों नहीं तोड़ रहे चंपत राय, इस्तीफे को लेकर सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस

Sun, 28 Jun 2026 07:31 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Sun, 28 Jun 2026 07:31 PM IST
सार

इस्तीफे को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। ट्रस्ट की डीड और पत्र के प्रारूप को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। वहीं, चंपत राय की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

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Ram Mandir offering theft: The question also arises... why isn't Champat Rai breaking his silence?
चंपत राय ने दिया इस्तीफा। - फोटो : amar ujala

विस्तार

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से चंपत राय के इस्तीफे के बाद अब पूरे घटनाक्रम पर नई बहस शुरू हो गई है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वर्ग लगातार यह दावा कर रहा है कि चंपत राय ने अब तक औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही ट्रस्ट की ओर से इस संबंध में कोई नया स्पष्टीकरण जारी किया गया है।

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सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं में सबसे अधिक सवाल उस पत्र को लेकर उठाए जा रहे हैं, जिसे इस्तीफे के रूप में प्रसारित किया गया। कुछ लोगों का कहना है कि पत्र में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास शब्द का प्रयोग किया गया है, जबकि फरवरी 2020 में ट्रस्ट के गठन के बाद से आधिकारिक दस्तावेजों और पत्राचार में तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट नाम का ही लगातार उपयोग होता रहा है। इसी आधार पर पत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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चर्चा का दूसरा आधार पत्र पर हस्ताक्षर को लेकर है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग तर्क दे रहे हैं कि यदि यह औपचारिक स्वीकृति वाला दस्तावेज है तो उस पर ट्रस्ट के अध्यक्ष या कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी के हस्ताक्षर अथवा विधिवत अनुमोदन की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए थी। हालांकि ट्रस्ट की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। इस बीच सभी की निगाहें अब चंपत राय पर टिकी हैं। चर्चा है कि वह जल्द ही मीडिया के सामने आकर पूरे घटनाक्रम पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।

संभावित अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी की भी चर्चा
इसी बीच ट्रस्ट की डीड को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। जानकारों का कहना है कि ट्रस्ट डीड में ट्रस्टी के पद छोड़ने, त्यागपत्र देने अथवा अन्य परिस्थितियों का उल्लेख है, लेकिन बहुमत के आधार पर किसी ट्रस्टी को पद से हटाने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। यही कारण है कि इस्तीफे और उसकी प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि पूरे घटनाक्रम ने संगठन के भीतर चल रही संभावित अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी की चर्चाओं को भी हवा दी है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

ट्रस्ट स्वतंत्र संस्था, अंतिम स्थिति आधिकारिक निर्णय से ही स्पष्ट होगी
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट केंद्र सरकार से गठित एक स्वतंत्र सार्वजनिक धार्मिक ट्रस्ट है। ट्रस्ट का संचालन उसकी डीड और आंतरिक नियमों के अनुसार होता है। ऐसे में किसी ट्रस्टी या पदाधिकारी के त्यागपत्र की वैधानिक स्थिति भी ट्रस्ट की निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही तय मानी जाएगी। यदि इस्तीफे को लेकर कोई विवाद या भ्रम की स्थिति है, तो उसका अंतिम स्पष्टीकरण भी ट्रस्ट की ओर से अधिकृत बयान या आगामी बैठक में लिए गए निर्णय के बाद ही सामने आएगा।

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