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Ayodhya News: गुरु के चरणों में झुके पूर्व सांसद
Wed, 14 Oct 2026 12:52 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 14 Oct 2026 12:52 AM IST
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गुरु को चरण स्पर्श करते पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह।
अयोध्या। साकेत महाविद्यालय में मंगलवार को आयोजित सेवानिवृत्त शिक्षक सम्मान समारोह में गुरु-शिष्य परंपरा की भावुक झलक देखने को मिली। अवध विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ (आक्टा) की ओर से आयोजित समारोह में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह अपने गुरु प्रो. एसएन त्रिपाठी को सम्मानित करने के लिए मंच से नीचे उतरे और उनके चरणों में माला अर्पित की। इस दौरान वह भावुक हो गए।
बृजभूषण शरण सिंह ने अपने पूर्व शिक्षकों डॉ. चट्टान सिंह और डॉ. एचबीवी सिंह को भी याद किया। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व और शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलावों पर चिंता जताई। नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने आशीर्वचन दिया। विशिष्ट अतिथि फुफुक्टा के महामंत्री प्रो. प्रदीप कुमार सिंह ने शिक्षकों से शिक्षा और शिक्षण हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. दानपति तिवारी ने बताया कि वर्ष 1951 में स्थापित साकेत महाविद्यालय में इस सत्र करीब 4500 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। विश्वविद्यालय से उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान प्राप्त डॉ. अवधेश प्रताप सिंह को भी सम्मानित किया गया।
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चार दिवंगत शिक्षकों के परिजनों को पांच-पांच लाख की सहायता
आक्टा के प्रयास से चार दिवंगत शिक्षकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की अनुकंपा राशि दी गई। प्रो. सत्यप्रकाश त्रिपाठी, प्रो. बीपी सिंह, प्रो. जेबी पाल और प्रो. राजीव अग्रवाल समेत सेवानिवृत्त शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
आक्टा अध्यक्ष डॉ. जन्मेजय तिवारी ने आभार जताया। संचालन प्रो. आशुतोष सिंह ने किया। इस अवसर पर आक्टा महामंत्री प्रो. अमूल्य कुमार सिंह, मनूचा महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. मंजूषा मिश्रा, डॉ. धर्मपाल सिंह, प्रो. कविता सिंह, प्रो. अंजनी कुमार सिंह, प्रो. शक्ति सिंह, साकेत महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. आशीष प्रताप सिंह, महामंत्री डॉ. संतलाल और वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. रमेश प्रताप सिंह समेत अनेक शिक्षक मौजूद रहे।
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बृजभूषण शरण सिंह ने अपने पूर्व शिक्षकों डॉ. चट्टान सिंह और डॉ. एचबीवी सिंह को भी याद किया। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व और शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलावों पर चिंता जताई। नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने आशीर्वचन दिया। विशिष्ट अतिथि फुफुक्टा के महामंत्री प्रो. प्रदीप कुमार सिंह ने शिक्षकों से शिक्षा और शिक्षण हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया।
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महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. दानपति तिवारी ने बताया कि वर्ष 1951 में स्थापित साकेत महाविद्यालय में इस सत्र करीब 4500 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। विश्वविद्यालय से उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान प्राप्त डॉ. अवधेश प्रताप सिंह को भी सम्मानित किया गया।
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चार दिवंगत शिक्षकों के परिजनों को पांच-पांच लाख की सहायता
आक्टा के प्रयास से चार दिवंगत शिक्षकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की अनुकंपा राशि दी गई। प्रो. सत्यप्रकाश त्रिपाठी, प्रो. बीपी सिंह, प्रो. जेबी पाल और प्रो. राजीव अग्रवाल समेत सेवानिवृत्त शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
आक्टा अध्यक्ष डॉ. जन्मेजय तिवारी ने आभार जताया। संचालन प्रो. आशुतोष सिंह ने किया। इस अवसर पर आक्टा महामंत्री प्रो. अमूल्य कुमार सिंह, मनूचा महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. मंजूषा मिश्रा, डॉ. धर्मपाल सिंह, प्रो. कविता सिंह, प्रो. अंजनी कुमार सिंह, प्रो. शक्ति सिंह, साकेत महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. आशीष प्रताप सिंह, महामंत्री डॉ. संतलाल और वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. रमेश प्रताप सिंह समेत अनेक शिक्षक मौजूद रहे।