{"_id":"69ff7123fb2b5314060fc0c6","slug":"bengal-cannot-be-understood-solely-through-a-change-of-power-ayodhya-news-c-97-1-ayo1002-149080-2026-05-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: बंगाल को केवल सत्ता परिवर्तन से नहीं समझा जा सकता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: बंगाल को केवल सत्ता परिवर्तन से नहीं समझा जा सकता
Sat, 09 May 2026 11:08 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sat, 09 May 2026 11:08 PM IST
विज्ञापन
अयोध्या। भोपाल में आयोजित प्रणाम उदंत मार्तंड के तीसरे सत्र उत्तिष्ठ भारत में रामनगरी के प्रख्यात संत मिथिलेश नंदिनी शरण ने पश्चिम बंगाल के हालिया राजनीतिक परिदृश्य और भारतीय पत्रकारिता की भूमिका पर गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बंगाल को केवल चुनावी परिणामों और सत्ता परिवर्तन के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि बंगाल केवल राजनीति नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र है।
स्वामीजी ने कहा कि चैतन्य महाप्रभु, रवींद्रनाथ टैगोर और वैष्णव परंपरा जैसी समृद्ध विरासत वाले बंगाल की पहचान उसकी संस्कृति, समाज और आध्यात्मिक चेतना से है। पत्रकारिता का दायित्व केवल यह बताना नहीं कि कौन जीता और कौन हारा, बल्कि यह देखना भी है कि समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों और मूल्यों के साथ किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या वह अब भी “हिंदुस्तानियों के हित” को केंद्र में रख पा रही है।
स्वामीजी ने कहा कि समाचार समाज के अंधकार को दूर करने वाला सूर्योदय है। यदि समाज तक सही और संतुलित सूचना नहीं पहुंचेगी तो लोकतंत्र और सामाजिक चेतना दोनों कमजोर होंगे। मीडिया को राजनीतिक विमर्श से आगे बढ़कर समाज, संस्कृति और राष्ट्र की दीर्घकालिक चिंताओं पर भी ध्यान देना होगा।
विज्ञापन
इनसेट
चर्चा के केंद्र में रहे युवाओं से जुड़े विषय
कार्यक्रम में युवाओं से जुड़े विषय भी चर्चा के केंद्र में रहे। विद्यार्थियों ने संवादहीनता, पारिवारिक दूरी, सोशल मीडिया के प्रभाव और जीवन में सही मार्गदर्शन की कमी को लेकर सवाल पूछे। इस पर स्वामीजी ने कहा कि आज की पीढ़ी को केवल कॅरिअर नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों की शिक्षा भी चाहिए। परिवार, गुरु और समाज के साथ संवाद टूटना कई सामाजिक समस्याओं का कारण बन रहा है। माय बॉडी, माय चॉइस जैसे नारों पर कहा कि अधिकारों के साथ कर्तव्य और सामाजिक उत्तरदायित्व भी जरूरी है।
विज्ञापन
स्वामीजी ने कहा कि चैतन्य महाप्रभु, रवींद्रनाथ टैगोर और वैष्णव परंपरा जैसी समृद्ध विरासत वाले बंगाल की पहचान उसकी संस्कृति, समाज और आध्यात्मिक चेतना से है। पत्रकारिता का दायित्व केवल यह बताना नहीं कि कौन जीता और कौन हारा, बल्कि यह देखना भी है कि समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों और मूल्यों के साथ किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या वह अब भी “हिंदुस्तानियों के हित” को केंद्र में रख पा रही है।
विज्ञापन
स्वामीजी ने कहा कि समाचार समाज के अंधकार को दूर करने वाला सूर्योदय है। यदि समाज तक सही और संतुलित सूचना नहीं पहुंचेगी तो लोकतंत्र और सामाजिक चेतना दोनों कमजोर होंगे। मीडिया को राजनीतिक विमर्श से आगे बढ़कर समाज, संस्कृति और राष्ट्र की दीर्घकालिक चिंताओं पर भी ध्यान देना होगा।
विज्ञापन
इनसेट
चर्चा के केंद्र में रहे युवाओं से जुड़े विषय
कार्यक्रम में युवाओं से जुड़े विषय भी चर्चा के केंद्र में रहे। विद्यार्थियों ने संवादहीनता, पारिवारिक दूरी, सोशल मीडिया के प्रभाव और जीवन में सही मार्गदर्शन की कमी को लेकर सवाल पूछे। इस पर स्वामीजी ने कहा कि आज की पीढ़ी को केवल कॅरिअर नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों की शिक्षा भी चाहिए। परिवार, गुरु और समाज के साथ संवाद टूटना कई सामाजिक समस्याओं का कारण बन रहा है। माय बॉडी, माय चॉइस जैसे नारों पर कहा कि अधिकारों के साथ कर्तव्य और सामाजिक उत्तरदायित्व भी जरूरी है।