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Ayodhya News: केले का रेशा बना सहारा, हौसले ने बदली किस्मत
Sun, 25 Jan 2026 09:27 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 25 Jan 2026 09:27 PM IST
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26- उषा मौर्य
अयोध्या। जब हौसले की उड़ान ऊंची हो तो विपदाओं के पहाड़ भी रास्ता दे देते हैं। अमानीगंज के पूरा बली (खंड़ासा) की रहने वाली उषा मौर्य (27) उन तमाम महिलाओं के लिए एक मिसाल बनकर उभरी हैं, जो कठिन परिस्थितियों के आगे घुटने टेक देती हैं। दो साल पहले पति को खोने वाली उषा समाज की बेरुखी और ससुराल की प्रताड़ना का सामना करते हुए अपनी मेहनत से खुद को आत्मनिर्भर बनाया।
पति के जाने के बाद उषा को ससुराल पक्ष से लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके चलते वह पिता के घर आकर रहने लगीं। उषा ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की है। आजीविका का कोई साधन न होने के कारण उषा को अपना भविष्य धुंधला नजर आ रहा था। ऐसे में कुमारगंज स्थित ओंकार सेवा संस्थान उनके जीवन में रोशनी बनकर आया।
संस्थान से उन्होंने केले के रेशे और जूट उत्पादों का 20 दिवसीय प्रशिक्षण लेकर केले के रेशे और जूट का उपयोग कर विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार करने लगी। वह इस जूट के आकर्षक बैग और केले के रेशे से पूजा आसनी, चटाई, स्लीपर, लेडीज पर्स, जूते-चप्पल सहित घरेलू उपयोग के दर्जनों उत्पाद तैयार कर रही हैं। अपने हुनर के दम पर वह प्रतिमाह लगभग सात हजार रुपये की कमाई कर रही हैं।
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उषा ने बताया कि पहले उनके पास कोई स्थायी रोजगार नहीं था, लेकिन केला रेशा से बने उत्पादों ने उन्हें न सिर्फ रोजगार दिया बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीने का अवसर भी प्रदान किया। धीरे-धीरे उनके बनाए उत्पादों की मांग स्थानीय बाजारों में बढ़ रही है। उषा मौर्य आज उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में खुद को कमजोर समझ लेती हैं। कहा कि यदि सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिले तो महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होकर न केवल अपना बल्कि अपने परिवार का भविष्य भी संवार सकती हैं।
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पति के जाने के बाद उषा को ससुराल पक्ष से लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके चलते वह पिता के घर आकर रहने लगीं। उषा ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की है। आजीविका का कोई साधन न होने के कारण उषा को अपना भविष्य धुंधला नजर आ रहा था। ऐसे में कुमारगंज स्थित ओंकार सेवा संस्थान उनके जीवन में रोशनी बनकर आया।
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संस्थान से उन्होंने केले के रेशे और जूट उत्पादों का 20 दिवसीय प्रशिक्षण लेकर केले के रेशे और जूट का उपयोग कर विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार करने लगी। वह इस जूट के आकर्षक बैग और केले के रेशे से पूजा आसनी, चटाई, स्लीपर, लेडीज पर्स, जूते-चप्पल सहित घरेलू उपयोग के दर्जनों उत्पाद तैयार कर रही हैं। अपने हुनर के दम पर वह प्रतिमाह लगभग सात हजार रुपये की कमाई कर रही हैं।
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उषा ने बताया कि पहले उनके पास कोई स्थायी रोजगार नहीं था, लेकिन केला रेशा से बने उत्पादों ने उन्हें न सिर्फ रोजगार दिया बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीने का अवसर भी प्रदान किया। धीरे-धीरे उनके बनाए उत्पादों की मांग स्थानीय बाजारों में बढ़ रही है। उषा मौर्य आज उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में खुद को कमजोर समझ लेती हैं। कहा कि यदि सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिले तो महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होकर न केवल अपना बल्कि अपने परिवार का भविष्य भी संवार सकती हैं।