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Ayodhya News: ध्वजारोहण से पहले साझा किया अयोध्या सिटी प्रोजेक्ट मास्टर प्लान
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अयोध्या। राम मंदिर के ध्वजारोहण की पूर्व संध्या पर सीपी कुकरेजा आर्कीटेक्ट्स (सीपीकेए) ने अयोध्या विजन 2047 मास्टर प्लान साझा किया है। यह परिवर्तनकारी रोडमैप प्राचीन नगरी अयोध्या को भविष्य के अनुरूप सतत् और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध वैश्विक गंतव्य के रूप में फिर से कल्पित करता है। इसे प्रसिद्ध आर्किटेक्ट और अर्बन प्लानर व सीपीकेए के मैनेजिंग प्रिंसिपल दीक्षु कुकरेजा के नेतृत्व में तैयार किया गया है। यह मास्टर प्लान अयोध्या की दिव्य विरासत को आधुनिक स्मार्ट सिटी की आकांक्षाओं के साथ जोड़ता है।
अयोध्या कई मायनों में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से बहुत अहमियत रखती है। यह शहर एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है, जो अपने पवित्र अतीत और भविष्य की उम्मीदों को आत्मसात कर रहा है। शहर में वार्षिक तीर्थ यात्रियों की आमद में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। इसके 2047 तक दस गुना बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में नागरिकों और पर्यटकों का अनुपात 1:10 होने का अविश्वसनीय अनुमान लगाया जा रहा है। यह उल्लेखनीय वृद्धि आध्यात्मिक पर्यटन में अयोध्या की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।
विजन अयोध्या-2047 रामनगरी और रामराज के आदर्शों को आधुनिक शासन, सतत् विकास व स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ जोड़ने का प्रयास है। राजमार्गों का विस्तार गतिशीलता बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। दो लेन वाली सड़कों को चार और छह लेन तक बढ़ाया जा रहा है। राम मंदिर तक जाने वाले 13 किलोमीटर के मार्ग का निर्माण व हनुमानगढ़ी रोड और सुग्रीव किला रोड जैसे पैदल मार्गों का चौड़ीकरण करना शामिल है।
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अयोध्या में प्रवेश के लिए छह भव्य राम द्वार प्रस्तावित हैं। इन द्वारों में पर्यटक आवास, मल्टी-लेवल पार्किंग और नेट-जीरो इलेक्ट्रिक वाहनों तक आसान एक्सेस शामिल होगी। पारंपरिक पत्थर की नक्काशी से सुसज्जित ये द्वार सभी वर्गों के आगंतुकों का सम्मान पूर्वक स्वागत के लिए हैं। अयोध्या अपने 108 ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण कुंडों या छोटी झीलों के लिए जाना जाता है। इनमें भरत कुंड और सूर्य कुंड शामिल हैं। इनके जीर्णोद्धार का बड़ा काम चल रहा है। जमथरा में रामायण स्पिरिचुअल फॉरेस्ट पीपीपी मॉडल के तहत विकसित हो रहा है।
अयोध्या के भविष्य को आकार देने वाली इन परियोजनाओं पर चल रहा है काम
रामायण स्पिरिचुअल फॉरेस्ट, शहर में आने-जाने के लिए राम द्वार, सरयू नदी पुनर्स्थापन और नदी किनारे का विकास, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एयरपोर्ट और बस स्टैंड ढांचे को अपग्रेड करना, वास्तु सिद्धांतों पर आधारित सड़क विस्तार, नई अयोध्या ग्रीनफील्ड टाउनशिप, सतत् और स्मार्ट सिटी में रूपांतरण, इंटरनेशनल एयरपोर्ट, उन्नत रेलवे स्टेशन, आधुनिक बस टर्मिनल, व्यापक रिंग रोड सिस्टम।
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अयोध्या कई मायनों में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से बहुत अहमियत रखती है। यह शहर एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है, जो अपने पवित्र अतीत और भविष्य की उम्मीदों को आत्मसात कर रहा है। शहर में वार्षिक तीर्थ यात्रियों की आमद में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। इसके 2047 तक दस गुना बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में नागरिकों और पर्यटकों का अनुपात 1:10 होने का अविश्वसनीय अनुमान लगाया जा रहा है। यह उल्लेखनीय वृद्धि आध्यात्मिक पर्यटन में अयोध्या की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है।
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अयोध्या में प्रवेश के लिए छह भव्य राम द्वार प्रस्तावित हैं। इन द्वारों में पर्यटक आवास, मल्टी-लेवल पार्किंग और नेट-जीरो इलेक्ट्रिक वाहनों तक आसान एक्सेस शामिल होगी। पारंपरिक पत्थर की नक्काशी से सुसज्जित ये द्वार सभी वर्गों के आगंतुकों का सम्मान पूर्वक स्वागत के लिए हैं। अयोध्या अपने 108 ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण कुंडों या छोटी झीलों के लिए जाना जाता है। इनमें भरत कुंड और सूर्य कुंड शामिल हैं। इनके जीर्णोद्धार का बड़ा काम चल रहा है। जमथरा में रामायण स्पिरिचुअल फॉरेस्ट पीपीपी मॉडल के तहत विकसित हो रहा है।
अयोध्या के भविष्य को आकार देने वाली इन परियोजनाओं पर चल रहा है काम
रामायण स्पिरिचुअल फॉरेस्ट, शहर में आने-जाने के लिए राम द्वार, सरयू नदी पुनर्स्थापन और नदी किनारे का विकास, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एयरपोर्ट और बस स्टैंड ढांचे को अपग्रेड करना, वास्तु सिद्धांतों पर आधारित सड़क विस्तार, नई अयोध्या ग्रीनफील्ड टाउनशिप, सतत् और स्मार्ट सिटी में रूपांतरण, इंटरनेशनल एयरपोर्ट, उन्नत रेलवे स्टेशन, आधुनिक बस टर्मिनल, व्यापक रिंग रोड सिस्टम।