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Ayodhya News: रथयात्रा में जमकर उड़ा अबीर-गुलाल, झूमे श्रद्धालु
Sun, 15 Feb 2026 09:20 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 15 Feb 2026 09:20 PM IST
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32- ब्रह्मोत्सव के अवसर पर सुग्रीव किला से निकली रथयात्रा में अबीर-गुलाल उड़ाते धर्माचार्य व श्
अयोध्या। रामनगरी में इन दिनों भक्ति का रंग कुछ ऐसा चढ़ा है कि हर गली, हर चौक और हर द्वार पर रामनाम की मधुर ध्वनि सुनाई दे रही है। सुग्रीव किला में भगवान राजराजेश्वर सीताराम के ब्रह्मोत्सव की धूम ने पूरे वातावरण को अलौकिक आभा से भर दिया है। मंदिर परिसर से रोजाना रथ यात्रा निकाली जा रही है।
इसी क्रम में महाशिवरात्रि के पर्व पर भव्य रथ राम मंदिर के प्रवेश द्वार से निकली तो श्रद्धालु आनंदित हो उठे। रथ पर अलंकृत सिंहासन पर विराजमान भगवान राजराजेश्वर सीताराम के दर्शन को भक्तों की लंबी कतारें उमड़ पड़ी। इस अवसर पर संत-धर्माचार्यों ने जमकर अबीर-गुलाल उड़ाया। राम मंदिर के प्रवेश द्वार से टेढीबाजार, कटरा, अशर्फी भवन से रामपथ होते हुए सुग्रीव किला पहुंचकर रथ यात्रा समाप्त हुई। पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालु नाचते-गाते रहे, अबीर-गुलाल उड़ाते रहे। इस दृश्य से होली से पहले ही पूरे माहौल को रंगमय कर दिया। रथ पर सुसज्जित प्रभु की मनोहारी झांकी, आगे-आगे शंखनाद और पीछे भजन-कीर्तन की स्वर लहरियां, यह दृश्य आस्था की अनुपम तस्वीर प्रस्तुत कर रहा था। शोभायात्रा मार्ग पर जगह-जगह पुष्पवर्षा की गई, महिलाओं ने मंगलगीत गाए। मंदिर के महंत जगद्गुरु विश्वेश प्रपन्नाचार्य ने ब्रह्मोत्सव की महिमा बताते हुए कहा कि यह पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, समर्पण और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। रथ यात्रा में स्वामी पद्नाभम, महंत उद्धव शरण सहित अन्य शामिल रहे।
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इसी क्रम में महाशिवरात्रि के पर्व पर भव्य रथ राम मंदिर के प्रवेश द्वार से निकली तो श्रद्धालु आनंदित हो उठे। रथ पर अलंकृत सिंहासन पर विराजमान भगवान राजराजेश्वर सीताराम के दर्शन को भक्तों की लंबी कतारें उमड़ पड़ी। इस अवसर पर संत-धर्माचार्यों ने जमकर अबीर-गुलाल उड़ाया। राम मंदिर के प्रवेश द्वार से टेढीबाजार, कटरा, अशर्फी भवन से रामपथ होते हुए सुग्रीव किला पहुंचकर रथ यात्रा समाप्त हुई। पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालु नाचते-गाते रहे, अबीर-गुलाल उड़ाते रहे। इस दृश्य से होली से पहले ही पूरे माहौल को रंगमय कर दिया। रथ पर सुसज्जित प्रभु की मनोहारी झांकी, आगे-आगे शंखनाद और पीछे भजन-कीर्तन की स्वर लहरियां, यह दृश्य आस्था की अनुपम तस्वीर प्रस्तुत कर रहा था। शोभायात्रा मार्ग पर जगह-जगह पुष्पवर्षा की गई, महिलाओं ने मंगलगीत गाए। मंदिर के महंत जगद्गुरु विश्वेश प्रपन्नाचार्य ने ब्रह्मोत्सव की महिमा बताते हुए कहा कि यह पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, समर्पण और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। रथ यात्रा में स्वामी पद्नाभम, महंत उद्धव शरण सहित अन्य शामिल रहे।
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