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Ayodhya News: बालापुर के किसान ने एक एकड़ में बनाई प्राकृतिक वाटिका
Wed, 14 Oct 2026 12:53 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 14 Oct 2026 12:53 AM IST
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तारुन। ग्राम बालापुर के एक किसान ने एक एकड़ जमीन को प्राकृतिक वाटिका के रूप में विकसित किया है। श्यामा देवी प्राकृतिक फार्म में सहफसली पद्धति से कई फसलों की खेती की जा रही है। यहां हल्दी की पांच उन्नत किस्मों के साथ ज्वार, बाजरा और कई प्रकार के फलदार पौधे भी लहलहा रहे हैं।
खेत में हल्दी की काली, एलाडाउन, पीताम्बर, नरेंद्र-1 और नरेंद्र-2 किस्में लगाई गई हैं। इनके बीच आम, अमरूद, बेर, जामुन, नींबू और पपीते के पौधे भी हैं। आधा एकड़ में विशेष रूप से श्रीअन्न के तहत ज्वार-बाजरा की खेती की जा रही है। किसान के अनुसार, पूरी खेती प्राकृतिक तरीके से होती है। इसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
किसान अपना जैविक इनपुट संसाधन केंद्र भी चलाते हैं, जहां गोबर और गोमूत्र से खाद तैयार की जाती है। फार्म से रोजाना 50 किलो से अधिक अमरूद मंडी में बेचा जा रहा है। किसान की पत्नी श्यामा देवी भी मजदूरों के साथ खेती के काम में हाथ बंटाती हैं।
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इस प्राकृतिक खेती मॉडल के लिए किसान को पिछले वर्ष केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया था। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज से भी उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं। किसान का कहना है कि उनका उद्देश्य खुद शुद्ध भोजन करना और दूसरों को भी शुद्ध भोजन उपलब्ध कराना है।
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खेत में हल्दी की काली, एलाडाउन, पीताम्बर, नरेंद्र-1 और नरेंद्र-2 किस्में लगाई गई हैं। इनके बीच आम, अमरूद, बेर, जामुन, नींबू और पपीते के पौधे भी हैं। आधा एकड़ में विशेष रूप से श्रीअन्न के तहत ज्वार-बाजरा की खेती की जा रही है। किसान के अनुसार, पूरी खेती प्राकृतिक तरीके से होती है। इसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
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किसान अपना जैविक इनपुट संसाधन केंद्र भी चलाते हैं, जहां गोबर और गोमूत्र से खाद तैयार की जाती है। फार्म से रोजाना 50 किलो से अधिक अमरूद मंडी में बेचा जा रहा है। किसान की पत्नी श्यामा देवी भी मजदूरों के साथ खेती के काम में हाथ बंटाती हैं।
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इस प्राकृतिक खेती मॉडल के लिए किसान को पिछले वर्ष केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया था। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज से भी उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं। किसान का कहना है कि उनका उद्देश्य खुद शुद्ध भोजन करना और दूसरों को भी शुद्ध भोजन उपलब्ध कराना है।