{"_id":"60e5a96b8ebc3e45c4608d76","slug":"aligarh1625663851","type":"story","status":"publish","title_hn":"1982 में एएमयू कोर्ट के सदस्य चुने गए थे दिलीप कुमार \n\nकुलपति ने कहा निधन की खबर सुनकर मैं स्तब्ध हूं","category":{"title":"Local","title_hn":"लोकल","slug":"local"}}
1982 में एएमयू कोर्ट के सदस्य चुने गए थे दिलीप कुमार कुलपति ने कहा निधन की खबर सुनकर मैं स्तब्ध हूं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने कहा कि दिलीप कुमार के निधन की खबर सुनकर मैं स्तब्ध हूं।
विज्ञापन
कुलपति ने कहा कि एएमयू ने उन्हें 1982 में कोर्ट का सदस्य चुना। कला और सिनेमा के लिए उनकी लंबी सेवा के लिए 2002 में उन्हें डीलिट की मानद उपाधि से सम्मानित किया। उनका पांच दशक से अधिक का करियर कई मायनों में आदर्श और मूल्यवान है।
प्रोफेसर मंसूर ने कहा कि भारतीय सिनेमा को आकार देने और अभिनय की कला को आने वाली पीढ़ियों के लिए यादगार बनाने के लिए दिलीप कुमार को हमेशा याद किया जाएगा।
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मेघनाद देसाई ने अपनी पुस्तक नेहरू के हीरो दिलीप कुमार में अपनी फिल्मों और नए स्वतंत्र भारत की मिश्रित अर्थव्यवस्था की तुलना की है।
विज्ञापन
प्रोफेसर मंसूर ने कहा कि दिलीप साहब एक परोपकारी व्यक्ति थे, जिनका व्यक्तित्व उनके स्क्रीन व्यक्तित्व से काफी ऊंचा था। दिलीप कुमार की अभिनय शैली दशकों से उपयुक्त और लोकप्रिय रही है और उन्होंने आठ फिल्म फेयर पुरस्कार जीते हैं। उनके भावनात्मक अभिनय ने उन्हें ट्रेजेडी किंग का खिताब भी दिलाया।
उन्हें कला और सिनेमा के लिए देश के सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया था। इसके अलावा दिलीप कुमार को उनकी सेवाओं के लिए पद्म भूषण से भी नवाजा गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन