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Hindi News ›   Sports ›   Weightlifting: Campaign to find new Meera will start from UP, children of eight to 13 years will participate

Weightlifting: यूपी से शुरू होगा नई मीरा को ढूंढने का अभियान, आठ से 13 साल के बच्चे होंगे शामिल

Sun, 24 Dec 2023 10:45 PM IST
शक्तिराज सिंह अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शक्तिराज सिंह Updated Sun, 24 Dec 2023 10:45 PM IST
सार

विजय के मुताबिक कई विदेशी विशेषज्ञों से बातचीत के बाद आठ से 13 साल के बच्चों को तलाशने का अभियान शुरू करने का फैसला भारोत्तोलन संघ ने लिया। 12 से 14 जनवरी को मोदीनगर में इसकी शुरूआत की जाएगी।

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Weightlifting: Campaign to find new Meera will start from UP, children of eight to 13 years will participate
मीराबाई चानू - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

देश को नई मीराबाई चानू देने के लिए भारतीय भारोत्तोलन संघ और साई मिलकर पहली बार एक अनोखा अभियान चलाने जा रहे हैं। दोनों मिलकर आठ से 13 साल के बच्चों का प्रतिभा तलाशो अभियान शुरू करने जा रहे हैं, जिसकी शुरुआत यूपी के मोदीनगर से हो रही है। इस अभियान के तहत न तो भार उठाना पड़ेगा और न ही कंपटीशन के लिए जूझना होगा। बच्चों की फिटनेस और उनकी शारीरिक बनावट, ढांचा परखा जाएगा और चयनित बच्चों को साई सेंटर में 2032 और 2036 के ओलंपिक के लिए तैयार किया जाएगा। यह प्रतिभा तलाशो अभियान मीराबाई के कोच और द्रोणाचार्य अवॉर्डी प्रशिक्षक विजय शर्मा की अगुवाई में चलाया जाएगा।
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स्कूल, ग्राम प्रधान, सांसद तक जुड़ेंगे
विजय के मुताबिक कई विदेशी विशेषज्ञों से बातचीत के बाद आठ से 13 साल के बच्चों को तलाशने का अभियान शुरू करने का फैसला भारोत्तोलन संघ ने लिया। 12 से 14 जनवरी को मोदीनगर में इसकी शुरूआत की जाएगी। इसके बाद इसे यूपी के पूर्वांचल, पश्चिम यूपी में छेड़ा जाएगा। इसके बाद इसे मणिपुर, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में चलाया जाएगा। इस अभियान में स्कूलों, ग्राम प्रधानों से लेकर सांसदों और विधायकों को भी जोड़ा गया है। ये सभी प्रतिभा ढूंढने में मदद करेंगे और इन्हें अभियान तक लेकर आएंगे।
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शुरुआत में डंडे से कराया जाएगा अभ्यास
बच्चों के चयन के बाद उन्हें साई की ओर से टे्रनिंग सेंटर में रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें बांस के डंडे से अभ्यास कराकर उन्हें तकनीकि रूप से दक्ष किया जाएगा। विजय बताते हैं कि इस दौरान अपनी गई तकनीकि जीवन भर नहीं बदलती है। 10 वर्ष से अधिक उम्र हो जाने के बाद बच्चों को थोड़ा-थोड़ा भार उठाने के लिए दिया जाएगा। यह अभियान लड़के और लड़कियों दोनों के लिए चलाया जा रहा है।
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प्रशिक्षकों की समिति बनी
विजय के मुताबिक संघ और साई ने इस अभियान के लिए प्रशिक्षक अलकेश बरुआ, एल अभिलाष और सुखमेंद्र चौधरी की एक समिति भी बनाई है। वह खुद इस अभियान से गंभीरता से जुड़ेंगे।
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