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सानिया ने ऐतिहासिक जीत 'भारत' को की समर्पित
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 28 Oct 2014 03:23 PM IST
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सानिया मिर्जा ने रविवार को महिला टेनिस जगत में ऐतिहासिक जीत हासिल करने के बाद इस जीत को देश को समर्पित किया है।
सानिया पहली बार डब्ल्यूटीए फाइनल्स में खेलने उतरी थी और अपनी जोड़ीदार जिम्बाब्वे की कारा ब्लैक के साथ कोर्ट पर उतरते हुए खिताब भी जीत लिया। खिताब जीतने के बाद सानिया सोमवार को हैदराबाद पहुंची तो उनका जोरदार स्वागत किया गया।
करियर की सबसे बड़ी जीत हासिल करने के बाद सानिया ने इस खिताब को देश को समर्पित किया। वह टीओआई से बातचीत के दौरान बेहद भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, "यह खिताब मेरे देश भारत के लिए है।"
हालांकि इस खिताबी जीत में सानिया की जोड़ीदार रही कारा ब्लैक अब भारतीय खिलाड़ी के साथ कोर्ट पर नहीं दिखेगी। दोनों का एक साथ यह आखिरी टूर्नामेंट था। फाइनल में इस जोड़ी ने चीनी ताइपे की सु-वेई-सेश और झुई पेंग को सीधे सेटों में हराया था।
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सानिया अब अगले सत्र से इसी जोड़ी की सु-वेई-सेश के साथ खेलने का फैसला लिया है।
देश की सबसे सफल टेनिस खिलाड़ी बनने के सफर में सानिया की मां नसिमा का भी अहम योगदान रहा है। जब से सानिया ने टेनिस खेलना शुरू किया उसने अपनी मां से हमेशा समर्थन पाया है। साथ ही उन्होंने अपने नए प्रदेश तेलंगाना को भी धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा अपने परिवार, खासकर अपने माता-पिता से जबर्दस्त समर्थन पाया है। मेरी मां (नसिमा) जो यहां मेरे साथ हैं, मेरे लिए काफी लकी साबित हुई हैं। मेरा राज्य तेलंगाना का सहयोग हमेशा मिला है। कुल मिलाकर मेरे लिए इस समय भावुक होने के बहुत से कारण हैं।"
सानिया पिछले 40 सालों में सत्र के अंत में होने वाले टेनिस के सबसे बड़े टूर्नामेंट को जीतने वाली देश की पहली खिलाड़ी हैं। इससे पहले विजय अमृतराज ने 1977 में खेले गए एटीपी फाइनल्स में पुरुष डबल्स का खिताब जीता था। विजय के जोड़ीदार थे अमेरिका के डिक स्टॉकटोन।
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सानिया पहली बार डब्ल्यूटीए फाइनल्स में खेलने उतरी थी और अपनी जोड़ीदार जिम्बाब्वे की कारा ब्लैक के साथ कोर्ट पर उतरते हुए खिताब भी जीत लिया। खिताब जीतने के बाद सानिया सोमवार को हैदराबाद पहुंची तो उनका जोरदार स्वागत किया गया।
करियर की सबसे बड़ी जीत हासिल करने के बाद सानिया ने इस खिताब को देश को समर्पित किया। वह टीओआई से बातचीत के दौरान बेहद भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, "यह खिताब मेरे देश भारत के लिए है।"
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हालांकि इस खिताबी जीत में सानिया की जोड़ीदार रही कारा ब्लैक अब भारतीय खिलाड़ी के साथ कोर्ट पर नहीं दिखेगी। दोनों का एक साथ यह आखिरी टूर्नामेंट था। फाइनल में इस जोड़ी ने चीनी ताइपे की सु-वेई-सेश और झुई पेंग को सीधे सेटों में हराया था।
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सानिया अब अगले सत्र से इसी जोड़ी की सु-वेई-सेश के साथ खेलने का फैसला लिया है।
देश की सबसे सफल टेनिस खिलाड़ी बनने के सफर में सानिया की मां नसिमा का भी अहम योगदान रहा है। जब से सानिया ने टेनिस खेलना शुरू किया उसने अपनी मां से हमेशा समर्थन पाया है। साथ ही उन्होंने अपने नए प्रदेश तेलंगाना को भी धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा अपने परिवार, खासकर अपने माता-पिता से जबर्दस्त समर्थन पाया है। मेरी मां (नसिमा) जो यहां मेरे साथ हैं, मेरे लिए काफी लकी साबित हुई हैं। मेरा राज्य तेलंगाना का सहयोग हमेशा मिला है। कुल मिलाकर मेरे लिए इस समय भावुक होने के बहुत से कारण हैं।"
सानिया पिछले 40 सालों में सत्र के अंत में होने वाले टेनिस के सबसे बड़े टूर्नामेंट को जीतने वाली देश की पहली खिलाड़ी हैं। इससे पहले विजय अमृतराज ने 1977 में खेले गए एटीपी फाइनल्स में पुरुष डबल्स का खिताब जीता था। विजय के जोड़ीदार थे अमेरिका के डिक स्टॉकटोन।