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प्रवीण कुमार की कहानी: शारीरिक कमियों से लेकर कोरोना तक..नहीं मानीं हार, अब पेरिस में सोना जीतकर लहराया तिरंगा

Fri, 06 Sep 2024 05:05 PM IST
Mayank Tripathi स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: Mayank Tripathi Updated Fri, 06 Sep 2024 05:05 PM IST
सार

पेरिस पैरालंपिक में अब भारत के कुल छह स्वर्ण पदक हो गए। हैं। प्रवीण के लिए इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं रहा। उन्होंने संघर्षों से हार न मानते हुए लगातार दूसरे ओलंपिक में पदक जीता। 

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Story of Praveen Kumar from physical deficiencies to Corona he did not accept defeat, now he won gold in paris
प्रवीण कुमार - फोटो : @TheKhelIndia

विस्तार

भारत के पैरा एथलीट प्रवीण कुमार ने पेरिस पैरालंपिक में दमदार प्रदर्शन करते हए शुक्रवार को स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने पुरुष ऊंची कूद टी44 स्पर्धा के फाइनल में 2.08 मीटर का स्कोर कर पहला स्थान प्राप्त किया और भारत को  26वां पदक दिलाया। पेरिस पैरालंपिक में अब भारत के कुल छह स्वर्ण पदक हो गए। हैं। प्रवीण के लिए इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं रहा। उन्होंने संघर्षों से हार न मानते हुए लगातार दूसरे ओलंपिक में पदक जीता। 
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टोक्यो में जीता रजत
पेरिस से पहले टोक्यो में भी प्रवीण कुमार ने पदक जीता था। उन्होंने  2.07 मीटर की छलांग लगाकर नए एशियाई रिकार्ड के साथ रजत पदक जीता था। अब उन्होंने अपने प्रदर्शन को दोहराते हुए पेरिस पैरालंपिक 2024 में स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगा लहराया।  मरियप्पन थंगवेलु के बाद पैरालंपिक में पुरुष ऊंची कूद में स्वर्ण पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय पैरा एथलीट हैं।
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ऐसे शुरू हुआ सफर 
जेवर से लगभग 6 किमी दूर यमुना के खादर स्थित गोविंदगढ़ गांव के प्रवीण कुमार को प्रज्ञान पब्लिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान 2016 से ऊंची कूद का शौक लगा था। जिसके बाद स्कूल ने 2016 से ही प्रवीण कुमार को स्कूल और उसके बाद जिला स्तर पर खिलाया। इन प्रतियोगिताओं में लगातार जीत हासिल करने के बाद प्रवीण ने 2017 में छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित 22वें सीबीएसई क्लस्टर और उसके बाद नेशनल एथलेटिक्स मीट में स्वर्ण पदक हासिल किया। जिसमें प्रवीण ने 1.84 मीटर की छलांग लगाई।

2018 में प्रवीण कुमार को स्कूल की तरफ से खेलो इंडिया के तहत विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए भेजा गया जहां लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया। वर्ष 2019 में दुबई में आयोजित सीनियर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जीत के साथ ही प्रवीण कुमार का चयन टोक्यो में होने वाले पैरालंपिक 2020 के लिए हुआ और उन्होंने रजत पदक जीता। अब पेरिस में प्रवीण ने स्वर्ण जीता है। 

कोच डॉ. सत्यपाल ने निखारी प्रतिभा
गाजियाबाद के एक खेल आयोजन में प्रवीण की मुलाकात कोच डॉ. सत्यपाल से हुई थी। उनके कहने पर पैरों के बल ही प्रवीण ने करीब 1.8 मीटर छलांग लगाई थी। इसे देखकर डॉ. सत्यपाल ने उसे प्रशिक्षण देने का फैसला कर लिया था। कोच ने उसे दिल्ली बुलाया और अपने कोटला स्थित फ्लैट की चाभी दे दी। प्रवीण चार वर्षों से लगातार दिल्ली में रहकर ही प्रशिक्षण ले रहे थे। केवल छुट्टियों में ही घर आते थे।

कोरोना संक्रमित होने के बाद भी कम नहीं हुआ हौसला
प्रवीण कुमार भी कोराना संक्रमण से अछूते नहीं रहे। मार्च में दिल्ली में कोरोना के बढ़ते मामलों को देख कोच सतपाल सिंह ने प्रवीण को गांव भेज दिया। यहां आते ही वह कोरोना संक्रमित हो गए। 21 दिनों तक क्वारंटीन रहने के बाद प्रवीण ने अभ्यास जारी रखा और टोक्यो में भारत को रजत पदक दिलाया था।
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खिड़की से बेटे को देखती थी मां
प्रवीण की मां निर्दोष देवी ने बताया था कि होली से पहले को प्रवीण दिल्ली से घर आए थे। होली के बाद ही वह कोरोना संक्रमित हो गए। प्रवीण ने घर की दूसरी मंजिल पर बने कमरे में खुद को क्वारंटीन कर लिया। कोरोना के दौरान भी प्रवीण ने शारीरिक व्यायाम और हल्का अभ्यास जारी रखा। संक्रमित होने के बाद प्रवीण के कोच ने अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी थी। जबकि उस समय के हालात को देखते हुए परिजनों ने प्रवीण को अस्पताल में भर्ती कराने से इनकार कर दिया था।

प्रवीण जब क्वारंटीन थे तब मां को दूर से ही खाना रख लौट जाने को कहते थे। कमरे की खिड़की से बेटे को खाना खाते देख वह रोने लग जाती थीं। उनकी मां ने बताया था कि प्रवीण का लक्ष्य गोल्ड मेडल जीतने का था। अब उनका यह सपना पूरा हो गया।
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