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Sheetal Devi: एशिया की सर्वश्रेष्ठ युवा एथलीट चुनीं गई शीतल, एशिया पैरालंपिक समिति ने किया सम्मानित
Mon, 27 Nov 2023 09:19 AM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Mon, 27 Nov 2023 09:19 AM IST
सार
वर्ल्ड आर्चरी (तीरंदाजी की सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय संस्था) के अनुसार बिना बाजुओं के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीरंदाजी करने वाली शीतल दुनिया की पहली महिला तीरंदाज हैं।
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तीरंदाज शीतल देवी
- फोटो : डीआईपीआर
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विस्तार
एशियाई पैरा खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर पूरी दुनिया को अपने जज्बे का कायल बनाने वाली बिना बाजुओं की तीरंदाज शीतल देवी को एशिया की सर्वश्रेष्ठ युवा एथलीट चुना गया है। एशियाई पैरालंपिक समिति ने रियाद (सउदी अरब) में उन्हें एशिया के इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया। शीतल ने तिरंगे को लपेटकर कोच अभिलाषा के साथ इस पुरस्कार को ग्रहण किया।
जन्म से नहीं हैं दोनों हाथ
वल्र्ड आर्चरी (तीरंदाजी की सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय संस्था) के अनुसार बिना बाजुओं के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीरंदाजी करने वाली शीतल दुनिया की पहली महिला तीरंदाज हैं। शीतल पहली बार सुर्खियों में तब आईं जब उन्होंने इस वर्ष विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में पदक जीता, लेकिन दुनिया की नजरों में वह हांगझोऊ पैरा एशियाई खेलों में दो स्वर्ण पदक जीतकर छाईं। उनका स्वर्ण पदक पर निशाना साधते हुए वीडियो जमकर वायरल हुआ। जन्म से हाथ नहीं होने के बावजूद शीतल पैर, कंधे और मुंह के सहारे धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर निशाना लगाती हैं।
एशियाई तीरंदाजी में दो स्वर्ण समेत जीते कुल 3 पदक
जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ क्षेत्र की रहने वाली वाली 16 शीतल को सेना की ओर से कटरा स्थित माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड तीरंदाजी अकादमी में लाया गया था। यहां आने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एशियाई पैरा खेलों के बाद उन्होंने 23 नवंबर को बैंकॉक में समाप्त हुए एशियाई पैरा तीरंदाजी में स्वर्णिम प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। शीतल का कहना है कि वह यह अवार्ड जीतकर गौरवान्वित महसूस कर रही हैं और इसे देशवासियों को समर्पित करती हैं।
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पैर से बोतल को उछालकर जमीन पर खड़ा किया
शीतल का एक और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह पानी की बोतल को अपने पैर की अंगुलियों से उठाकर उसे उछाल रही हैं, जो वापस जमीन पर पहले की तरह स्थापित हो जाती है। वहीं, उनकी साथी हाथ से भी बोतल को उछालकर ऐसा नहीं कर पा रही हैं।
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जन्म से नहीं हैं दोनों हाथ
वल्र्ड आर्चरी (तीरंदाजी की सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय संस्था) के अनुसार बिना बाजुओं के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीरंदाजी करने वाली शीतल दुनिया की पहली महिला तीरंदाज हैं। शीतल पहली बार सुर्खियों में तब आईं जब उन्होंने इस वर्ष विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में पदक जीता, लेकिन दुनिया की नजरों में वह हांगझोऊ पैरा एशियाई खेलों में दो स्वर्ण पदक जीतकर छाईं। उनका स्वर्ण पदक पर निशाना साधते हुए वीडियो जमकर वायरल हुआ। जन्म से हाथ नहीं होने के बावजूद शीतल पैर, कंधे और मुंह के सहारे धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर निशाना लगाती हैं।
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एशियाई तीरंदाजी में दो स्वर्ण समेत जीते कुल 3 पदक
जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ क्षेत्र की रहने वाली वाली 16 शीतल को सेना की ओर से कटरा स्थित माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड तीरंदाजी अकादमी में लाया गया था। यहां आने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एशियाई पैरा खेलों के बाद उन्होंने 23 नवंबर को बैंकॉक में समाप्त हुए एशियाई पैरा तीरंदाजी में स्वर्णिम प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। शीतल का कहना है कि वह यह अवार्ड जीतकर गौरवान्वित महसूस कर रही हैं और इसे देशवासियों को समर्पित करती हैं।
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पैर से बोतल को उछालकर जमीन पर खड़ा किया
शीतल का एक और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह पानी की बोतल को अपने पैर की अंगुलियों से उठाकर उसे उछाल रही हैं, जो वापस जमीन पर पहले की तरह स्थापित हो जाती है। वहीं, उनकी साथी हाथ से भी बोतल को उछालकर ऐसा नहीं कर पा रही हैं।