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एशियन पैरा गेम्स: शीतल-तोमन की जोड़ी का कीर्तिमान, विश्व रिकॉर्ड के बाद भारत को दिलाया तीरंदाजी में पहला गोल्ड
Thu, 22 Oct 2026 12:42 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 22 Oct 2026 12:42 PM IST
सार
शीतल देवी और तोमन कुमार ने एशियन पैरा गेम्स 2026 की कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा में इंडोनेशिया को 151-148 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह प्रतियोगिता की पैरा तीरंदाजी में भारत का पहला स्वर्ण है। इससे पहले भारतीय जोड़ी ने क्वालीफाइंग राउंड में 1402 अंक बनाकर विश्व रिकॉर्ड कायम किया था।
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शीतल और तोमन
- फोटो : PTI
विस्तार
भारत की शीतल देवी और तोमन कुमार ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया। भारतीय जोड़ी ने गुरुवार को कंपाउंड मिश्रित टीम स्पर्धा के फाइनल में इंडोनेशिया को 151-148 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह एशियन पैरा गेम्स की पैरा तीरंदाजी में भारत का पहला स्वर्ण पदक है। इससे पहले दोनों ने क्वालिफाइंग राउंड में विश्व रिकॉर्ड बनाकर अपनी ताकत दिखाई थी।
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विश्व रिकॉर्ड के बाद फाइनल में भी कमाल
क्वालिफाइंग राउंड में शीर्ष स्थान हासिल करने वाली शीतल और तोमन की जोड़ी ने 1402 अंक बनाकर विश्व रिकॉर्ड कायम किया था। फाइनल में भी दोनों ने शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा। भारतीय जोड़ी ने पहला सेट 38-37 से जीता और दूसरे सेट के बाद अपनी बढ़त 77-73 कर ली। इंडोनेशिया ने तीसरे सेट में एक अंक से बढ़त हासिल की, लेकिन भारतीय जोड़ी ने अपनी कुल बढ़त बरकरार रखी। आखिरी सेट में दोनों टीमों ने 38-38 अंक बनाए। इस तरह भारत ने तीन अंकों के अंतर से मुकाबला जीतकर स्वर्ण पदक हासिल किया।
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जन्म से दोनों हाथ नहीं, पैरों से साधती हैं निशाना
शीतल देवी का सफर अपने आप में प्रेरणादायक है। जन्म से दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद उन्होंने तीरंदाजी में अपनी अलग पहचान बनाई। वह धनुष को सही स्थिति में रखने के लिए पैरों का इस्तेमाल करती हैं और कंधे तथा जबड़े की मदद से डोरी खींचकर निशाना साधती हैं।
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वर्ष 2019 में भारतीय सेना ने उनकी प्रतिभा पहचानी। इसके बाद उन्होंने कटरा में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया। वर्ष 2023 में वह विश्व तीरंदाजी पैरा चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाली दुनिया की पहली ऐसी महिला तीरंदाज बनीं, जिनके दोनों हाथ नहीं हैं। वह विश्व चैंपियनशिप और पेरिस पैरालंपिक 2024 में भी पदक जीत चुकी हैं। विश्व तीरंदाजी उन्हें दो बार वर्ष की सर्वश्रेष्ठ पैरा तीरंदाज चुन चुकी है।
देश की सेवा में गंवाया पैर, फिर विश्व चैंपियन बने तोमन
तोमन कुमार की कहानी भी संघर्ष और वापसी की मिसाल है। फरवरी 2022 में झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सीआरपीएफ में सेवा देते हुए वह आईईडी की चपेट में आ गए थे। इस हादसे में उनका बायां पैर चला गया। वर्ष 2023 में कृत्रिम पैर से जुड़ी सलाह लेने के दौरान उनका परिचय पैरा तीरंदाजी से हुआ। उन्होंने तेजी से इस खेल में प्रगति की और 2025 में दक्षिण कोरिया के ग्वांगजू में विश्व चैंपियनशिप के कंपाउंड पुरुष ओपन वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। वह पैरा तीरंदाजी में विश्व चैंपियन बनने वाले भारत के पहले पुरुष तीरंदाज बने। अब शीतल और तोमन ने एशियन पैरा गेम्स का स्वर्ण जीतकर अपनी उपलब्धियों में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया है।