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Dipa Karmakar: कभी सपाट पैर देखकर कोच ने खेलने से किया था मना, पिता की जिद के कारण जिम्नास्टिक में बनाया करियर

Mon, 07 Oct 2024 09:18 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Mon, 07 Oct 2024 09:18 PM IST
सार

दीपा रियो ओलंपिक 2016 में सिर्फ 0.15 अंक से कांस्य पदक जीतने से चूक गईं थी और चौथे स्थान पर रही थीं। दीपा भले ही पदक नहीं ला सकी थीं, लेकिन उनका यह प्रदर्शन भी ऐतिहासिक रहा था।

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Rio Olympian Indian woman gymnast Dipa Karmakar Profile Sports career achievements and Controversy in hindi
दीपा कर्माकर - फोटो : अमर

विस्तार

रियो ओलंपिक 2016 में ऐतिहासिक पदक लाने से चूकने वाली भारतीय महिला जिम्नास्ट दीपा कर्माकर ने खेल से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। त्रिपुरा के अगरतला की रहने वाली दीपा ने छह साल की उम्र में इस खेल को खेलना शुरू किया था, लेकिन उनके लिए यह सफर आसान नहीं रहा। बहुत से लोग दीपा को 2016 रियो ओलंपिक में प्रभावशाली प्रदर्शन के लिए जानते हैं, लेकिन कम ही लोगों को पता होगा कि सपाट पैर के कारण कोच उन्हें रिजेक्ट कर दिया था। 
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कोच ने दीपा को सपाट पैर होने के कारण इस खेल को नहीं चुनने की सलाह दी थी, लेकिन दीपा के पिता इस बात पर अड़ गए कि वह अपनी बेटी को जिम्नास्ट ही बनाएंगे। दरअसल जिम्नास्टिक जैसे फुर्ती के खेल में सपाट पैर को अच्छा नहीं माना जाता क्योंकि इसकी वजह से जंप मारने में दिक्कत आती है। उनके पिता खुद भी भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के कोच थे, इसलिए उन्होंने बेटी को भी खिलाड़ी बनाने का ही सपना देखा। दीपा जब छह साल की थी तब ही उनके पिता उन्हें जिम्नास्टिक सिखाने के लिए एक कोच के पास ले गए। 
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दीपा ने भी पिता की इच्छा पूरी करने के लिए छोटी उम्र से ही कड़ी मेहनत शुरू कर दी। उनकी मेहनत रंग लाई और जल्द ही उन्होंने कामयाबियों की फेहरिस्त लिखनी शुरू कर दी। दीपा ने 2008 में जलपाईगुड़ी में जूनियर नेशनल्स जीतकर सुर्खियां बटोरी। यहीं से उनका करियर शुरू हुआ और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दीपा को पहचान 2014 में मिली, जब उन्होंने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीता और इस टूर्नामेंट में पदक जीतने वाली पहली महिला जिम्नास्ट बनीं। 
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पदक से चूकने के बाद दीपा ने किया था प्रभावित 
दीपा रियो ओलंपिक 2016 में सिर्फ 0.15 अंक से कांस्य पदक जीतने से चूक गईं थी और चौथे स्थान पर रही थीं। दीपा भले ही पदक नहीं ला सकी थीं, लेकिन उनका यह प्रदर्शन भी ऐतिहासिक रहा था। दीपा की उपलब्धि इसलिए बड़ी थी क्योंकि 1960 के दशक के बाद भारत के किसी खिलाड़ी ने ओलंपिक में जिम्नास्टिक में शिरकत की थी। दीपा प्रोडूनोवा वॉल्ट में शिरकत करती थीं जिसे काफी मुश्किल माना जाता है। दीपा जिम्नास्टिक इतिहास में प्रोडूनोवा वॉल्ट करने वाली पांच महिला जिम्ननास्ट में से एक हैं। 

क्या है प्रोडूनोवा वॉल्ट?
प्रोडूनोवा वॉल्ट यानी कि हाथों से उछल कर हवा में दो गुलाटी मारना। 1998-99 में रूस की एलिना प्रोडूनोवा ने सबसे पहले ये वॉल्ट परफेक्ट किया था जिसके बाद से इसका नाम प्रोडूनोवा वॉल्ट पड़ गया। जिम्नास्टिक्स में कई वॉल्ट उसे परफेक्ट तौर पर करने वालों के नाम पर रखे गए हैं जैसे- मसलन चेंग, अमानार, मुस्तफीना आदि। जिम्नास्टिक 2013-2016 के नियमों के अनुसार प्रोडूनोवा वॉल्ट को सबसे कठिन वॉल्ट माना गया है और इसे परफेक्ट करने के लिए अंक अधिक मिलते हैं।

दीपा को किया गया था निलंबित
दीपा का विवादों से भी नाता रहा और उन्हें प्रतिबंधित पदार्थ हिगेनामाइन के लिए पॉजिटिव पाए जाने के बाद 21 महीनों के लिए निलंबित किया गया था। दीपा का परीक्षण 2021 में किया गया था, लेकिन यह पता नहीं चल पाया था कि वह डोप टेस्ट में विफल हो गई है। उनका यह प्रतिबंध जुलाई 2023 तक चला था।
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