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Paris Olympics: भारतीय तीरंदाजों को पहले पदक की आस, लिंबा राम से लेकर दीपिका कुमारी तक की कोशिश रही है विफल
Fri, 12 Jul 2024 02:23 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Fri, 12 Jul 2024 02:23 PM IST
सार
भारत को कभी भी तीरंदाजी में ओलंपिक पदक नहीं मिला है और तीरंदाजों की कोशिश रहेगी कि 26 जुलाई से शुरू हो रहे पेरिस ओलंपिक में वह पदक का सूखा समाप्त करे।
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पेरिस ओलंपिक 2024
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पेरिस ओलंपिक का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और अन्य भारतीय खिलाड़ियों की तरह ही तीरंदाजों ने भी इसके लिए कमर कस ली है। दिलचस्प बात यह है कि भारत को कभी भी तीरंदाजी में ओलंपिक पदक नहीं मिला है और तीरंदाजों की कोशिश रहेगी कि 26 जुलाई से शुरू हो रहे पेरिस ओलंपिक में वह पदक का सूखा समाप्त करे। भारत ने पेरिस खेलों के लिए पुरुष और महिला मिलाकर छह तीरंदाजों की टीम चुनी है।
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ओलंपिक पदक के लिए तीरंदाजों को मिला आपसी जुड़ाव का मंत्र
ओलंपिक पदक का सूखा खत्म करने के लिए भारतीय तीरंदाजों को इस बार आपसी जुड़ाव का विशेष मंत्र दिया गया है। तीरंदाज न सिर्फ साथ खा रहे हैं, बल्कि साथ में आना-जाना कर रहे हैं। उन पर किसी भी तरह की नकारात्मक बात करने की पूरी तरह से पाबंदी है। यही नहीं, फ्रांस रवानगी से पूर्व पुणे में तीरंदाजों को उसी अंदाज में तैयारी कराई गई, जिस तरह उन्हें पेरिस ओलंपिक में तीरंदाजी करनी है। पुणे में 10 दिन तक टीम ने जिस तरह पेरिस में मुकाबले होने हैं, उसी तरह तैयारी की। उन्हें पोडियम पर तीरंदाजी कराई गई। दर्शकों का शोर, माइक पर आवाज, बड़ी स्क्रीन पर पिक्चर, इन सबके बीच तीरंदाजों ने 10 दिन तक तैयारी की है।
ओलंपिक पदक का सूखा खत्म करने के लिए भारतीय तीरंदाजों को इस बार आपसी जुड़ाव का विशेष मंत्र दिया गया है। तीरंदाज न सिर्फ साथ खा रहे हैं, बल्कि साथ में आना-जाना कर रहे हैं। उन पर किसी भी तरह की नकारात्मक बात करने की पूरी तरह से पाबंदी है। यही नहीं, फ्रांस रवानगी से पूर्व पुणे में तीरंदाजों को उसी अंदाज में तैयारी कराई गई, जिस तरह उन्हें पेरिस ओलंपिक में तीरंदाजी करनी है। पुणे में 10 दिन तक टीम ने जिस तरह पेरिस में मुकाबले होने हैं, उसी तरह तैयारी की। उन्हें पोडियम पर तीरंदाजी कराई गई। दर्शकों का शोर, माइक पर आवाज, बड़ी स्क्रीन पर पिक्चर, इन सबके बीच तीरंदाजों ने 10 दिन तक तैयारी की है।
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कैसा रहा है भारतीय तीरंदाजों का इतिहास?
भारत ने 1988 के सियोल ओलंपिक में तीरंदाजी में पहली बार लिया हिस्सा। भारत ने तीरंदाजी में अब तक कोई पदक नहीं जीता है। 1992 के ओलंपिक में लिंबा राम पदक के काफी करीब पहुंच गए थे, लेकिन कांस्य पदक से चूक गए थे। तीरंदाजों को 24 बार साई ने विदेशी टूर्नामेंटों और तैयारियों के लिए भेजा, जिस पर 10.74 करोड़ का खर्च आया। साथ ही साढ़े छह करोड़ की लागत से 217 दिन के 41 बार राष्ट्रीय शिविर लगाए गए।
भारत ने 1988 के सियोल ओलंपिक में तीरंदाजी में पहली बार लिया हिस्सा। भारत ने तीरंदाजी में अब तक कोई पदक नहीं जीता है। 1992 के ओलंपिक में लिंबा राम पदक के काफी करीब पहुंच गए थे, लेकिन कांस्य पदक से चूक गए थे। तीरंदाजों को 24 बार साई ने विदेशी टूर्नामेंटों और तैयारियों के लिए भेजा, जिस पर 10.74 करोड़ का खर्च आया। साथ ही साढ़े छह करोड़ की लागत से 217 दिन के 41 बार राष्ट्रीय शिविर लगाए गए।
दीपिका-तरुणदीप सबसे अनुभवी
भारतीय तीरंदाजी दल में दीपिका कुमार और तरुणदीप राय सबसे अनुभवी हैं जो चौथी बार ओलंपिक में हिस्सा लेंगे। दीपिका 2012 लंदन ओलंपिक से लगातार इन खेलों में हिस्सा ले रही हैं, जबकि तरुणदीप ने 2004 एथेंस ओलंपिक से डेब्यू किया था और फिर 2012 तथा टोक्यो 2020 में भी शामिल रहे थे। प्रवीण जाधव ने टोक्यो 2020 से डेब्यू किया था और यह उनका दूसरा ओलंपिक होगा। पुरुष व्यक्तिगत वर्ग में कोटा हासिल करने वाले धीरज बोम्मादेवारा, महिला व्यक्तिगत वर्ग में कोटा हासिल करने वाली भजन कौर और अंकिता भकत ओलंपिक में पदार्पण करेंगे।
भारतीय तीरंदाजी दल में दीपिका कुमार और तरुणदीप राय सबसे अनुभवी हैं जो चौथी बार ओलंपिक में हिस्सा लेंगे। दीपिका 2012 लंदन ओलंपिक से लगातार इन खेलों में हिस्सा ले रही हैं, जबकि तरुणदीप ने 2004 एथेंस ओलंपिक से डेब्यू किया था और फिर 2012 तथा टोक्यो 2020 में भी शामिल रहे थे। प्रवीण जाधव ने टोक्यो 2020 से डेब्यू किया था और यह उनका दूसरा ओलंपिक होगा। पुरुष व्यक्तिगत वर्ग में कोटा हासिल करने वाले धीरज बोम्मादेवारा, महिला व्यक्तिगत वर्ग में कोटा हासिल करने वाली भजन कौर और अंकिता भकत ओलंपिक में पदार्पण करेंगे।
दीपिका पदक की प्रबल दावेदार
भारतीय तीरंदाजी टीम में दीपिका कुमारी पदक लाने की दावेदार हैं जिन्होंने करीब एक दशक से प्रभावित किया है। भारत की इस अनुभवी तीरंदाज ने विश्व चैंपियनशिप, विश्व कप, एशियन चैंपियनशिप, एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीता है। हालांकि, वह अब तक ओलंपिक पदक नहीं जीत सकी हैं। दीपिका शीर्ष रैंकिंग के साथ लंदन ओलंपिक में गई थीं, लेकिन प्रभावित करने में नाकाम रही थीं। रियो ओलंपिक में भी उनका प्रदर्शन खास अच्छा नहीं रहा था और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा था।
भारतीय तीरंदाजी टीम में दीपिका कुमारी पदक लाने की दावेदार हैं जिन्होंने करीब एक दशक से प्रभावित किया है। भारत की इस अनुभवी तीरंदाज ने विश्व चैंपियनशिप, विश्व कप, एशियन चैंपियनशिप, एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीता है। हालांकि, वह अब तक ओलंपिक पदक नहीं जीत सकी हैं। दीपिका शीर्ष रैंकिंग के साथ लंदन ओलंपिक में गई थीं, लेकिन प्रभावित करने में नाकाम रही थीं। रियो ओलंपिक में भी उनका प्रदर्शन खास अच्छा नहीं रहा था और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा था।
टोक्यो ओलंपिक में दीपिका का कैसा रहा था प्रदर्शन?
दीपिका ने टोक्यो ओलंपिक में भी विश्व की नंबर एक तीरंदाज के तौर पर जगह बनाई थी और भारत की तरफ से एकमात्र महिला तीरंदाज थीं। उन्होंने महिला व्यक्तिगत रिकर्व और प्रवीण जाधव के साथ मिक्स्ड टीम इवेंट में हिस्सा लिया था। महिला वर्ग में दीपिका ने अपने पिछले दो ओलंपिक से बेहतर प्रदर्शन किया था और वह पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंची थीं। हालांकि, उनका सफर अंतिम आठ में ही समाप्त हो गया था। वहीं, मिक्स्ड टीम इवेंट में भी वह क्वार्टर फाइनल की बाधा पार नहीं कर सकी थीं।
दीपिका ने टोक्यो ओलंपिक में भी विश्व की नंबर एक तीरंदाज के तौर पर जगह बनाई थी और भारत की तरफ से एकमात्र महिला तीरंदाज थीं। उन्होंने महिला व्यक्तिगत रिकर्व और प्रवीण जाधव के साथ मिक्स्ड टीम इवेंट में हिस्सा लिया था। महिला वर्ग में दीपिका ने अपने पिछले दो ओलंपिक से बेहतर प्रदर्शन किया था और वह पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंची थीं। हालांकि, उनका सफर अंतिम आठ में ही समाप्त हो गया था। वहीं, मिक्स्ड टीम इवेंट में भी वह क्वार्टर फाइनल की बाधा पार नहीं कर सकी थीं।