Tokyo Olympics: भोजनालय में भारतीय व्यंजनों की भरमार, शाकाहारी भारतीय खिलाड़ियों ने ली राहत की सांस
- खेल गांव के भोजनालय में दाल, रोटी, छोले भठूरे, भिंडी, बैगन, पनीर, नॉन, बटर चिकन देख गदगद हुए भारतीय खिलाड़ी
- पहले के ओलंपिक में इस तरह भारतीय व्यंजनों को नहीं दी गई प्रमुखता
विस्तार
शाकाहारी भारतीय खिलाड़ियों की चिंता का सबसे बड़ा सबब दूर हो गया है। टोक्यो ओलंपिक खेल गांव के भोजनालय (डाइनिंग) में भारतीय व्यंजनों की भरमार ने भारतीय खिलाड़ियों को गदगद कर दिया है। भारतीय ओलंपिक संघ को चिंता थी कि खेल गांव की डाइनिंग में शाकाहारी भारतीय व्यंजन होंगे या नहीं। इसी को ध्यान में रखते हुए उसने आयोजन समिति से गुहार लगाई थी कि डाइनिंग में भारतीय व्यंजन जरूर रखे जाएं।
इतने व्यंजन देख खुशी से झूम उठे खिलाड़ी
आईओए की इस गुहार को आयोजन समिति ने सुन लिया है। कुछ भारतीय खिलाड़ियों ने जब शनिवार को डाइनिंग में प्रवेश किया तो एशियाई भोजन के काउंटर पर भिंडी की सूखी सब्जी, बैंगन की सब्जी, पनीर, टोफू, छोले भठूरे, दाल, रोटी, नॉन और बटर चिकन देखकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम के चीफ कोच विजय शर्मा एक झटके में खाने की तारीफ करने से नहीं चूके। उन्होंने रियो ओलंपिक के मुकाबले यहां के खाने की तारीफ की।
शाकाहारी भारतीयों की दूर हुई चिंता
शूटर सौरभ चौधरी, मनु भाकर, अभिषेक वर्मा के अलावा कई अन्य भारतीय खिलाड़ी शाकाहारी हैं। आईओए को ऐसे ही खिलाड़ियों की चिंता थी, लेकिन आयोजन समिति के इंतजाम के बाद भारतीय खिलाड़ियों की यह चिंता दूर कर दी है। बीते ओलंपिक में पहलवान सुशील कुमार समेत कई शाकाहारी खिलाड़ियों को अपने साथ भारतीय भोजन ले जाना पड़ता था। बीजिंग ओलंपिक के दौरान सुशील कुमार ने खुलासा किया था कि वह काफी मात्रा में भारतीय खाना साथ लेकर गए थे।
पर पहले जैसा नहीं हैं भोजनालय का माहौल
ओलंपिक खेल गांव के भोजनालय में हमेशा आयोजकों की एक ही कोशिश रहती थी कि सभी देशों के खिलाड़ी आपस में मिलकर एक दूसरे के देश के भोजन का आनंद लें, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। कोरोना के चलते कई सारी सावधानियां के निर्देश दिए गए हैं। कोई साथ बैठकर नहीं खा सकता है। भीड़ नहीं जुटा सकता है। न ही खाने के दौरान बात कर सकता है। यह जरूर है कि भोजनालय 24 घंटे खुला रहेगा।