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विशेष: भारतीय हॉकी टीम के वो तीन सितारें, जो बना सकते हैं भारतीय हॉकी टीम को विश्व विजेता

Thu, 06 Dec 2018 03:43 AM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह, भुवनेश्वर
सत्येन्द्र पाल सिंह, भुवनेश्वर Updated Thu, 06 Dec 2018 03:43 AM IST
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Nilakanta sharma, simranjeet singh and hardik, young hopes of Indian hockey team in world cup 2018

सिमरनजीत सिंह, हार्दिक सिंह और नीलकांत शर्मा की त्रिमूर्ति यहां हॉकी विश्व कप में भारत के लिए शुरू के दो मैचों में अपने शानदार ऑलराउंड खेल से सुर्खियों में हैं। मूल रूप से ये तीनों आक्रामक मिडफील्डर और लिंकमैन के रूप में भारत के चीफ कोच हरेन्द्र सिंह की तुरुप के इक्के साबित हो ही रहे हैं।

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इन तीनों को अपनी शैली के मुताबिक हरेन्द्र सिंह ने उसी तरह ढाला है जैसे कोई मूर्तिकार अपने जेहन में आई आकृति को आकार देता है। ये 20 से 23 बरस के हैं। तीनों को बड़े मंच के लिए हरेन्द्र ने बतौर हॉकी उस्ताद निखारा है। ये तीनों मिडफील्डर जरूरत पड़ने पर स्ट्राइकर और लिंकमैन का रोल सही ढंग से निभाने की क्षमता के कारण भारतीय हॉकी टीम के ऑलराउंडर हैं।
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अमर उजाला ने इन तीनों से उनकी भारतीय सीनियर हॉकी टीम की यात्रा और इस विश्व में टीम की चुनौती कहां तक पहुंचेगी इस बाबत बात की। सिमरनजीत सिंह, हार्दिक सिंह और नीलकांत ने एक बात एक सुर और पूरे विश्वास के साथ कहा भले ही टीम की नीति मैच दर मैच आगे बढ़ने की है लेकिन हमें पूरा भरोसा है कि हमारी टीम अपने घर में यहां विश्व कप का फाइनल खेलेगी। हार्दिक और नीलकांत तो यहां खिताब जीतने तक विश्वास जताते हैं।

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हरेन्द्र सर ने किया किसी भी स्थिति के लिए तैयार: सिमरनजीत

Nilakanta sharma, simranjeet singh and hardik, young hopes of Indian hockey team in world cup 2018

सबसे ज्यादा सुखियों में 22 बरस के सिमरनजीत सिंह यहां भारतीय टीम के लिए स्ट्राइकर और आक्रामक मिडफील्डर के रूप मे तीन शानदार गोल कर कर है। गुरदासपुर के चाहल कलां गांव के सिमरनजीत सिंह से जब अपने फुफेरे भाई गुरजंत सिंह को पीछे छोड़ इस विश्व कप में भारतीय टीम में जगह बनाने की बाबत पूछा तो हंसकर बोले, ‘सभी अच्छे हैं। गुरजंत को मुझसे पहले एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी के लिए टीम में जगह मिली थी तो मुझे विश्व कप के लिए। हालांकि गुरजंत रिजर्व खिलाड़ी के रूप में अभी भी टीम के साथ यहां है। टीम में जगह के लिए इस प्रतिद्वंद्विता से बेहतर और बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है। मुझे हॉकी विरासत में मिली है। मैं टीम में मिडफील्डर, स्ट्राइकर और लिंकमैन, कोच साहब (हरेन्द्र सिंह) को जरूरत के मुताबिक कहीं भी अपना बेस्ट करने को बेताब रहता हूं। दरअसल हरेन्द्र सर के हम इतने समय से बराबर खेल रहे हैं कि वे हमारी क्षमता और टीम की जरूरत के मुताबिक उसका बेहतरीन ढंग से इस्तेमाल करते हैं। मैं, आकाशदीप और ललित उपाध्याय में टीम की जरूरत के मुताबिक लिंकमैन और फॉरवर्ड के रूप में कहीं भी खेलने के लिए जेहनी तौर पर तैयार हैं। हरेन्द्र ने हमें इसके लिए तैयार किया है और मैं हॉकी में बतौर सलाह हरेन्द्र सर की ही मानता हूं। मुझे हॉकी विरासत में मिली है। मैंने शुरूआती हॉकी कोच रणजीत सिंह से सिखी। मेरे पिता इकबाल सिंह, चाचा रछपाल सिंह और बुआ के लिए गुरजंत सिंह हॉकी खेलते हैं। मेरे आदर्श ऑस्ट्रेलिया के जैमी डायर और भारत के पूर्व सेंटर हाफ सरदार सिंह रहे हैं। मैं मध्यपंक्ति में अपने कप्तान मनप्रीत सिंह के सेंटर हाफ के रूप में खेल से खासा प्रभावित हूं। यहां अब तक अपने और टीम के प्रदर्शन से अच्छे नतीजे, काफी आगे तक जाने की उ मीद है..... फाइनल तक । फिर भी हम एक समय केवल एक मैच की बाबत सोच रहे हैं। हम फिलहाल कनाडा के खिलाफ अगले मैच में जीत और ज्यादा से ज्यादा गोल करने पर निगाह करने पर है। हमारे कोच हरेन्द्र सिंह ने हमें इस तरह तैयार किया है कि हम जरूरत के मुताबिक किसी भी पॉजिशन पर खेल किसी स्थिति से निबट सकते हैं। जहां तक रिक चार्ल्सवर्थ ने गेंद के पीछे उसी तरह स्टिक नीचे रखने कर गेंद को कब्जे में लेने तारीफ की है जिस तरह क्रिकेट में धोनी अपना बल्ला लाते हैं तो मैं इससे अभिभूत हूं।’

जहां भी जरूरत हो टीम के लिए खेलने को तैयार हूं : हार्दिक 

Nilakanta sharma, simranjeet singh and hardik, young hopes of Indian hockey team in world cup 2018

20 बरस के हार्दिक सिंह को हॉकी विरासत से मिली है। उनके मामा जुगराज सिंह भारत के लिए खेल चुके हैं और उनकी ताई राजबीर कौर भी भारत की धुरंधर हॉकी खिलाड़ी रह चुकी हैं। सच यह है वह अपने परिवार की पांचवीं पीढ़ी के खिलाड़ी है जो भारत के लिए खेल रहे हैं। 20 बरस के हार्दिक सिंह यहां बतौर लिंकमैन चीफ कोच हरेन्द्र सिंह की इस विश्व कप में तुरुप के इक्के साबित हो रह हैं।

हार्दिक सिंह ने कहा, ‘मेरे पिता वरिंदर प्रीत, मामा जुगराज, ताई राजबीर कौर और दादा पीएस राय सभी हॉकी खेले। मेरे पिता वरिंदर प्रीत भी हॉकी खेले हैं। मुझे शुरू से ही हॉकी खेलने और सीखने का माहौल अपने गांव खुसरोपुर में मिला। मैं भारत के लिए खेला तो जुगराज सिंह और राजबीर कौर ने मुझे मेरा खेल बेहतर करने में मदद की। जब 2016 में मुझे जूनियर हॉकी विश्व कप के लिए भारतीय टीम में जगह नहीं मिली तो मैं करीब एक बरस घर पर रहा। मैंने खुद से कहा कि जूनियर विश्व कप न सही मैं सीनियर विश्व कप में भारत के लिए जगह बना सकता हूं। घरेलू हॉकी में अपना खेल करने में जुटा रहा। मैं 2016 में हरेन्द्र सर के मार्गदर्शन में खेल रहा हूं। मैं टीम के लिए लिंकमैन के रूप में और मिडफील्डर के रूप में जहां भी जरूरत हो खेलने को तैयार हूं। हमारे कोच हरेन्द्र सर की सबसे अच्छी बात यह है कि वह हम सभी को बिना दबाव के सहज होकर अपना सर्वश्रेष्ठ खेलने को प्रेरित करते हैं । हरेन्द्र सर का जोर बेसिक्स पर काबिज रह कर सर्वश्रेष्ठ खेल पर रहता है। हमारी कोशिश कनाडा के खिलाफ मैच ज्यादा से ज्यादा गोल से जीतने की होगी। हम जब मैच के बीच आराम होता तो हॉकी की बजाय कुछ मौज मस्ती करते हैं। अपने मैचों के विडियो देख अपना खेल सुधारने और प्रतिद्वी टीम के विडियो देख खुद को उसी के मुताबिक तैयार करते हैं। अब यहां मैचों के बीच जो ब्रेक मिला उसमें हमारी टीम पुरी के समुद्र तट पर गई। मैं टीम में लगभग सभी के साथ खेल चुका हूं। कुछ मेरे साथ जूनियर टीम में थे ते वह अब सीनियर टीम में हैं। इससे हममें तालेमल बहुत अच्छा है। अब हमारे व्हाटसऐप ग्रुप का नाम ‘मिशन विश्व कप’ है। हमें पूरा भरोसा है कि हमारी टीम यहां विश्व कप के फाइनल में खेलेगी।

लिंकमैन का नया रोल मुझे रास आ रहा है : नीलकांत

Nilakanta sharma, simranjeet singh and hardik, young hopes of Indian hockey team in world cup 2018

23 बरस के नीलकांत शर्मा मणिपुर के ओडिशा हॉकी विश्व कप में शिरकत करने वाली टीम की त्रिमूर्ति की अहम कड़ी हैं। बतौर ऑलराउंडर लिंकमैन धैर्य के साथ गोल के अभियान बना कर गेंद को बहुत चतुराई से आगे बढ़ाते हैं।

नीलकांत कहते हैं,‘मैं डिफेंस में कुछ उन्नीस था लेकिन कोच साहब (हरेन्द्र) सर ने मेरी हमले बोलने की क्षमता के कारण मुझे लिंकमैन और आक्रामक सेंटर हाफ में आजमाया। मुझे यह नया रोल रास आ रहा है। मैं जब जूनियर विश्व कप की टीम में था तब भी कोच हम सभी को अपनी बात खुल कर कहने और अपनी हॉकी का लुत्फ उठाने की नसीहत देते थे। अब सीनियर टीम के इस विश्व कप में सभी साथी पूरे तालमेल से खेल रहे हैं। मैं अपने चाचा नौरेन को हॉकी खेलत देख हॉकी खेलनी शुरू की। मेरे पहले हॉकी कोच कोथाहालुप थ। हरेन्द्र सर हिंदी में समझाते हैं और इसीलिए उनकी सब बात समझ में आती हे। मैं मणिपुर के छोटे से सैंदी कुम गांव से हूं। मेरी बतौर लिंकमैन हार्दिक, सिमरनजीत अैर आकाशदीप के साथ जुगलबंदी खूब जम रही है। हमारी टीम अब दबाव में बेहतर खेल रही है। यहां खेल रही इस विश्व कप की टीम में हमारे उपकप्तान चिंगलेनसाना सिंह और कोथाजीत सिंह भी मणिपुर के हैं। ये दोनों, हमारे कप्तान और कोच बराबर यही सलाह देते हैं कि मैदान पर उतर कर खुद पर भरोसा कर अपना सर्वश्रेष्ठ करने पर ध्यान लगाउं। सीनियर हो या जूनियर किसी भी टीम में सभी के साथ लय ताल बैठाने में खासी दिक्कत आती है। मैं मैदान पर पूरी शिद्दत से अपन सर्वश्रेष्ठ करने पर ध्यान लगा रहा हूं। हमारी टीम सधे कदमों से आगे बढ़ रही है और पूरा भरोसा है कि हमारी टीम फाइनल खेलेगी।

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