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साई सेंटर अपनाओ मेट्रो की तर्ज पर नाम पाओ

Fri, 31 Jan 2020 07:40 AM IST
मुकेश कुमार झा हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी, नई दिल्ली Published by: मुकेश कुमार झा Updated Fri, 31 Jan 2020 07:40 AM IST
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Ministry of Sports will propose to adopt SAI centers of the country to the corporate houses
किरण रिजिजू - फोटो : Twitter

देश में खेलों की जड़ें जमाने को खेल मंत्रालय नामी-गिरामी कॉरपोरेट घरानों को अनोखा प्रस्ताव देने जा रहा है। साई सेंटर अपनाने पर मेट्रो स्टेशनों की तर्ज पर कॉरपोरेट घराने या कंपनी का नाम उसके आगे जुड़ जाएगा। फिर यह सेंटर अपनाने वाले कारपोरेट घराने के नाम से जाना जाएगा।

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मंत्रालय इस प्रस्ताव को लेकर जल्द ही फिक्की, एसोचैम, सीआईआई के अलावा सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) और पब्लिक सेक्टर संस्थानों (पीएसबी) के उच्चाधिकारियों के साथ से मिलने जा रहा है।
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खेल मंत्री किरन रिजिजू की अगुवाई में हुई नेशनल स्पोट्र्स डेवलपमेंट बोर्ड (एनएसडीएफ) की बैठक में साई सेंटरों के कायाकल्प को यह प्रस्ताव रखा गया। खेल मंत्री खुद सभी के समक्ष यह प्रस्ताव रख उनसे सेंटरों को अपनाने को कहेंगे। इससे कारपोरेट घरानों का तो नाम होगा ही साथ ही साई सेंटरों की दशा भी सुधरेगी।

इस वक्त देश में साई के 56 ट्रेनिंग सेंटर (एसटीसी) हैं। जहां जमीनी स्तर से निकलकर उभरते खिलाडियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता  है। इसके अलावा पटियाला और त्रिवेंद्रम में दो शिक्षण और ट्रेनिंग संस्थान, साथ ही लखनऊ, सोनीपत, चंडीगढ़ समेत 10 क्षेत्रीय केंद्र और 14 सेंटर ऑफ एक्सिलेंस हैं। इन सभी जगहों पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए भारतीय टीमों के अलावा जमीनी स्तर के खिलाडियों की ट्रेनिंग होती है।

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एक कॉरपोरेट एक खेल का भी प्रस्ताव

सिर्फ साई सेंटर ही नहीं बल्कि मंत्रालय कॉरपोरेट घरानों के आगे एक खेल को अपनाने का भी प्रस्ताव रखेगा। इस खेल के जमीनी स्तर के विकास की जिम्मेदारी कारपोरेट घराने की होगी। यह ठीक वैसा ही प्रस्ताव है जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में मंत्रालय से एक राज्य एक खेल की नीति बनाने को कहा था। इसके तहत मंत्रालय ने कई राज्यों से बात कर एक खेल को अपनाने की योजना अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है। इसी तरह फिक्की, एसोचैम, सीआईआई के प्रबंध निदेशकों के समक्ष कारपोरेट घरानों को एक खेल अपनाने को कहा जाएगा। इसके तहत उस खेल के खिलाड़ी की ट्रेनिंग और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में खेलने पर आने वाले खर्च की जिम्मेदारी घराने की होगी।

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