इंडोनेशिया के जकार्ता और पालेमबांग में खेले जा रहे एशियन गेम्स में अमित पंघाल ने इतिहास रच दिया। महज 22 साल की उम्र में इस जांबाज बेटे ने 18वें एशियाड में बॉक्सिंग का एकमात्र गोल्ड अपने नाम किया। आइए आगे जानते हैं कौन हैं अमित पंघाल और क्या है इनकी संघर्ष की कहानी...
मुक्केबाजी जहां एशियन खेलों में भारत का मजबूत पक्ष माना जाता है, जहां से देश का हर मुक्केबाज सोना जीतने की ताकत रखता है, ऐसे खेल में हमारा एक भी पहलवान फाइनल तक भी नहीं पहुंच पाया था, ऐसे में हरियाणा के रोहतक के इस लाल ने न सिर्फ खिताबी मुकाबले में जगह बनाई बल्कि हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा भी कर दिया।
49 किलोग्राम भारवर्ग के मुक्केबाजी फाइनल में अमित का सामना रियो ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट उजबेकिस्तान के हसनबॉय दुश्मातोव के साथ था। मुकाबला मुश्किल होना था, लेकिन पहले मिनट से ही अमित ने उजबेक मुक्केबाज पर वो हमले किए कि दिन में ही विपक्षी को तारे नजर आने लगे होंगे।
सेकेंड राउंड खत्म होते-होते अमित इतने हावी हो गए कि इंडोनेशिया समेत हरियाणा के रोहतक जिले के उनके गांव मायना में भी सभी को यकीन हो गया था कि अमित इतिहास रच चुका है। आखिरकार मैच का फैसला अमित के पक्ष में गया, यह भारत के लिए 14वां गोल्ड था। इस तरह भारत की झोली में 23 सिल्वर, 29 ब्रॉन्ज मेडल के साथ अब कुल 66 मेडल आ चुके हैं।
अमित का जन्म 16 अक्टूबर 1995 को हुआ। मार्च 2018 से वह भारतीय सेना में जेसीओ के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने इसी साल हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर नाम रोशन किया था। वहीं अब गोल्ड मेडल जीतकर मां-बाप का और देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। इसके साथ ही अब ओलंपिक 2020 में एक मेडल की आस जग गई है।