जानना चाहेंगे, चुनाव में कौन खिलाड़ी जीता, कौन हारा?
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16वां लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुका है और इस बार भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली एनडीए ने जबर्दस्त सफलता हासिल करते हुए बहुमत हासिल किया है।
पिछले कई चुनावों की तरह इस बार भी चुनावी समर में राजनेताओं और अभिनेताओं के अलावा खिलाड़ियों ने अपनी किस्मत आजमाई लेकिन इसमें से कइयों को हार का मुंह देखना पड़ा।
हालांकि इस बार क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी और शूटिंग से जुड़े कई खिलाड़ियों ने संसद में पहुंचने का सपना पाला था लेकिन 3 को छोड़कर बाकी सभी खिलाड़ियों को हार का सामना करना पड़ा है।
फूलपुर से हार गया टीम इंडिया का पूर्व क्रिकेटर
लगभग एक दशक तक टीम इंडिया के नियमित सदस्य रहे मोहम्मद कैफ ने क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अपने राजनीतिक करियर में विकल्प तलाशने की कोशिश की थी।
इसलिए उन्होंने कांग्रेस पार्टी को ज्वाइन किया और पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश के फूलपुर सीट से लोकसभा का टिकट दिया लेकिन जोरदार प्रचार के बाद भी संसद में पहुंचने का अपना सपना पूरा नहीं कर सके।
कैफ चुनाव में पहले तीन में भी नहीं रहे। उन्हें कुल 58,127 मत मिल और चौथे स्थान पर रहे। इस सीट से भारतीय जनता पार्टी के केशव प्रसाद मौर्य को जीत मिली। केशव ने 5 लाख से ज्यादा वोट हासिल कर संसद में पहुंचने में कामयाब रहे।
सीट बदली फिर भी हार गया यह पूर्व कप्तान
हम यहां बात कर रहे हैं टीम इंडिया के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन की, जिनका लगातार दूसरी बार संसद में जाने का सपना टूट गया।
पिछली बार वह उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से सांसद चुने गए थे लेकिन अपने संसदीय क्षेत्र से ज्यादा समय तक नदारद रहने के बाद उन्होंने यह सीट छोड़ दी और राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर से चुनाव लड़े।
लेकिन सीट बदलने का फायदा उन्हें नहीं मिला। अजहर इस चुनाव में दूसरे स्थान रहे और उन्हें कुल 4,12,868 मत हासिल हुए। वह भाजपा के सुखबीर सिंह जौनपुरिया (5,48,179) से पिछड़ गए। राजस्थान से न सिर्फ अजहर हारे बल्कि कांग्रेस का कोई भी उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर सकी।
ओलंपिक में रजत पदक विजेता पहुंचा संसद
हर बार की तरह इस बार भी भारत में कई खिलाड़ी राजनेता बनने के लिए चुनावी समर में उतरने का फैसला लिया लेकिन कुछ को ही जीत नसीब हुई।
इनमें से ही एक बड़ा नाम है निशानेबाज राज्यवर्द्धन सिंह राठौर का, जिन्होंने जयपुर (देहात) से कांग्रेस के बड़े नेता और केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी को तीन लाख से ज्यादा मतों के अंतर से हराया।
2004 में एथेंस ओलंपिक में डबल ट्रैप में भारत को रजत पदक दिलाने वाले राज्यवर्द्धन ने कुछ समय पहले ही भाजपा की सदस्यता हासिल की थी। उन्हें इस चुनाव में 6,32,930 मत हासिल हुए।
तीसरी बार लोकसभा सांसद बने कीर्ति आजाद
खिलाड़ी से नेता बने खिलाड़ियों में महज कीर्ति आजाद ही एकमात्र क्रिकेटर हैं जो चुनाव जीतकर संसद पहुंच सके हैं।
टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने बिहार के दरभंगा संसदीय क्षेत्र से जीत हासिल की है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर 3,14,949 मत हासिल किए। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के मोहम्म्द अली अशरफ फातमी को 35,043 मतों से हराया।
1983 में पहली बार वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य रहे कीर्ति तीसरी बार संसद पहुंचने में सफल रहे हैं। कीर्ति ने 1999 में फातमी को हराया था, इसके बाद आरजेडी के फातमी ने 2004 में क्रिकेटर को हराया था। कीर्ति 2009 में वापसी करते हुए फिर से लोकसभा पहुंच गए।
फुटबॉल के लोकप्रिय सितारे को लगा जोर का झटका
भारतीय फुटबॉल जगत के सबसे लोकप्रिय सितारे बाइचुंग भुटिया को इस चुनाव में जोर का झटका लगा है। वह ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की टिकट से पश्चिम बंगाल में दार्जिलिंग से चुनाव लड़ रहे थे।
लेकिन भुटिया को भाजपा के एसएस अहलुवालिया से एक लाख 97 हजार 239 वोटों से हार का सामना करना पड़ा।
2011 में फुटबॉल से संन्यास लेने वाले भुटिया से चुनाव में काफी जोर लगाया था लेकिन उनकी मेहनत रंग नहीं लाई और उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उन्हें यह हार तब मिली जब उनकी पार्टी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 34 सीट हासिल किया।
पर एक पूर्व फुटबॉलर ने हासिल की दूसरी जीत
पूर्व भारतीय कप्तान बाइचुंग भुटिया भले ही चुनाव हार गए हों लेकिन एक और पूर्व फुटबॉलर जो पश्चिम बंगाल से ही अपनी किस्मत आजमा रहे थे उन्हें जीत हासिल हुई है।
भुटिया की पार्टी के साथी और भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान प्रसून बनर्जी ने जीत हासिल करने के साथ ही हावड़ा में अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे हैं।
प्रसून ने पिछले साल हावड़ा सीट पर उपचुनाव में जीत हासिल की थी। उन्हें इस बार चुनाव में चार लाख 88 हजार से ज्यादा मत हासिल हुए।
हॉकी के इस चहेते खिलाड़ी को भी मिली हार
इस बार के आम चुनाव में क्रिकेट, फुटबॉल और शूटिंग के अलावा हॉकी से जुड़े खिलाड़ी ने भी अपनी किस्मत आजमाई थी लेकिन उन्हें असफलता ही हाथ लगी।
दिलचस्प यह है कि हॉकी का यह खिलाड़ी भी भारतीय हॉकी टीम का कप्तान रहा है और उन्होंने 400 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का रिकॉर्ड बनाया है।
यहां बात हो रही है दिलीप टिर्की की जो बीजू जनता दल (बीजेडी) के टिकट पर ओडिशा के सुंदरगढ़ से लड़ रहे थे और उन्हें भाजपा के जुआल जुएल ओराम के हाथों 20 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से हार मिली। ओडिशा में बीजेडी ने जबर्दस्त सफलता हासिल की है लेकिन इस खिलाड़ी को हार का सामना करना पड़ा है।