CWG 2026: नीरज ने पांचवें स्थान पर रहकर फाइनल के लिए किया क्वालिफाई; रोहित-यशवीर भी पहुंचे; अरशद का क्या हुआ?
Commonwealth Games Javelin Throw Highlights: नीरज चोपड़ा फाइनल में पहुंच गए हैं। फाइनल मुकाबला 31 जुलाई (भारत में एक अगस्त) को देर रात खेला जाएगा। नीरज के साथ भारत के दो और खिलाड़ी भी फाइनल में पहुंचे हैं। इनमें रोहित यादव और यशवीर सिंह शामिल हैं।
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यह ध्यान देने वाली बात है कि 12 में से कोई भी खिलाड़ी क्वालिफिकेशन मार्क पार नहीं कर सका। क्वालिफिकेशन मार्क 84 मीटर का था। नीरज के अलावा क्वालिफिकेशन मुकाबले में भारत के रोहित यादव और यशवीर भी उतरे थे। इन दोनों ने भी फाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया है। तीन प्रयासों में से बेस्ट अटैम्प्ट को गिना गया। फाइनल मुकाबला 31 जुलाई (भारत में एक अगस्त) को देर रात 12:45 बजे के आसपास शुरू होगा।
- श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने अपने पहले प्रयास में 82.24 मीटर का थ्रो किया और इसके बाद उन्होंने अन्य दो प्रयास नहीं किए। उन्होंने पहले स्थान पर रहकर फाइनल में जगह बनाई।
- वहीं, ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स ने तीनों अटैम्प्ट लिए। पहला प्रयास 76.09 मीटर का, दूसरा प्रयास 81.29 मीटर का और तीसरा प्रयास 76.70 मीटर का रहा। 81.29 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ वह दूसरे स्थान पर रहे।
- वहीं, दक्षिण अफ्रीका के डू स्मिट ने अपने पहले प्रयास में 80.64 मीटर का थ्रो किया और अन्य दो प्रयास उनके फाउल रहे। हालांकि, वह तीसरे स्थान पर रहकर फाइनल में पहुंचने में कामयाब रहे।
- इंग्लैंड के बेन ईस्ट ने चौथे स्थान पर रहकर फाइनल में जगह बनाई। उनका पहला प्रयास 73.50 मीटर का और दूसरा प्रयास 80.38 मीटर का रहा। 80.38 मीटर का प्रयास फाइनल में पहुंचने के लिए काफी था।
नीरज चोपड़ा का प्रदर्शन
- नीरज का पहला प्रयास 76.28 मीटर का रहा, जो कि उतना अच्छा नहीं था।
- हालांक, दूसरे प्रयास में नीरज ने 79.61 मीटर का थ्रो लिया और सीधे पांचवें स्थान पर पहुंच गए।
- इस सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ वह फाइनल में जगह बनाने में कामयाब रहे। इसके बाद उन्होंने तीसरा प्रयास नहीं लिया।
रोहित यादव और यशवीर सिंह का प्रदर्शन
- भारत के रोहित यादव का पहला प्रयास 77.04 मीटर का और दूसरा प्रयास 78.37 मीटर का रहा। उन्होंने तीसरा प्रयास नहीं लिया। रोहित नौवें स्थान पर रहे।
- वहीं, यशवीर का पहला प्रयास 73.89 मीटर का, दूसरा प्रयास 74.45 मीटर का रहा। ऐसा लग रहा था कि वह क्वालिफाई नहीं कर पाएंगे। लेकिन तीसरे प्रयास में यशवीर ने 78.36 मीटर का थ्रो किया और 10वें स्थान पर रहकर फाइनल में पहुंचे।
पाकिस्तान के अरशद नदीम का प्रदर्शन
- पाकिस्तान के अरशद नदीम के लिए यह सीजन कुछ खास नहीं रहा है। उन्होंने यहां भी तीनों प्रयास लिए, लेकिन कुछ खास नहीं कर पाए।
- उनका पहला अटैम्प्ट 78.63 मीटर का रहा, जो कि सीजन बेस्ट प्रदर्शन है उनका। दूसरे में उन्होंने फाउल किया।
- अरशद नदीम का तीसरा प्रयास 75.65 मीटर का रहा। वहां सातवें स्थान पर रहकर फाइनल में तो पहुंचे, लेकिन नीरज से पीछे रहे।
- नीरज चोपड़ा के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स हमेशा खास रहे हैं। 2018 के गोल्ड कोस्ट खेलों में उन्होंने 86.47 मीटर की थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष भाला फेंक का स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बने थे।
- उस जीत के बाद नीरज ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। चार महीने बाद एशियाई खेलों में राष्ट्रीय रिकॉर्ड (88.06 मीटर) के साथ स्वर्ण जीता। फिर टोक्यो ओलंपिक का स्वर्ण, विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण और पेरिस ओलंपिक का रजत पदक जीतकर वह भारतीय एथलेटिक्स के सबसे बड़े सितारे बन गए।
- बता दें कि 2018 के बाद यह नीरज का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स है। वह चोट के कारण 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाए थे। अब जब वह आठ साल बाद इसमें वापसी कर रहे हैं तो स्वर्ण के अपनी यादों को ताजा करने का वक्त होगा।
चोट ने बदला नजरिया, अब डर नहीं आत्मविश्वास है
- पिछला एक साल नीरज के लिए आसान नहीं रहा। पीठ की लगातार परेशानी के कारण उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ और 2025 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप उनके करियर की सबसे निराशाजनक प्रतियोगिताओं में से एक रही।
- इसके बाद उन्होंने बड़ा फैसला लेते हुए अपने खेल की बुनियाद पर दोबारा काम किया। रन-अप, थ्रो का एंगल और तकनीक को निखारने पर पूरा फोकस किया। सबसे बड़ा बदलाव मानसिक रूप से आया। अब वह चोट के डर के साथ नहीं, बल्कि पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरते हैं।
- बीबीसी के पॉडकास्ट 'मोर दैन द स्कोर' में नीरज ने बताया कि दोहा डायमंड लीग में खेलने का फैसला उन्होंने महज सात दिन पहले लिया था। उनका लक्ष्य सिर्फ ग्लास्गो के लिए क्वालिफाई करना था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब वह हर अभ्यास सत्र में खुद को पूरी तरह नहीं झोंकते, बल्कि जरूरत के मुताबिक ही शरीर पर दबाव डालते हैं।
नीरज चोपड़ा के लिए यह स्पर्धा कहीं बढ़कर है। यह किसी मजबूरी में की जा रही वापसी नहीं, बल्कि चोट, आलोचना और असफलताओं से सीख लेकर खुद को नए सिरे से गढ़ने वाले एक चैंपियन की कहानी का अगला अध्याय है। अगर फाइनल में उनका भाला फिर उसी अंदाज में उड़ता है, तो यह सिर्फ एक और जीत नहीं, बल्कि यह संदेश भी होगा कि भारत का गोल्डन बॉय फिर अपनी सर्वश्रेष्ठ लय में लौट आया है।