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Neeraj Chopra: नीरज ने की एनआईएस पटियाला में मोंडोट्रैक लगाने की मांग, जानिए इससे होने वाले फायदे

Wed, 23 Oct 2024 11:19 PM IST
Mayank Tripathi स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Mayank Tripathi Updated Wed, 23 Oct 2024 11:19 PM IST
सार

मोंडोट्रैक एक नई सतह है जिसका उपयोग ट्रैक स्पर्धाओं के लिए किया जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि यह प्रदर्शन के स्तर को बढ़ाने के साथ चोट की संभावना को कम करता है।

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Neeraj Chopra demanded to install Mondotrack in NIS Patiala, know its benefits
नीरज चोपड़ा - फोटो : PTI

विस्तार

केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया के साथ राष्ट्रीय खेल विधेयक पर चर्चा के दौरान भारत के शीर्ष भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने बुधवार को यहां सरकार से पटियाला स्थित राष्ट्रीय खेल संस्थान में मोंडोट्रैक को जल्दी लगाने की मांग की।
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क्या है मोंडोट्रैक?
मोंडोट्रैक एक नई सतह है जिसका उपयोग ट्रैक स्पर्धाओं के लिए किया जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि यह प्रदर्शन के स्तर को बढ़ाने के साथ चोट की संभावना को कम करता है। पेरिस ओलंपिक और ब्रसेल्स में आयोजित डायमंड लीग के फाइनल में ट्रैक स्पर्धाओं का आयोजन इसी पर किया गया था। दुनिया भर के शीर्ष खिलाड़ियों ने इसकी सराहना की थी।
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क्या हैं इसके फायदे?
वल्केनाइज्ड रबर से बना यह ट्रैक खिलाड़ियों के चोटिल होने की संभावनाओं को कम करने के साथ उनकी गति को बढ़ता है। यह खिलाड़ियों के लिए लय बनाए रखने में मददगार होता है और इस पर उन्हें कम थकान महसूस होती है। नीरज ने इस चर्चा में ऑनलाइन भाग लिया और कहा कि वह 2018-19 से पटियाला में ‘मोंडोट्रैक’ की मांग कर रहे हैं। जमीनी स्तर पर सुविधाएं एक और अहम मुद्दा है।
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नीरज ने की तारीफ
नीरज ने कहा कि स्टेडियमों का इस्तेमाल सिर्फ राष्ट्रीय शिविर और विश्वकप जैसे बड़े टूर्नामेंटों के लिए ही नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, जब भारत 2036 में ओलंपिक की मेजबानी की आकांक्षा रखता है तो स्टेडियमों का उपयोग सिर्फ शिविरों और विश्वकप के लिए नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर देश को नई प्रतिभा चाहिए तो जमीनी स्तर पर अधिक सुविधाएं तैयार करने के साथ-साथ इन स्टेडियमों का अधिक उपयोग किया जाना चाहिए। हमें कोच की भूमिका को नहीं भूलना चाहिए। नीरज ने यह भी मांग की कि भारतीय कोचों को अधिक जागरूक बनाया जाना चाहिए और उन्हें दुनिया भर में जो हो रहा है उसके अनुरूप होना चाहिए।
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