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अर्जुन अवॉर्ड किस काम का जो दो वक्त की रोटी भी न दिला सके!
होशियारपुर/ब्यूरो
Updated Fri, 23 Aug 2013 10:36 AM IST
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फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह को नेशनल गेम्स में शिकस्त देने वाले अर्जुन अवार्डी मक्खन सिंह की पत्नी सुलिंदर कौर ने पति का अर्जुन अवार्ड नीलाम करने की पेशकश की है। इससे प्रशासन में हड़कंप की स्थिति है।
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डीसी ने एसडीएम को उनके घर भेज कर मनाने की कोशिश की। सुलिंदर कौर ने अपने बेटे को सरकारी नौकरी की मांग रखी है।
पंजाब में होशियारपुर के गांव बठुल्ला के अर्जुन अवार्डी स्व. मक्खन सिंह की पत्नी सुलिंदर कौर के अर्जुन अवार्ड नीलाम करने की बात सामने आते ही जिला प्रशासन में हरकत में आया। डीसी के निर्देश पर अधिकारी उनके घर पहुंचे।
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इस दौरान सुलिंदर कौर ने भरी आंखों और रूंधे गले से कहा कि अगर क्रिकेटरों के गेंद, बल्ले और जर्सी लाखों में नीलाम हो सकते हैं तो फिर वह अर्जुन अवार्ड उनके किस काम का जो उन्हें दो वक्त की रोटी भी नहीं दिला सके।
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कौर ने कहा कि उनको आज भी वह दिन अच्छी तरह याद है जब 1962 में कोलकाता नेशनल गेम्स में 400 मीटर की फाइनल दौड़ में मिल्खा सिंह को शिकस्त दी थी। तब 1964 में सेना की ओर से मैदान में उतरे मक्खन सिंह को तत्कालीन राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अर्जुन अवार्ड दिया था।
उन्हें चंडीगढ़ में फ्लैट और होशियारपुर में पेट्रोल पंप देने की घोषणा भी हुई, लेकिन ये वादे पूरे नहीं हुए। मक्खन सिंह 1975 में सेना से रिटायर हुए।
हालात के हाथों मजबूर मक्खन ने ट्रक ड्राइवरी की। एक हादसे में एक टांग गंवाने के बाद कभी हवा की रफ्तार से दौड़ने वाले मक्खन चलने-फिरने में लाचार हो गए। उन्होंने कुछ समय के लिए दुकान की। 2002 में उनका निधन हो गया।
सुलिंदर कौर ने बताया कि गरीबी के मारे दवा तक के पैसे न होने के चलते वह अपने दो बेटों की मौत देख चुकी हैं। अब उनका इकलौता सहारा परमिंदर सिंह भी शारीरिक तौर पर पूरी तरह सक्षम नहीं है और बीडीपीओ दफ्तर में ठेके पर सेवादार है।
उनसे मिलने पहुंचे एसडीएम कैप्टन करनैल सिंह ने सुलिंदर कौर की बात को ध्यान से सुना और प्रशासन की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया।
डीसी वरुण रूज़म ने कहा कि सुलिंदर कौर ने अपने बेटे को सरकारी नौकरी की मांग रखी है। वह इस बाबत राज्य सरकार को सूचित करेंगे।