खेलो इंडिया में हिमाचल ने नहीं भेजी अंडर-17 टीम, ये है बड़ी वजह
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प्रोत्साहन न मिलने से हिमाचल में खेल प्रतिभा आगे नहीं आ पा रही हैं। खेलो इंडिया में पिछले तीन साल से अंडर-17 वर्ग में कोई टीम भाग नहीं ले रही है। इस बार भी 10 जनवरी से असम के गुवाहाटी में चल रहे खेलो इंडिया यूथ गेम्स में अंडर-17 वर्ग में हिमाचल की टीमों का पंजीकरण ही नहीं किया गया है। इस कारण हिमाचल अंडर-17 के प्रारूप में कोई चुनौती नहीं दे पा रहा है। ऐसा नहीं है कि हिमाचल में अंडर-17 वर्ग में कोई भी खिलाड़ी या टीम में प्रतिभा नहीं है, लेकिन खेल और शिक्षा विभाग के प्रारूप में ही अंडर-17 नहीं है।
इस कारण हिमाचल की अंडर-17 वर्ग की टीमों को खेलो इंडिया गेम्स में नहीं भेजा जा रहा है। हिमाचल के स्कूलों में तीन वर्ग के प्रारूप में खेलकूद प्रतियोगिताएं करवाई जाती हैं। अंडर-14, अंडर-16 और अंडर-19 वर्ग शामिल है। खेलो इंडिया में अंडर-17 और अंडर-21 वर्ग के दो ही प्रारूप में टीम और व्यक्तिगत खेल के मुकाबले होते हैं। अगर शिक्षा और खेल विभाग अपने प्रारूप में बदला करता है, तो खिलाड़ियों को मौका मिल सकता है।
पिछले साल भी आए थे सिर्फ छह मेडल
साल 2019 में खेलो इंडिया में हिमाचल को कबड्डी में स्वर्ण, बॉक्सिंग में एक स्वर्ण पदक, भारोत्तोलन में एक रजत पदक और जूडो में एक कांस्य पदक, दौड़ में एक कांस्य और फ्री स्टाल कुश्ती में भी एक कांस्य पद मिला था।
शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश क्रीड़ा संघ से इस मामले में जल्द बैठक की जाएगी, ताकि अगली वर्ष होने वाले खेलो इंडिया यूथ गेम्स में अंडर-17 वर्ग की टीमों को समय पर पंजीकरण किया जा सकें।
खेल मंत्री गोबिंद सिंह ठाकुर ने कहा कि खेल विभाग की ओर से जानबूझ कर खिलाड़ियों की प्रतिभा को नहीं दबाया जा रहा है। जल्द इस मामले में खेल और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक कर बदलाव का प्रस्ताव रखा जाएगा।