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कानपुर की बेटी ने बढ़ाया मान, हैंडबॉल खिलाड़ी ज्योति का इंटरनेशनल टीम में चयन, ये रहीं उपलब्धियां
Thu, 14 Nov 2019 03:36 PM IST
शिखा पांडेय
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 14 Nov 2019 03:36 PM IST
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हैंडबाल खिलाड़ी ज्योति शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर की अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल खिलाड़ी ज्योति शुक्ला का एक बार फिर इंटरनेशनल टीम में चयन हुआ है। ज्योति एक से 10 दिसंबर तक काठमांडू में होने वाली साउथ एशियन गेम्स में हिस्सा लेंगी। इसमें छह देशों की टीमें हिस्सा लेंगी।
इस प्रतियोगिता मेें पूरे प्रदेश से एक मात्र ज्योति का चयन हुआ है। कल्याणपुर निवासी शिव शंकर की बेटी ज्योति शुक्ला में एशियाड में खेलने वाली शहर की पहली हैंडबॉल खिलाड़ी थीं। दोबारा इंटरनेशनल टीम में चयन होने पर पिता ने खुशी जताई है।
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इस प्रतियोगिता मेें पूरे प्रदेश से एक मात्र ज्योति का चयन हुआ है। कल्याणपुर निवासी शिव शंकर की बेटी ज्योति शुक्ला में एशियाड में खेलने वाली शहर की पहली हैंडबॉल खिलाड़ी थीं। दोबारा इंटरनेशनल टीम में चयन होने पर पिता ने खुशी जताई है।
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काठमांडू में होने वाली इस चैंपियनशिप में भारतीय टीम के अलावा, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार की टीमें भी खेलेंगी। भारत का पहला मैच श्रीलंका के साथ होगा। ज्योति ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय प्रशिक्षक रजत आदित्य दीक्षित व अतुल को दिया है।
ज्योति ने कहा कि हैंडबॉल के गुर सिखाने के अलावा रजत आदित्य दीक्षित ने हर संभव मदद की। ज्योति शुक्ला वर्तमान में रेलवे में टीटी के पद पर गोरखपुर में तैनात हैं।
ज्योति ने कहा कि हैंडबॉल के गुर सिखाने के अलावा रजत आदित्य दीक्षित ने हर संभव मदद की। ज्योति शुक्ला वर्तमान में रेलवे में टीटी के पद पर गोरखपुर में तैनात हैं।
अर्थिक संकट से जूझना पड़ा, मगर हार नहीं मानी
ज्योति के पिता शिव शंकर की बल्ब की फैक्ट्री थी। चाइना की लाइटें व एलईडी लाइटें आने से बल्ब की फैक्ट्री को 2008 में बंद करना पड़ा था। इसके बाद से घर की अर्थिक स्थिति काफी बिगड़ गई थी। इसके बाद भी ज्योति ने हार नहीं मानी।
अपनी लगन व मेहनत से देखते हुए उसकी शिक्षिका रमाकांती व प्रशिक्षक रजत आदित्य दीक्षित ने उसी हर संभव मदद दी और हर प्रतियोगिता में खेलने के लिए बाहर भेजते थे।
ज्योति के पिता शिव शंकर की बल्ब की फैक्ट्री थी। चाइना की लाइटें व एलईडी लाइटें आने से बल्ब की फैक्ट्री को 2008 में बंद करना पड़ा था। इसके बाद से घर की अर्थिक स्थिति काफी बिगड़ गई थी। इसके बाद भी ज्योति ने हार नहीं मानी।
अपनी लगन व मेहनत से देखते हुए उसकी शिक्षिका रमाकांती व प्रशिक्षक रजत आदित्य दीक्षित ने उसी हर संभव मदद दी और हर प्रतियोगिता में खेलने के लिए बाहर भेजते थे।
ये रहीं उपलब्धियां
2008 में पहली जिला स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
2009 में पहली बार राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
2010 में लखनऊ साईं हॉस्टल में दाखिला मिला।
2015 में पहली बार भारतीय टीम में चयन हुआ।
2016 मे रेलवे टीटी के पद पर नौकरी लगी।
2018 में जकार्ता में हुई एशियन गेम्स में भारतीय टीम की तरफ से खेला।
2018 में जापान में हुई एशियन चैंपियन में भारतीय टीम की तरफ से खेला।
2008 में पहली जिला स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
2009 में पहली बार राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
2010 में लखनऊ साईं हॉस्टल में दाखिला मिला।
2015 में पहली बार भारतीय टीम में चयन हुआ।
2016 मे रेलवे टीटी के पद पर नौकरी लगी।
2018 में जकार्ता में हुई एशियन गेम्स में भारतीय टीम की तरफ से खेला।
2018 में जापान में हुई एशियन चैंपियन में भारतीय टीम की तरफ से खेला।