‘मंजिलें भी जिद्दी हैं, रास्ते भी जिद्दी हैं। पर क्या करूं मैं, हौसले भी तो मेरे जिद्दी हैं...’ हॉकी लीजेंड बलबीर सिंह सीनियर द्वारा अपने 95 वें जन्मदिवस पर लिखी गई यह पंक्ति उन पर सही चरितार्थ होती है। उनके बुलंद हौसले के आगे बीमारी टिक नहीं पाई। शुक्रवार को 108 दिन बाद उनको पीजीआई से छुट्टी मिल गई है।
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Balbir Singh Senior
- फोटो : अमर उजाला
बलबीर सिंह सीनियर को पिछले साल अक्तूबर माह के पहले हफ्ते में निमोनिया और कार्डियक फेल्योर की शिकायत पर पीजीआई में एडमिट कराया गया था। करीब डेढ़ महीने तक वे वेंटिलेटर पर रहे। पीजीआई में ही 31 दिसंबर को उन्होंने अपना 95वां जन्मदिन मनाया। इलाज के दौरान पीजीआई में बलबीर सिंह सीनियर के बेड के सामने बड़ा सा तिरंगा लगाया गया था। परिवारवालों के अनुसार सीनियर लगातार इसी तिरंगे को देखते रहते थे। इसी तिरंगे की वजह से वे मौत को मात देकर घर लौटे हैं।
बता दें कि कि बलबीर सिंह सीनियर जिस टूर्नामेंट का उद्घघाटन करने जाते थे तो वहां हमेशा तिरंगे को सबसे पहले सैल्यूट करते थे। आजादी के बाद लंदन में अंग्रेजों को उन्हीं के घर में हराने के बाद पहली बार तिरंगा लहराया गया था। उस समय को बलबीर सिंह सीनियर आज भी अपनी यादों में बसाए हुए हैं।
पूरी तरह से फिट होने में लगेगा समय
घर पर दिवाली जैसा माहौल
उनके नाती कबीर ने बताया कि बलबीर सिंह सीनियर को गुरुवार देर रात पीजीआई से छुट्टी दे दी गई। 108 दिन के बाद वह वापस घर आए हैं। पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। कबीर कहते हैं कि हमारे लिए आज का दिन दिवाली मनाने जैसा है। सीनियर के तीनों बेटे कंवलबीर, करनबीर और गुरबीर कनाडा में हैं। उन सभी को फोन पर सूचित किया जा चुका है। बेटों ने बलबीर के घर आने की बात सुनकर खुशी जताई है।