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प्रतिबंध के बावजूद होंगे आईओए के चुनाव
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Dec 2012 12:49 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ (आईओसी) के प्रतिबंध के बावजूद बुधवार को होने वाले भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के चुनाव पर प्रतिबंध का असर नहीं पड़ेगा। आईओए अध्यक्ष पद के लिए चुनाव मैदान में रह गए एकमात्र उम्मीदवार अभय सिंह चौटाला ने साफ कर दिया कि आईओए चुनाव निर्धारित समय पर होंगे।
आईओसी के प्रतिबंध से चुनाव रोके जाने का कोई मतलब नहीं है। चुनाव के बाद आईओसी को दिखाया जाएगा कि चुनाव में किसी भी तरह के नियमों का उल्लंघन नहीं किया गया है। हालांकि खेल मंत्रालय ने इस प्रतिबंध का ठीकरा आईओए पर फोड़ा है। मंत्रालय का कहना है कि आईओए के उदासीन रवैये और आपसी खींचतान की वजह से भारत पर प्रतिबंध लगा है।
चौटाला ने यह भी कहा है कि आईओसी की यह तानाशाही है कि उसने आईओए के चुनाव होने तक का इंतजार नहीं किया और रंधीर सिंह के इशारे पर भारत पर प्रतिबंध ठोक दिया। वहीं, चौटाला के साथी और हॉकी इंडिया के सेक्रेटरी जनरल नरेंद्र बत्रा ने साफ आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई रंधीर के इशारे पर की गई है। आईओसी की मंगलवार की बैठक में जिस ओलंपिक काउंसिल ऑफ इंडिया के अधिकारी विनोद तिवारी ने आईओसी के समक्ष भारत के खिलाफ मामले को रखा।
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बत्रा का दावा है कि यह अधिकारी भारतीय है और इसकी ओएसी में तैनाती रंधीर सिंह ने की है। वहीं, खेल मंत्रालय भी आईओसी के इस कदम से हतप्रभ है लेकिन वह इसके लिए कहीं न कहीं भारतीय ओलंपिक संघ को जिम्मेदार मानता है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह स्थिति न आने पाए इसलिए मंत्रालय ने आईओए को चुनाव प्रक्रिया रोककर आईओसी के साथ बातचीत करने को कहा था लेकिन उस दौरान आईओए के कार्यकारी अध्यक्ष विजय मल्होत्रा ने मंत्रालय से यह कहा था कि उन्होंने किस हैसियत से आईओए के बाईपास करते हुए आईओसी को पत्र लिख दिया। मंत्रालय का यह भी कहना है कि अगर आईओए ने अपने संविधान में संशोधन किया होता तो यह नौबत नहीं आनी थी क्योंकि स्पोर्ट्स कोड का एक-एक शब्द ओलंपिक चार्टर से उठाया गया है।
रंधीर सिंह से मांगा इस्तीफा
जब अभय सिंह चौटाला से यह पूछा गया कि इस प्रतिबंध के लिए कौन जिम्मेदार है तो उन्होंने कहा कि ‘प्रतिबंध दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके लिए रंधीर सिंह जिम्मेदार हैं। भारत का पक्ष रखने के लिए ही वह आईओसी में हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ को गुमराह किया है। आईओए के कार्यवाहक अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा ने आईओसी को पत्र लिखा था लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज किया। लिहाजा रंधीर सिंह को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।
मैं भारत सरकार से आग्रह करूंगा कि वह रंधीर सिंह पर कार्रवाई करे।’ प्रतिबंध के पीछे आईओए अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर अभय सिंह चौटाला और रंधीर सिंह के बीच आपसी खींचतान को भी कारण माना जा रहा है क्योंकि दोनों इस पद की होड़ में थे लेकिन ऐन वक्त पर रंधीर सिंह ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इस संबंध में जब चौटाला से पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘नहीं, रंधीर से मेरी कोई जातीय लड़ाई नहीं है।
उनके पास नंबर नहीं थे इसलिए उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा।’ कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले के आरोपी ललित भनोट के चुनाव लड़ने के सवाल पर चौटाला ने कहा, ‘इस देश में अनेक लोग ऐसे हैं, जो सीएम और सांसद हैं और उनके खिलाफ कई मामले लंबित हैं फिर भी वे पद पर बने हुए हैं। लोकतंत्र में सभी को चुनाव लड़ने का अधिकार है। भनोट भी चुनाव लड़ रहे हैं। जब तक कोई दोषी साबित नहीं हो जाता है तब कि उसे गुनहगार नहीं कहेंगे।’
आईओसी की नाराजगी
- भारतीय ओलंपिक संघ के चुनाव में सरकारी दखल
- नेताओं को भारतीय ओलंपिक संघ में बड़े पदों पर बैठाया गया
- संघ ने चुनाव में ओलंपिक चार्टर का पालन नहीं किया
- सरकार के स्पोर्ट्स कोड के अनुसार चुनाव गलत
प्रतिबंध के मायने
- आईओसी से खेलों के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद रुकेगी
- तिरंगे झंडे तले भाग नहीं ले सकेंगे भारतीय खिलाड़ी
‘यह बहुत निराश करने वाली खबर है। इससे खिलाड़ी आहत होंगे।’
- विजेंदर कुमार
‘ओलंपिक चार साल बाद होगा। तब तक मामले को सुलझा लिया जाएगा। बाकी गेम्स में इंडिया का फ्लैग हर जगह जाएगा, इसमें कोई प्रतिबंध नहीं है।’
- तरलोचन सिंह, उपाध्यक्ष आईओए
‘मामले को सुलझाने के लिए आईओसी को चिट्ठी लिखी थी लेकिन आईओसी ने कोई जवाब नहीं दिया।’
- जीतेंद्र सिंह, खेल मंत्री
आईओसी ने इन देशों को क्यों नहीं किया सस्पेंड
खेलों में सरकारी हस्तक्षेप के कारण इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) ने बुधवार को इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) को निलंबित कर दिया। लेकिन भारत से अलग कई ऐसे देश भी है जहां खेलों में सरकारी हस्तक्षेप लंबे समय से है, इसके बावजूद आईओसी ने आज तक इन देशों पर कभी प्रतिबंध नहीं लगाया। ...आखिर क्यों?
फ्रांस:
28 अगस्त 1945 को फ्रांस में खेल कानून के एक बेहद ही हस्तक्षेप मॉडल को अपनाया गया। फ्रांस सरकार ने सभी खेलों और प्रतिस्पर्धाओं के आयोजनों के अधिकार अपने हाथ में ले लिए। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले एथलीटों का चयन का अधिकार भी अपने हाथ में ले लिया। सरकार ने यह काम राष्ट्रीय खेल महासंघ को सभी अधिकार सौंपकर किया।
मलयेशिया:
1997 में आया खेल विकास एक्ट 1998 में प्रभावी रूप से सामने आया। ओलंपिक काउंसिल ऑफ मलयेशिया के सभी खेल निकायों ने खुद को खेल मंत्री द्वारा नियुक्त कमिश्नर ऑफ स्पोर्ट्स के साथ रजिस्टर करा लिया। इस एक्ट के तहत खेल मंत्री को खेल के विकास से संबंधित दिशा-निर्देशों को जारी करने का अधिकार है।
इटली:
देश की राष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी ने एक कानून को मंजूरी देते हुए कमेटी ओलंपिक नाजीयोनाले इटालियानो (सीओएनआई) को स्थापित किया। इस कानून का प्रावधान संरचना और खेल से जुड़े अन्य जनादेश भी स्थापित करता है। इसलिए यह भी कहा जा सकता है कि इटली भी खेल में हस्तक्षेप के दृष्टिकोण का अनुसरण करता है।
अमेरिका:
टेड स्टीवंस ओलंपिक एमेच्योर एक्ट 1978 के तहत यूएस ओलंपिक कमेटी (यूएसओसी) सरकार के कुछ प्रावधानों का पालन करती है। जिसमें से एक यह है कि यूएसओसी को अपनी सभी कार्यप्रणालियों और एकाउंट की विस्तृत रिपोर्ट राष्ट्रपति और कांग्रेस को देनी होगी।
- यूनाइटेड किंगडम, आस्ट्रेलिया, इस्तोनिया, आस्ट्रिया, बेल्जियम, क्रोशिया, डेनमार्क, फिनलैंड, लताविया, नमीबिया, मॉरिशस, रोमानिया, जर्मनी, आइसलैंड और पुर्तगाल के पास खुद की मदद से खेलों को चलाने के लिए बुनियादी कानून और गाइडलाइंस हैं।
- माल्टा और दक्षिण अफ्रीका ने खेलों को चलाने के लिए कड़े नियम बनाए हुए हैं।
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आईओसी के प्रतिबंध से चुनाव रोके जाने का कोई मतलब नहीं है। चुनाव के बाद आईओसी को दिखाया जाएगा कि चुनाव में किसी भी तरह के नियमों का उल्लंघन नहीं किया गया है। हालांकि खेल मंत्रालय ने इस प्रतिबंध का ठीकरा आईओए पर फोड़ा है। मंत्रालय का कहना है कि आईओए के उदासीन रवैये और आपसी खींचतान की वजह से भारत पर प्रतिबंध लगा है।
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चौटाला ने यह भी कहा है कि आईओसी की यह तानाशाही है कि उसने आईओए के चुनाव होने तक का इंतजार नहीं किया और रंधीर सिंह के इशारे पर भारत पर प्रतिबंध ठोक दिया। वहीं, चौटाला के साथी और हॉकी इंडिया के सेक्रेटरी जनरल नरेंद्र बत्रा ने साफ आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई रंधीर के इशारे पर की गई है। आईओसी की मंगलवार की बैठक में जिस ओलंपिक काउंसिल ऑफ इंडिया के अधिकारी विनोद तिवारी ने आईओसी के समक्ष भारत के खिलाफ मामले को रखा।
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बत्रा का दावा है कि यह अधिकारी भारतीय है और इसकी ओएसी में तैनाती रंधीर सिंह ने की है। वहीं, खेल मंत्रालय भी आईओसी के इस कदम से हतप्रभ है लेकिन वह इसके लिए कहीं न कहीं भारतीय ओलंपिक संघ को जिम्मेदार मानता है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह स्थिति न आने पाए इसलिए मंत्रालय ने आईओए को चुनाव प्रक्रिया रोककर आईओसी के साथ बातचीत करने को कहा था लेकिन उस दौरान आईओए के कार्यकारी अध्यक्ष विजय मल्होत्रा ने मंत्रालय से यह कहा था कि उन्होंने किस हैसियत से आईओए के बाईपास करते हुए आईओसी को पत्र लिख दिया। मंत्रालय का यह भी कहना है कि अगर आईओए ने अपने संविधान में संशोधन किया होता तो यह नौबत नहीं आनी थी क्योंकि स्पोर्ट्स कोड का एक-एक शब्द ओलंपिक चार्टर से उठाया गया है।
रंधीर सिंह से मांगा इस्तीफा
जब अभय सिंह चौटाला से यह पूछा गया कि इस प्रतिबंध के लिए कौन जिम्मेदार है तो उन्होंने कहा कि ‘प्रतिबंध दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके लिए रंधीर सिंह जिम्मेदार हैं। भारत का पक्ष रखने के लिए ही वह आईओसी में हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ को गुमराह किया है। आईओए के कार्यवाहक अध्यक्ष विजय कुमार मल्होत्रा ने आईओसी को पत्र लिखा था लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज किया। लिहाजा रंधीर सिंह को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।
मैं भारत सरकार से आग्रह करूंगा कि वह रंधीर सिंह पर कार्रवाई करे।’ प्रतिबंध के पीछे आईओए अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर अभय सिंह चौटाला और रंधीर सिंह के बीच आपसी खींचतान को भी कारण माना जा रहा है क्योंकि दोनों इस पद की होड़ में थे लेकिन ऐन वक्त पर रंधीर सिंह ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इस संबंध में जब चौटाला से पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘नहीं, रंधीर से मेरी कोई जातीय लड़ाई नहीं है।
उनके पास नंबर नहीं थे इसलिए उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा।’ कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले के आरोपी ललित भनोट के चुनाव लड़ने के सवाल पर चौटाला ने कहा, ‘इस देश में अनेक लोग ऐसे हैं, जो सीएम और सांसद हैं और उनके खिलाफ कई मामले लंबित हैं फिर भी वे पद पर बने हुए हैं। लोकतंत्र में सभी को चुनाव लड़ने का अधिकार है। भनोट भी चुनाव लड़ रहे हैं। जब तक कोई दोषी साबित नहीं हो जाता है तब कि उसे गुनहगार नहीं कहेंगे।’
आईओसी की नाराजगी
- भारतीय ओलंपिक संघ के चुनाव में सरकारी दखल
- नेताओं को भारतीय ओलंपिक संघ में बड़े पदों पर बैठाया गया
- संघ ने चुनाव में ओलंपिक चार्टर का पालन नहीं किया
- सरकार के स्पोर्ट्स कोड के अनुसार चुनाव गलत
प्रतिबंध के मायने
- आईओसी से खेलों के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद रुकेगी
- तिरंगे झंडे तले भाग नहीं ले सकेंगे भारतीय खिलाड़ी
‘यह बहुत निराश करने वाली खबर है। इससे खिलाड़ी आहत होंगे।’
- विजेंदर कुमार
‘ओलंपिक चार साल बाद होगा। तब तक मामले को सुलझा लिया जाएगा। बाकी गेम्स में इंडिया का फ्लैग हर जगह जाएगा, इसमें कोई प्रतिबंध नहीं है।’
- तरलोचन सिंह, उपाध्यक्ष आईओए
‘मामले को सुलझाने के लिए आईओसी को चिट्ठी लिखी थी लेकिन आईओसी ने कोई जवाब नहीं दिया।’
- जीतेंद्र सिंह, खेल मंत्री
आईओसी ने इन देशों को क्यों नहीं किया सस्पेंड
खेलों में सरकारी हस्तक्षेप के कारण इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (आईओसी) ने बुधवार को इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) को निलंबित कर दिया। लेकिन भारत से अलग कई ऐसे देश भी है जहां खेलों में सरकारी हस्तक्षेप लंबे समय से है, इसके बावजूद आईओसी ने आज तक इन देशों पर कभी प्रतिबंध नहीं लगाया। ...आखिर क्यों?
फ्रांस:
28 अगस्त 1945 को फ्रांस में खेल कानून के एक बेहद ही हस्तक्षेप मॉडल को अपनाया गया। फ्रांस सरकार ने सभी खेलों और प्रतिस्पर्धाओं के आयोजनों के अधिकार अपने हाथ में ले लिए। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में देश का प्रतिनिधित्व करने वाले एथलीटों का चयन का अधिकार भी अपने हाथ में ले लिया। सरकार ने यह काम राष्ट्रीय खेल महासंघ को सभी अधिकार सौंपकर किया।
मलयेशिया:
1997 में आया खेल विकास एक्ट 1998 में प्रभावी रूप से सामने आया। ओलंपिक काउंसिल ऑफ मलयेशिया के सभी खेल निकायों ने खुद को खेल मंत्री द्वारा नियुक्त कमिश्नर ऑफ स्पोर्ट्स के साथ रजिस्टर करा लिया। इस एक्ट के तहत खेल मंत्री को खेल के विकास से संबंधित दिशा-निर्देशों को जारी करने का अधिकार है।
इटली:
देश की राष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी ने एक कानून को मंजूरी देते हुए कमेटी ओलंपिक नाजीयोनाले इटालियानो (सीओएनआई) को स्थापित किया। इस कानून का प्रावधान संरचना और खेल से जुड़े अन्य जनादेश भी स्थापित करता है। इसलिए यह भी कहा जा सकता है कि इटली भी खेल में हस्तक्षेप के दृष्टिकोण का अनुसरण करता है।
अमेरिका:
टेड स्टीवंस ओलंपिक एमेच्योर एक्ट 1978 के तहत यूएस ओलंपिक कमेटी (यूएसओसी) सरकार के कुछ प्रावधानों का पालन करती है। जिसमें से एक यह है कि यूएसओसी को अपनी सभी कार्यप्रणालियों और एकाउंट की विस्तृत रिपोर्ट राष्ट्रपति और कांग्रेस को देनी होगी।
- यूनाइटेड किंगडम, आस्ट्रेलिया, इस्तोनिया, आस्ट्रिया, बेल्जियम, क्रोशिया, डेनमार्क, फिनलैंड, लताविया, नमीबिया, मॉरिशस, रोमानिया, जर्मनी, आइसलैंड और पुर्तगाल के पास खुद की मदद से खेलों को चलाने के लिए बुनियादी कानून और गाइडलाइंस हैं।
- माल्टा और दक्षिण अफ्रीका ने खेलों को चलाने के लिए कड़े नियम बनाए हुए हैं।