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पैरा एशियन गेम्स: किस तरह रजत में बदला शरत का कांस्य पदक? उज्बेकिस्तान के खिलाड़ी की गलती का मिला फायदा
Wed, 21 Oct 2026 07:48 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नागोया
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Wed, 21 Oct 2026 07:48 PM IST
सार
- पैरा एशियन गेम्स में भारत के शरत माकनहल्ली को उस वक्त फायदा पहुंचा जब उनका कांस्य पदक रजत में बदल गया।
- शरत ने पुरुषों की 1500 मीटर टी12 स्पर्धा में कांस्य जीता था, लेकिन स्वर्ण जीतने वाले खिलाड़ी को अयोग्य घोषित किया गया जिस कारण उनके पदक का रंग रजत हो गया।
- शरत चार मिनट 11.01 सेकेंड के अपने सत्र के सर्वश्रेष्ठ समय के साथ तीसरे स्थान पर रहे थे।
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शरत माकनहल्ली
- फोटो : SAI Media
विस्तार
भारत के शरत माकनहल्ली का पैरा एशियन गेम्स की पुरुषों की 1500 मीटर टी12 स्पर्धा में बुधवार को जीता कांस्य पदक रजत में बदल गया। दरअसल, मूल रूप से स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी को नियमों के उल्लंघन के कारण अयोग्य घोषित किया गया जिस कारण शरत को फायदा पहुंचा। उज्बेकिस्तान के फखरिद्दीन खामराएव ने चार मिनट 7.48 सेकेंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता था, जबकि जॉर्डन के नबील मकाबलेह ने चार मिनट 7.97 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक हासिल किया था। माकनहल्ली ने चार मिनट 11.01 सेकेंड के अपने सत्र के सर्वश्रेष्ठ समय के साथ कांस्य पदक जीता था।
जॉर्डन के खिलाड़ी ने दर्ज कराया था विरोध
जॉर्डन के खिलाड़ी की ओर से विरोध दर्ज कराए जाने के बाद खामराएव को विश्व पैरा एथलेटिक्स के नियम टीआर 18.1 (बी) के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद जॉर्डन के मकाबलेह को स्वर्ण पदक दिया गया, जबकि माकनहल्ली को रजत पदक मिला। नियम टीआर 18.1 (बी) के तहत अनुचित लाभ हासिल करने के लिए किसी प्रतिद्वंद्वी को धक्का देने या उसका रास्ता रोकने पर खिलाड़ी को अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
भारत के पैरा एथलेटिक्स मुख्य कोच सत्यनारायण ने बताया कि दौड़ के अंतिम 200 मीटर में खामराएव ने जॉर्डन के अपने प्रतिद्वंद्वी को दाईं ओर से पार करने के बजाय बाईं ओर से पीछे छोड़ा था जिसके कारण उन्हें अयोग्य घोषित किया गया। टी12 वर्ग उन दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए है जिनकी दृष्टि सीमित होती है। इस वर्ग के खिलाड़ी स्पर्धा और अपनी पसंद के आधार पर गाइड धावक के साथ या उसके बिना प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
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जॉर्डन के खिलाड़ी ने दर्ज कराया था विरोध
जॉर्डन के खिलाड़ी की ओर से विरोध दर्ज कराए जाने के बाद खामराएव को विश्व पैरा एथलेटिक्स के नियम टीआर 18.1 (बी) के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद जॉर्डन के मकाबलेह को स्वर्ण पदक दिया गया, जबकि माकनहल्ली को रजत पदक मिला। नियम टीआर 18.1 (बी) के तहत अनुचित लाभ हासिल करने के लिए किसी प्रतिद्वंद्वी को धक्का देने या उसका रास्ता रोकने पर खिलाड़ी को अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
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भारत के पैरा एथलेटिक्स मुख्य कोच सत्यनारायण ने बताया कि दौड़ के अंतिम 200 मीटर में खामराएव ने जॉर्डन के अपने प्रतिद्वंद्वी को दाईं ओर से पार करने के बजाय बाईं ओर से पीछे छोड़ा था जिसके कारण उन्हें अयोग्य घोषित किया गया। टी12 वर्ग उन दृष्टिबाधित खिलाड़ियों के लिए है जिनकी दृष्टि सीमित होती है। इस वर्ग के खिलाड़ी स्पर्धा और अपनी पसंद के आधार पर गाइड धावक के साथ या उसके बिना प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
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